एजेंसी । अगर आप सोच रहे हैं कि घर का बजट संभालना अब आसान होने वाला है, तो ठहर जाइए! वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) में चल रहे भारी तनाव और युद्ध के हालातों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है।
इसका सीधा असर अब आपकी रसोई और गाड़ी के ईंधन पर पड़ने जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा उछाल आना तय माना जा रहा है। इसी बीच एक बड़े आर्थिक दिग्गज ने देश के करोड़ों परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ने की एक बेहद डराने वाली चेतावनी दे दी है।
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट (मुख्य अर्थशास्त्री) मनोरंजन शर्मा के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें भारतीय परिवारों के बजट पर भारी दबाव डालने वाली हैं। समाचार एजेंसी ANI से खास बातचीत में शर्मा ने कहा कि वेस्ट एशिया में तनाव गहराने के बाद ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बेकाबू हो चुकी हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद, अब आम ग्राहकों को इस महंगाई से बचा पाना नामुमकिन जैसा हो गया है और ईंधन की ऊंची कीमतें अब अपरिहार्य (जिसे टाला न जा सके) हो चुकी हैं।
👉आखिर कच्चा तेल क्यों बना देश के लिए सबसे बड़ी मुसीबत?

मनोरंजन शर्मा ने इस संकट के पीछे की सबसे बड़ी वजह का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) के रास्ते में पैदा हुई रुकावटों के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। यही रास्ता भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। दरअसल, भारत अपनी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आयात (Import) करता है।
आंकड़ों की मानें तो भारत में बाहर से आने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से ही देश में पहुंचता है। ऐसे में इस रास्ते पर संकट का सीधा मतलब है भारत में तेल की भारी किल्लत और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी।
👉$67 से सीधे $130 तक पहुंचा तेल, टूट गए सारे रिकॉर्ड
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस डरावनी तेजी का जिक्र करते हुए शर्मा ने बताया कि जब यह टकराव शुरू हुआ था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत महज 67 से 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही थी। लेकिन युद्ध खिंचने के साथ ही इसमें ऐसी आग लगी कि सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए।
मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड के मामले में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं, अगर स्पॉट कीमतों (हाजिर बाजार) की बात करें, तो यह आंकड़ा 120 डॉलर से लेकर 130 डॉलर प्रति बैरल के बेहद खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा है। इसी वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के कयास लगातार सही साबित हो रहे हैं।
👉सरकार भी हो गई बेबस, सोच-समझकर बढ़ाए जा रहे हैं दाम
आर्थिक विशेषज्ञ मनोरंजन शर्मा का मानना है कि केंद्र सरकार ने अब तक आम आदमी को ग्लोबल एनर्जी शॉक (वैश्विक ऊर्जा झटके) से बचाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने सरकार की भी एक सीमित क्षमता है। सरकार चाहकर भी तेल कंपनियों को हमेशा नुकसान में नहीं रख सकती।
उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान देश में ईंधन की कीमतें “धीरे-धीरे और बहुत सोच-समझकर” बढ़ाई गई हैं ताकि जनता को एक बार में बड़ा झटका न लगे। लेकिन अब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है, इसलिए घरों के बजट पर इसका सीधा और कड़ा असर पड़ना तय है। परिवारों को कुछ मुश्किलों का सामना करना ही पड़ेगा क्योंकि यह एक ऐसा वैश्विक मुद्दा है जो देश के पॉलिसी मेकर्स, प्लानर्स और सरकार के भी नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो चुका है।
👉क्या रिन्यूएबल एनर्जी बनेगी भारत का नया सहारा?
इस गंभीर तेल संकट और अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से भारत को लंबे समय के लिए बचाने के उपायों पर भी शर्मा ने बात की। उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से पारंपरिक ईंधन को छोड़कर रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) और ऊर्जा के दूसरे आधुनिक विकल्पों की तरफ बढ़ रहा है, जो कि एक बेहतरीन कदम है।
फिलहाल भारत में रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन कुल ऊर्जा उत्पादन का लगभग एक-तिहाई (One-Third) हिस्सा बन चुका है, जिसे दुनिया भर में ऊर्जा उत्पादन के सबसे शानदार अनुपातों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने आम जनता को आगाह करते हुए यह भी कहा कि विदेशी फॉसिल फ्यूल (जैसे पेट्रोल, डीजल और गैस) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने में अभी देश को लंबा समय लगेगा। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो रातों-रात चमत्कार नहीं कर सकती और इसके जमीनी नतीजे दिखने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। तब तक देशवासियों को इस वैश्विक महंगाई का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
