CG : उद्यानिकी विभाग में भ्रष्टाचार को पुरुस्कार ! बस्तर विकास प्राधिकरण के ₹ 20.51 लाख का बंदरबांट करने वाली अधिकारी को निलंबित करने की जगह 250 किमी दूर जिले का अतिरिक्त प्रभार , 9.5 करोड़ की पॉम ऑयल योजना भी चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट !

0 नहीं लगे पौधे , ड्रिप स्प्रिंकलर , आरसीसी चैनलिंक फेंसिंग भी अधूरे ,किसानों से फर्जी संतुष्टि प्रमाण पत्र लेकर निकाल ली गई अनुदान राशि, कागजों में काम दिखा गए पूरे,भ्रष्ट अफसर को PMO से शिकायत
CMO के जांच आदेश के बाद भी प्रश्रय से नीयत पर उठे सवाल ,देखें हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में योजना का जमीनी हाल ….

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज दंतेवाड़ा । संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी भ्रष्टाचार का पोषक बन गया है। जी हां बस्तर संभाग के सबसे अधिक खनिज संपन्न जिले दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के वर्तमान परिदृश्य को देखकर यह कहना कतई अनुचित या अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा। जहां संचालनालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक के निर्देशों की अनदेखी करते हुए एक ऐसी भ्रष्ट महिला सहायक संचालक को खुलेआम प्रश्रय दिया है जिस पर महालेखाकार की ऑडिट में बस्तर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वीकृत कार्य 10 किसानों की भूमि पर तारवाड़ी और नलकूप ड्रिलिंग कार्यों के लिए फर्म मेसर्स ए. जे. वेंचर, रायपुर को बिना सत्यापित व्हाउचर के 20.51 लाख रुपये का धोखाधड़ीपूर्ण भुगतान किए जाने की ऑडिट में पुष्टि हो चुकी है। प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची शिकायत की प्रतिलपि में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संज्ञान लेकर सचिव उद्यानिकी को दिए गए जांच के आदेश पर 2 माह से कार्रवाई लटकी है।अधिकारी का तबादला जरूर 250 किमी दूर उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कर दिया,लेकिन अमले की कमी का हवाला देकर विभाग ने सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार के कारवां को सतत रूप से जारी रखने जहां महिला अधिकारी ने आर्थिक अनियमितता की उसी दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले का ही अतिरिक्त प्रभार दे दिया । उच्च कार्यालय के प्रश्रय से लूट की इस कदर छूट या कहें हिम्मत मिली थी कि गत वित्तीय वर्ष नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पॉम योजनांतर्गत चयनित 85 कृषक/कृषक समूहों के यहाँ 244 .72 हेक्टेयर (604.45 एकड़)भू -भाग में 9 करोड़ 50 लाख 64 हजार की लागत से किए गए ड्रिप पंप स्थापना,आरसीसी पोल ,चैनलिंक फेंसिंग से लेकर पौधरोपण (नर्सरी)के कार्य में ठेकेदारों के साथ जुगलबंदी कर भ्रष्टाचार की हदें पार कर दी गई । योजना में सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन पपत्र एवं चैनलिंक फेंसिंग कार्य का कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र की सत्यप्रतिलिपि हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में फर्जी पाए गए । न नलकूप खनन पंप स्थापना हुआ ,न ड्रिप लगे न मानक अनुरूप चैनलिंक फेंसिंग हुए ,न आरसीसी पोल लगे। पौधे भी चयनित भूमि से गायब मिले। अफसरों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर किसानों के खाते में विभागीय अनुदान एवं डीएमएफ से दी गई कृषक अंश की जारी राशि निकलवाकर वापस ले ली । भोले भाले आदिवासी किसान अपने साथ हुई इस ठगी से हैरान परेशान शासन -प्रशासन से न्याय की आश लगाए बैठे हैं।

👉ऑयल पॉम योजना :50 % विभागीय अनुदान के बाद DMF से भुगतान की गई थी 50 % कृषक अंश की राशि

