कोरबा। कोरबा शहर के प्रवेश द्वार सीतामढ़ी चौक पर हुई एक घटना ने जितना बड़ा सवाल आम जन की सुरक्षा पर उठाया है,उससे बड़ा सवाल इस बात को लेकर लोगों के जेहन में उठा है कि आखिर इस मामले में रिपोर्ट उसी दिन दर्ज क्यों नहीं की गई? आरोपियों की पहचान कर धरपकड़ करने की कार्रवाई को अंजाम क्यों नहीं दिया गया? घटना का यदि वीडियो वायरल ना होता तो शायद FIR भी ना होती! घटना का वीडियो वायरल होने और सीतामढ़ी रमेश गली-राम जानकी मंदिर गली के लोगों के द्वारा कोतवाली में पहुंचकर आवेदन देने के बाद अंततः गंभीर घायल युवक के भाई की रिपोर्ट पर अपराध दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

20 मई 2026 की रात 10:45 बजे सीतामढ़ी चौक पर 10 से 12 युवाओं के द्वारा आतंक का ऐसा तांडव किया गया, जिसने रास्ते से गुजरने वालों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी भयभीत किया। युवक पर लात-घूंसों और मुक्कों की ताबड़तोड़ बारिश की जाती रही, सड़क पर घसीटा जाता रहा और शायद उसे मृत जानकर अधमरी हालत में छोड़कर सभी आरोपी युवक वहां से भाग निकले। घटना दिनांक को ही रात के वक्त मामला कोतवाली थाना पहुंचा, पीड़ित को मुलाहिजा के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार बाद उसकी हालत को देखते हुए रायपुर रेफर कर दिया गया।
इस मामले में तात्कालिक तौर पर घटना की गंभीरता को देखते हुए कोई सक्रियता नहीं दिखाई गई। न ही इस मामले में संलिप्त आरोपियों के संबंध में कोई पूछताछ या पतासाजी की गई, न एफआईआर लिया गया। इधर, इस घटना से स्थानीय लोगों में चिंता और आक्रोश व्याप्त होने लगा 26 मई को यह वीडियो वायरल हुआ और सुबह सोशल मीडिया पर खबर प्रसारित होने के बाद महकमा हरकत में आया।
👉 कार्रवाई की हकीकत बयां करता यह बयान
सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी के द्वारा 27 मई को एक बयान जारी कर बताया गया कि थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत सीतामढ़ी में युवक के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने पर पुलिस द्वारा हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर विवेचना की जा रही थी। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आज दिनांक को पुलिस द्वारा तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अन्य आरोपियों की पता तलाश जारी है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।(गिरफ्तार आरोपियों के नाम उजागर नहीं) यह बयान इस बात की पुष्टि कर रहा है कि 20 मई को हुए घटनाक्रम की जानकारी संभवत: सीएसपी को भी नहीं थी। रही बात मामला दर्ज कर विवेचना की तो एफआईआर ही 26 मई को दर्ज किया गया है। यदि घटना की जानकारी 20 या 21 मई को उन्हें दी गई थी तो, उन्होंने संज्ञान लेकर तत्काल एफआईआर क्यों नहीं कराया? यह कहना गलत नहीं होगा कि कई मामलों को अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा उच्च अधिकारियों से या तो छिपाया जाता है या उन्हें गुमराह किया जाता है,यह प्रकरण उदाहरण है।
👉 आखिरकार 26 मई को लिखी गई एफआईआर

थाना कोतवाली में प्रार्थी रजनीश शर्मा की लिखित शिकायत पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना कार्यवाही में लिया गया। प्रार्थी की शिकायत पत्र अनुसार- मैं रमेश गली सीतामणी कोरबा में रहता हूं, रोजी- मजदूरी का काम करता हूं कि दिनांक 20.05.2026 के रात्रि करीबन 10:44 बजे मेरा बड़ा भाई रोशन शर्मा सीतामणी चौक सामान लेने गया था जो सीतामणी चौक में डिक्सेना दुकान से सामान लेकर जैसे ही निकला उसी समय सीतामणी के नागेश मद्राशी, रिंकू यादव, आलोक यादव एवं अन्य लोग आये और पुरानी रंजिश को लेकर मेरे बड़े भाई रोशन शर्मा को अश्लील गाली गुप्तार करते जान से मारने की धमकी देते हुये हाथ-मुक्का, ईटा एवं पंचिंग से मारपीट किये है। मारपीट से मेरे भाई को सिर, चेहरा, सीने व पूरे बदन में चोट लगा है। घटना के बाद रोशन शर्मा को थाना से जिला अस्पताल में ईलाज हेतु ले गये थे जहां उपचार बाद रायपुर रिफर किये हैं, ईलाज चल रहा है। रजनीश शर्मा की रिपोर्ट पर नागेश मद्रासी, रिंकू यादव , आलोक यादव एवं अन्य लोग के विरुद्ध धारा 115(2)-, 296, 3(5)-, 351(3)-BNS के तहत जुर्म दर्ज किया गया है।
