कोरबा। झाबू राखड़ डैम में हुए कथित भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही ने अब गंभीर रूप ले लिया है। ताजा घटना में बांध टूटने से एक JCB ऑपरेटर की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले में ठेकेदार कंपनी शंकर इंजीनियरिंग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे ।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि राखड़ सप्लाई के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। आरोप यह भी है कि रायपुर में बैठे एक रिटायर्ड अधिकारी और कोरबा में हाल ही में सेवानिवृत्त हुए अधिकारी ने शंकर इंजीनियरिंग के साथ मिलकर विभाग को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
बताया जा रहा है कि कई मामलों में बिना वास्तविक सप्लाई किए ही भुगतान कर दिया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
👉पहले से मिली थी चेतावनी

सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही जूनियर इंजीनियर (JE) द्वारा पत्राचार कर यह जानकारी दी गई थी कि शंकर इंजीनियरिंग द्वारा काम गलत तरीके से किया जा रहा है और बांध की मजबूती के साथ समझौता हो रहा है। इसके बावजूद उच्च अधिकारियों ने ठेकेदार शंकर इंजीनियरिंग पर कोई कार्रवाई नहीं की।
👉“डॉलर के मोह में दबती रही कार्रवाई”
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि “डॉलर के मोह” और निजी स्वार्थ के चलते शंकर इंजीनियरिंग पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व में इस मामले को लेकर कई बार शिकायतें की गईं—सर्कल स्तर से लेकर दंगनिया तक मामला पहुंचा, लेकिन उसके आगे किसी की नहीं चली। हर बार मामला दबा दिया गया।
👉“छोटे अधिकारी पर कार्रवाई, बड़े जिम्मेदारों पर चुप्पी?”
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि अक्सर ऐसे मामलों में केवल छोटे स्तर के अधिकारियों को निलंबित कर कार्रवाई का दिखावा किया जाता है, जबकि बड़े अधिकारी जिम्मेदारी से बच निकलते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मामले में भी ऊपर स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा गड़बड़झाला संभव नहीं है। अगर निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।


लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो शायद आज एक निर्दोष ऑपरेटर की जान नहीं जाती। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी विभाग के बड़े अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।
कल हुए हादसे में बांध का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे JCB ऑपरेटर की जान चली गई। अब स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं बल्कि लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है।
जनता और सामाजिक संगठनों ने शंकर इंजीनियरिंग के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC 304A) का मामला दर्ज करने की मांग की है। साथ ही संबंधित रिटायर्ड अधिकारियों की संपत्ति की जांच और पिछले 3 वर्षों में हुए भुगतान व सप्लाई की पूरी जांच की मांग उठ रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर पहले की तरह मामले को दबा दिया जाएगा। यदि जांच होती है, तो यह सामने आ सकता है कि आखिर कितनी मात्रा में राखड़ सप्लाई हुई और कितना भुगतान बिना काम के किया गया।
झाबू राखड़ डैम का यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सोर्स-the duniyadari.com