भारत सरकार द्वारा तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने हेतु नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल-ऑयल पॉम संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में खाद्य तेल की आपूर्ति हेतु भारत अन्य देशों पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में व्यावसायिक रूप से ऑयल पॉम खेती, संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। ऑयल पॉम की कास्त लागत अधिक होने तथा 3 से 4 वर्ष गेस्टेशन अवधि होने के कारण कृषक ऑयल पॉम के रोपण हेतु अधिक रूचि नहीं लेते है। इस समस्या से निजात पाने तथा सुगमता से ऑयल पॉम क्षेत्र विस्तार को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रचलित अनुदान प्रावधान के अलावा राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त अनुदान (टॉप-अप) दिये जाने का सराहनीय निर्णय लिया गया।
दक्षिण बस्तर -दंतेवाड़ा जिले में गत वित्तीय वर्ष 2025 -26 में कार्यालय सहायक संचालक उद्यान को 244.72 हेक्टेयर (604.45 एकड़)भू-भाग में चैनलिंक फेंसिंग की स्वीकृति दी गई थी । योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के 85 कृषक /कृषक समूहों का चयन किया गया था। जिनके स्वामित्व की भूमि पर ऑयल पॉम पौधरोपण कार्य के घटक आरसीसी चैनलिंक तार फेसिंग कार्य, नलकूप खनन ,पंप स्थापना सहित एवं ड्रीप स्थापना के कार्य एवं पॉम ऑयल पौधे (नर्सरी)लगाए जाने थे।किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने कुल 9 करोड़ 50 लाख 64 हजार की स्वीकृत विभागीय योजना में किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान है ,शेष 50 % अंशदान राशि लाभान्वित कृषकों को वहन करने का प्रावधान है। 4 करोड़ 75 लाख 32 हजार की विभागीय अनुदान राशि चयनित कृषक/कृषक समूहों के बैंक खाते में जारी कर दी गई थी। शेष इतनी ही राशि 4 करोड़ 75 लाख 32 हजार रुपए किसानों को कृषक अंशदान के रूप में जमा करना था ।

दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला खनिज संसाधन बाहुल्य जिला है।यहाँ बैलाडीला लौह अयस्क खदान है,लिहाजा जिला खनिज न्यास के रूप में कोरबा जिले की तरह यहां भी एक बड़ा राजस्व खनन प्रभावित क्षेत्रों के बाशिंदों के कल्याण विकास कार्यों के लिए मिलती है। लिहाजा जिला प्रशासन ने कृषक अंशदान की राशि 4 करोड़ 75 लाख 32 हजार रुपए का वित्तीय भार किसानों पर न पड़े इसके लिए डीएमएफ से कृषक अंश राशि की सहायता देने का निर्णय लिया। पूर्व कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला खनिज संस्थान न्यास कुणाल दुदावत एवं वर्तमान कलेक्टर सह अध्यक्ष देवेश ध्रुव ने चयनित कृषक कृषक समूहों के खेतों में ऑयल पॉम पौधरोपण कार्य के घटक चैनलिंक तार फेसिंग कार्य, नलकूप खनन ,पंप स्थापना सहित एवं ड्रीप स्थापना के कार्य हेतु कृषक अंश राशि 4 करोड़ 75 लाख 32 हजार रुपए जारी कर दी ।

