KORBA : राखड़ डैम फूटने से CSEB के काम पर उठे सवाल !राखड़ डैम की रेजिंग या जुगाड़ मॉडल ?

कोरबा। जिले में इन दिनों एक डैम चर्चा के केंद्र में है। मामला Chhattisgarh State Electricity Board के राखड़ बांध का है, जहां रेजिंग का काम चल रहा है। कागजों में सब कुछ तकनीकी है, लेकिन जमीन पर जो दिख रहा है, उसने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में झाबू राखड़ डैम के टूटने के बाद मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने का काम तेज किया गया। काम का जिम्मा Shankar Engineering को दिया गया है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि फिलिंग के लिए जेसीबी से सीधे राख डाली जा रही है और परत दर परत मजबूती देने वाली प्रक्रिया पर उतना ध्यान नहीं दिख रहा, जितना तकनीकी मानकों में जरूरी बताया जाता है।

👉आखिर रेजिंग की सही प्रक्रिया क्या कहती है?

तकनीकी गाइडलाइन के मुताबिक डैम की ऊंचाई बढ़ाने से पहले बेस की स्ट्रिपिंग की जाती है। फिर वाइब्रेटर से कॉम्पैक्शन किया जाता है, ताकि नीचे की परत मजबूत हो। इसके बाद लगभग 300 मिमी यानी 0.30 मीटर की राख की लेयर डाली जाती है और उसे ठीक से दबाकर समतल किया जाता है।
सिर्फ राख भर देना पर्याप्त नहीं होता। बीच में करीब आधा मीटर मोटी रेत की परत डाली जाती है, ताकि पानी का निकास बना रहे और अंदर दबाव न बढ़े। हर लेयर के बाद कॉम्पैक्शन अनिवार्य माना जाता है, ताकि भविष्य में धंसाव या रिसाव की समस्या न आए।
कागजों पर यह प्रक्रिया संतुलित और वैज्ञानिक दिखती है। लेकिन सवाल यही है कि क्या मैदान में भी वही सटीकता बरती जा रही है?

👉बार बार टूटने की कहानी,
इंजीनियर की मनमानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों में भी बांध की मजबूती पर सवाल उठते रहे हैं। हर बरसात के बाद दरार, रिसाव या टूटने की खबर सामने आती है। ऐसे में इस बार की रेजिंग को लेकर उम्मीद भी है और आशंका भी।कुछ लोग इसे इंजीनियरों की सूझबूझ बता रहे हैं, तो कुछ इसे जल्दबाजी और खर्च बचाने की कोशिश मान रहे हैं। कोरबा में फिलहाल बहस जारी है। तकनीक बनाम जुगाड़ की यह लड़ाई कागजों पर नहीं, मैदान में तय होगी। असली परीक्षा बारिश में होगी, जब पानी दबाव बनाएगा और डैम अपनी मजबूती का सच बताएगा।

सोर्स -न्यूजपावर जोन डॉट कॉम