KORBA : राजस्व विभाग का कमाल ,रिकार्ड में 100 गुना बढ़ा दिया रकबा, पटवारी सस्पेंड,

कोरबा। जमीनों के मामले में संवेदनशील खासकर मसाहती क्षेत्र की जमीनों में किए जाने वाले व्यापक हेर-फेर को लेकर कोरबा जिला काफी संवेदनशील है। यहां आदिवासियों और सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ किए जाने के साथ ही मिली भगत से रसूखदार लोगों को लाभ पहुंचाने का खेल राजस्व विभाग के चंद मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा किया जा रहा है। कई ऐसे मामले सामने आए लेकिन कार्रवाई कुछ ही मामलों में संभव हो सकी है। कागजों में कलम चला कर इधर की जमीन उधर, पीछे की जमीन आगे करते हुए भूस्वामियों को दर-दर की ठोकर खाने पर मजबूर करने वाले ऐसे राजस्व कर्मियों पर कार्रवाई की गाज गिरती रही है।


इसी कड़ी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें पटवारी ने रिकॉर्ड में वास्तविक जमीन का रकबा 100 गुना अधिक बढ़कर दर्ज कर दिया। पटवारी ने किसके इशारे पर, किसके लिए,किसके कहने पर यह सब किया..? यह तो फिलहाल रहस्य के गर्भ में है किंतु प्रतिवेदन के आधार पर पटवारी को निलंबित कर दिया गया है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और घोर लापरवाही बरतने के कारण पटवारी दीपक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।
तहसीलदार भैंसमा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह पाया गया कि श्री सिंह ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करने में गंभीर अनियमितताएं की हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है।
जांच के दौरान ग्राम करूमौहा में राजस्व अभिलेखों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, जिसमें खसरा नंबर 176/1/ख/1 के वास्तविक रकबे 0.016 हेक्टेयर को नियम विरुद्ध तरीके से बढ़ाकर 1.600 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया था। इसी प्रकार एक अन्य मामले में खसरा नंबर 84/4 ख के रकबे को 0.710 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 71.000 हेक्टेयर कर दिया गया और बिना किसी वैध आदेश के इसे ऑनलाइन भुइयां पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया।
इन गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पसान निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।