👉इस तरह खेला गया भ्रष्टाचार का खेल

योजना निसंदेह किसान हित में अत्यंत कल्याणकारी थी ,लेकिन जमीनी स्तर पर इसके क्रियावन्यन में उद्यानिकी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का ईमान डोलने से योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। विभाग ने शासन-प्रशासन आमजनमानस की नजरों को योजना को पूरी तरह पारदर्शी बताने समस्त दस्तावेजी औपचारिकताएँ पूरी कर ली ,सामाग्री प्रदाय करते गूगल इमेज (सभी के नहीं),कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र , भौतिक सत्यापन प्रमाण पत्र से लेकर बैंक खाते में जारी अनुदान राशि के बैंक स्टेटमेंट तक की जानकारी संकलित कर रखी । लेकिन जमीनी स्तर पर ठीक इसके उलट कार्य किया गया। अधूरी सामग्रियों ,अधूरे कार्यों के साथ चयनित कृषक /कृषक समूहों से संतुष्टि प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान ले लिए गए । ताकि शासन प्रशासन के समक्ष यह दर्शाया जा सके कि किसान योजना से लाभान्वित होकर संतुष्टि जाहिर कर चुके हैं। इसके लिए अधिकारियों के चहेते चयनित फर्मों ने किसानों को भी यह कहकर धोखे से कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवाई कि तभी आपके खाते में पैसा आएगा। जब संतुष्टि प्रणाम पत्र किसानों ने हस्ताक्षर कर दिए योजना की द्वितीय किश्त की राशि अर्थात जिला खनिज संस्थान न्यास से जारी कृषक अंश राशि किसानों के खाते में जारी हुई जिसे फर्मों एवं ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारियों/ उद्यान अधीक्षकों ने किसानों को बैंक ले जाकर अथवा उनसे चेक लेकर राशि निकलवाकर अपने पास रख ली। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों फर्मों ने किसानों की ओर मुड़कर तक नहीं देखा,यह भी सुनिश्चित करने का अपना दायित्व नहीं समझा कि मानक /मापदंडअनुरूप कार्य हुए भी हैं कि नहीं।

👉हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में खुली पोल,हितग्राहियों ने की जांच,जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग

हसदेव एक्सप्रेस को विश्वनीय सूत्रों से नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल- ऑयल पॉम योजना के अंतर्गत हुए कार्यों में अनियमितता की शिकायत मिली थी ,सूचना के अधिकार के तहत विभाग से उपलब्ध दस्तावेजों सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन पपत्र, कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र ,लांगिट्यूड फोटोग्राफ्स के साथ दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जाकर इसकी तस्दीक की । हसदेव एक्सप्रेस को कटेकल्याण,कुआकोण्डा ब्लॉक में चयनित कृषकों के यहाँ हुए कार्य में व्यापक पैमाने पर अनियमितता मिली। सर्वप्रथम हसदेव एक्सप्रेस की टीम कटेकल्याण विकाखण्ड के चयनित ग्राम गाटम पहुंची।

जहां योजना के अंतर्गत सबसे बड़े लाभान्वित कृषक समूह संतोष पोड्यामी, बबलू पोड्यामी,चित्तू पोड्यामी एवं अन्य 5 किसानों से चर्चा की । इन कृषक समूहों के 17 .24 हेक्टेयर (42.58 एकड़) भू-भाग में ऑयल पॉम योजना के अंतर्गत कार्य होना था। लेकिन हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में जहाँ चैनलिंक तार फेसिंग की गुणवत्ता दोयम दर्जे की मिली,10 गेज की तार फेंसिंग की जगह 11
गेज की पाई गई। वहीं किसानों से चर्चा में 5 में से 3 बोरवेल खनन फैल (असफल)होने ,ड्रीप स्प्रिंकलर नहीं लगने की जानकारी सामने आई। किसानों ने बताया कि उन्हें पौधे तो दिए गए हैं ,जिसे वे बारिश के इंतजार में नहीं लगा सके हैं ,लेकिन उन्हें सिंचाई की कोई सुविधा नहीं दी गई है,चैनलिंक तार फेसिंग का कार्य भी उन्होंने ही किया पर आज पर्यन्त पारिश्रमिक नहीं मिला,कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र में बिल का भुगतान होगा कहकर दबावपूर्वक हस्ताक्षर ले लिए,और योजना के अंतर्गत दो बार उनके खाते में आई अनुदान /अंश (विभागीय एवं डीएमएफ) राशि 8 लाख 45 हजार 389 रुपए दो बार अर्थात 16 लाख 90 हजार 772 रुपए की राशि फर्मों अफसरों ने दबावपूर्वक चेक के माध्यम से ले ली है। उसके उपरांत झांकने तक नहीं आए। संतोष समेत अन्य किसानों ने अपने आप को ठगा महसूस करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए जिम्मदारों का चिन्हांकन कर कार्रवाई की बात कही।

