कोरबा । जिले के कुछ प्रमुख थानों में थानेदार के नाक के नीचे से उनके आरक्षक अवैध वसूली का गुल खिला रहे हैं। इस कार्य की भनक उन तक कितनी है यह तो नहीं पता लेकिन ऐसे आक्षकों की अवैध वसूली के कारण क्षेत्र की जनता परेशान हो चली है। इनकी करतूतों से पुलिस की छवि खराब होने के साथ-साथ विश्वास कमजोर हो रहा है।

जो मामला हमारी जानकारी में आया है, उसके मुताबिक पाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नानपुलाली में सोमवार-मंगलवार की रात करीब 1 बजे थाना में पदस्थ दो आरक्षक पहुंचे। यह दोनों सिविल ड्रेस में व शराब के नशे में थे और जिस वाहन से वहां तक पहुंचे वह 112 वाहन थी। यहां पर अपनी जमीन से मिट्टी की खुदाई कर रहे ग्रामीण को टारगेट में लिया, उस ग्रामीण को कार्रवाई का भय दिखाकर, डरा-चमका कर उससे 30 हजारे रुपये नगद की अवैध वसूली कर ली गई। नगदी रकम के रूप में यह पैसे पीड़ित के द्वारा आरक्षक को दिए गए, इसके बाद आरक्षक वहां से चले गए। ग्रामीण को वन भूमि का पट्टा प्राप्त है, वहां से अपनी स्वयं की जेसीबी से मिट्टी खुदाई करवा कर स्वयं के ट्रैक्टर से परिवहन करते हुए अपनी निजी जमीन/खेत में डलवाने का काम कर रहा था। चूंकि उसके वाहन किराए में भी लगते हैं इसलिए उसे दिन में वक्त नहीं मिलता इसलिए शाम से अपनी जमीन पर अपनी ही जेसीबी व ट्रैक्टर से काम कर रहा था। काम करते-करते शाम से रात हो गई। वहां डायल 112 वाहन के साथ पहुंचे आरक्षक द्वय ने उससे बिना किसी मामले और कारण के ही 30 हजार की वसूली कर ली। इसकी जानकारी जब ग्रामीण ने अपने परिचितों से साझा की तो बात हम तक पहुंची। बताया जा रहा है कि इन आरक्षकों का यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि इससे पहले भी कई मामलों में इनकी शिकायत रही है। थाना में फरियाद लेकर आने वालों के विरोधी पक्ष से मिलकर उसे ही राहत दिलाने के लिए भी इनके वसूली के मामले सुनने को मिले हैं।
👉उरगा का एक आरक्षक,चालक और गार्ड की तिकड़ी चर्चा में
पिछले काफी दिनों से उरगा थाना में पदस्थ एक आरक्षक की चर्चा उसके द्वारा की जा रही वसूली को लेकर जोरों पर है। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस आरक्षक ने वसूली की गई रकम को प्राप्त करने के लिए एक चालक और एक निजी कंपनी के गार्ड को मोहरा बना रखा है। मांगी जाने वाली राशि इन्हीं दोनों के यूपीआई में मंगाई जाती है और फिर आरक्षक उसका बंटवारा करता है। सूत्र ने बताया कि इस आरक्षक को कुछ समय के लिए कप्तान ने मौखिक निर्देश पर तैनात किया था लेकिन इसके बाद से वह यहां से जाने का नाम नहीं ले रहा है। उसके इस करतूत के कारण जो लपेटे में आते हैं, उनकी मुसीबत बढ़ रही है। सूत्र यह भी बताता है कि जिले से अवैध कबाड़ लेकर निकलने वाले वाहनों को थाना क्षेत्र की सीमा से पार कराने में इनकी भूमिका अहम रहती आई है।
👉मैदानी अमले पर सख्त करनी होगी निगरानी
जिले के कई थाना क्षेत्र में होने वाली अवैधानिक गतिविधियों जुआ, सट्टा, अवैध शराब,अवैध गांजा, अवैध कबाड़,डीजल चोरी आदि के कार्यों में संलिप्त लोगों से मैदानी टीम में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों की सांठगांठ रहती है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने की लालसा रखने वाले ऐसे कुछ कर्मी अपनी वर्दी से दगा करने के साथ-साथ महकमे का नाम भी बदनाम कर रहे हैं। अपने ही महकमे के लोगों के बीच शामिल ऐसे चंद और पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन पर सख्ती बरतने की आवश्यकता है। हालांकि, व्यावहारिक दृष्टिकोण से थानेदारों के लिए ऐसा सब करना संभव नहीं हो पाता। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि कई मामलों में ऐसे पुलिसकर्मी अपने ही थानेदार के लिए उच्च अधिकारी को भी गुमराह करने से नहीं चूकते।
सोर्स -satysanvad.com
