कोरबा । शहर के बीच से गुजरने वाली बांयीं तट नहर की जर्जर हालत सुधारने के लिए एक बार फिर 7.49 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है। यह तीसरी कोशिश है। इससे पहले दूसरी बार कोई भी ठेकेदार टेंडर भरने आगे नहीं आया। उसकी वजह नहर के दोनों किनारों पर अतिक्रमण है। जिससे मरम्मत कार्य के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं बची है।

मानसून से पहले मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो सिंचाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। अभी नहर से पूरी क्षमता से पानी नहीं छोड़ पा रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान होने की आशंका है। दर्री बराज से निकली यह नहर सुनालिया, सीतामढ़ी और इमलीडूग्गू क्षेत्र से होकर गुजरती है। नहर के ऊपर ही सड़क बना दी गई है। संजयनगर रेलवे क्रॉसिंग से सेफ्टीवॉल और स्ट्रीट लाइट भी लगाए गए थे, लेकिन नहर की लाइनिंग टूटने से सड़क अंदर से खोखली हो गई है। सिंचाई के दौरान मिट्टी कटने से सेफ्टीवॉल दब गई और बारिश में करीब 50 मीटर सड़क व दीवार नहर में समा गई। आगे के हिस्सों में भी सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। करीब एक साल पहले नगर निगम और सिंचाई विभाग ने संयुक्त निरीक्षण किया था। इसके बाद सड़क और सेफ्टीवॉल सुधार के लिए 45 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार हुआ, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। नहर के दूसरे छोर पर लोगों ने मेड़ तक पर निर्माण कर लिया है। ऐसे में बिना अतिक्रमण हटाए मरम्मत कार्य संभव नहीं है। स्थिति यह है कि यह सड़क 24 घंटे व्यस्त रहती है। रेलवे स्टेशन और चांपा जाने वाले लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं। सड़क बंद करना भी आसान नहीं है। किनारों पर मकान और दुकानें बन गई है। नहर के दूसरे छोर पर मेड़ पर लोगों ने किनारे में मकान के साथ टॉयलेट का भी निर्माण कर लिया है। उसके अलावा सब स्टेशन और सामुदायिक भवन बने हुए हैं। अफसरों ने इसे रोकने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किया। अभी भी शनि मंदिर से आगे लोगों का कब्जा जारी है। नहर लाइनिंग की मरम्मत सबसे अधिक जरूरी रेलवे स्टेशन मार्ग की है। सड़क खोखली के फूटने का डर बना हुआ है। दूसरी ओर नहर की सिंचाई क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इसकी क्षमता 4200 क्यूसेक है। लेकिन खरीफ के समय 3 हजार से 3500 क्यूसेक तक पानी छोड़ना पड़ा। इससे अधिक पानी छोड़ने पर मिट्टी बहने से मेड़ फूट सकता है।
👉बायीं तट नहर के लिए 45 करोड़ के 10 कार्य मंजूर
बांयीं तट नहर की लाइनिंग मरम्मत के लिए 45 करोड़ के 10 कार्य मंजूर है। इसमें से तीन काम कोरबा जिले में है। दरअसल 18 किलोमीटर तक का हिस्सा कोरबा के अधिकारी देखते हैं। इसके आगे जांजगीर चंपा और सक्ती जिले के अधीन है। इस नहर की लंबाई 48 किलोमीटर है। टेंडर होने के बाद एक-एक कर काम शुरू किया जा रहा है।