इसी तरह गाटम में ही 2 हेक्टेयर भू -भाग में पॉम ऑयल योजना से लाभान्वित एक अन्य किसान पाण्डू पिता सन्नू ने अपनी पीड़ा हसदेव एक्सप्रेस से गोंडी भाषा शैली में बयां की । पाण्डू ने हसदेव एक्सप्रेस के सहयोगी से चर्चा करते हुए बताया कि उसके खाते में दो बार अनुदान एवं अंशदान की राशि 98 हजार 73 रुपए आई ,जिसमें से वो एक सिक्का भी नहीं देख सका ,ठेकेदार उसे पकड़कर बैंक ले गया और उसके बैंक खाते से राशि निकालकर रख ली। उसके यहाँ भी न बोरवेल हुआ न मानक अनुरूप चैनलिंक फेसिंग हुई । सूरनार में भी कमोबेश यही स्थिति नजर आई।

हसदेव एक्सप्रेस की टीम इसके उपरांत कुआकोण्डा ब्लॉक के ग्राम गढ़मिरी पहुंची। यहाँ 9.89 हेक्टेयर (24.42 एकड़) भू -भाग में बामन कुंजाम एवं जितेंद्र कुमार कोर्राम समेत अन्य 6 हितग्राहियों को योजना अंतर्गत लाभान्वित किया जाना है। यहाँ भी हसदेव एक्सप्रेस की टीम कार्यस्थल पर लाभान्वित हितग्राहियों बामन एवं जितेंद्र के साथ पहुंची।जहां अधूरे फेंसिंग,बोरवेल,ड्रिप के अभाव ने अफसरों फर्मों के बेईमानी की दास्तां स्वयं बयां कर दी थी। दोनों हितग्राहियों ने भी हसदेव एक्सप्रेस से चर्चा में बताया कि न बोरवेल है न बिजली ,पौधे भी 10 रुपए प्रति नग की दर से 3000 पौधे उन्होंने स्वयं के खर्चे से लगाया है,जिसका भुगतान भी उन्हें नहीं हुआ है। वो पौधे भी आधे अधूरे चैनलिंक फेंसिंग ड्रिप स्प्रिंकलर के अभाव में मरने लगे हैं। हितग्राही बामन जोगा ने बताया कि भुगतान होगा कहकर उनसे संतुष्टि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर भी ले लिए गए ,राशि आने पर दो ब्लैंक चेक लेकर चले गए।इसके बाद झांकने तक नहीं आ रहे। पोल डंप पड़ा है पहले से ही उनका पैसा बकाया है लिहाजा किसान कब तक परिश्रम कर योजना में अपना पसीना बहाएंगे और राशि अधिकारी फर्म निकालकर ले जाएंगे । शायद इसी सोंच की वजह से काम बंद है,नाराज किसानों ने ब्लैंक चेक देने के बाद भी काम अधूरा छोंड़ने पर जिम्मदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। दंतेवाड़ा ब्लॉक के मसेनार,गंजेनार में भी कमोबेश यही नजारे नजर आए।

👉समेकित फलोद्यान ताराबाड़ी फेंसिंग योजना में भी भ्रष्टाचार ,दिए मानक से कम पोल एवं तार ,किसानों से की गई अतिरिक्त उगाही

समेकित फलोद्यान तारबाड़ी चैनलिंक फेंसिंग योजना के नाम पर भी जमकर भ्रष्टाचार हुआ है।दंतेवाड़ा जिले को 30 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य दिया था ,जिसकी पूर्ति के लिए 52 लाख 62 हजार 700 रुपए का वित्तीय लक्ष्य दिया गया था। विवादित सहायक संचालक मीना मंडावी के कार्यकाल में बीते वित्तीय वर्ष दंतेवाड़ा जिले में समेकित फलोद्यान तारबाड़ी चैनलिंक फेंसिंग योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के यहाँ कराए गए कार्यों में न केवल निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई ,वरन हितग्राहियों के बैंक खाते में जारी अनुदान की राशि हड़पने के
अलावा योजना स्वीकृति के नाम पर 5 हजार रुपए की उगाही भी की गई है। हसदेव एक्सप्रेस की टीम ने गीदम ब्लॉक के ग्राम पंचायत सियानार ,समलूर एवं कासोली ग्राम में लाभान्वित हितग्राहियों के यहाँ सीधे जाकर जमीनी वास्तविकता का जायजा लिया। जहां समलूर में लाभान्वित हितग्राही महारूराम को 20 पोल 4 बंडल तार कम देने की वजह से आरसीसी पोल के बीच लकड़ी के खंभे (पोल)लगाने पड़ गए ,वहीं हितग्राही ने बताया कि सब्सिडी की पूरी 1 लाख रुपए से अधिक की राशि उसके बैंक खाते से निकलवाकर अफसरों ने डकार ली । यही नहीं उनसे कमीशन के नाम पर 5 हजार रुपए अतिरिक्त भी वसूल किए गए ।

इसी तरह कासोली में हितग्राही मंगलराम अटामी के यहाँ तो फेसिंग ही नहीं हुए भौतिक सत्यापन पपत्र में कार्य पूरा दर्शाकर हितग्राही का हस्ताक्षर लेकर राशि वसूल की गई है। हालांकि यहां हितग्राही ने 54 हजार में से 24 हजार की अंश राशि लेबर पैमेंट के नाम रोक रखी है। हितग्राही का कहना था कि ठेकेदार अधिकारियों ने उनसे बिल जल्द निकलने का ख्वाब दिखाकर न केवल भौतिक सत्यापन प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर ले लिया । उनका बोर भी फैल है।
हितग्राही ने प्रकरण में शासन प्रशासन से जांच का अनुरोध किया है।

👉मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों पर भारी पड़ रहा चढ़ावा ! संचालनालय ने अधिकारी के खिलाफ 2 माह से जांच रोक भ्रष्टाचार को दिया बढ़ावा

गौरतलब हो कि बस्तर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वीकृत कार्य 10 किसानों की भूमि पर तारबाड़ी और नलकूप ड्रिलिंग कार्यों के लिए फर्म मेसर्स ए. जे. वेंचर, रायपुर को बिना सत्यापित व्हाउचर के 20.51 लाख रुपये का धोखाधड़ीपूर्ण भुगतान किए जाने की ऑडिट में पुष्टि हो चुकी है। प्रधानमंत्री कार्यालय तक जिम्मदारों के खिलाफ निलंबन व विभागीय जांच हेतु पहुंची शिकायत की प्रतिलिपि प्राप्त होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संज्ञान 03 अप्रैल 2026 को सचिव उद्यानिकी को जांच के आदेश दिए थे ,लेकिन अत्यंत शर्मनाक बात ही कहें कि जिम्मेदार अधिकारी ने प्रकरण में आज पर्यंत जांच ही नहीं की। जांच की बात तो दूर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी महिला सहायक संचालक उद्यान श्रीमती मीना मंडावी का तबादला उत्तर बस्तर कांकेर जिला करते हुए दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला का अतिरिक्त प्रभार दे दिया है।

पदस्थापना स्थल से 250 किमी की दूरी वाले जिले का प्रभार देना वो भी तब जब अधिकारी के खिलाफ उस जिले में वित्तीय अनियमितता की प्रमाणित शिकायत प्राप्त हुई हो कहीं न कहीं संचालनालय में बैठे जिम्मेदार अफसरों की नीति नियत और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो दंतेवाड़ा जिले से संचालनालय के जिम्मेदार अधिकारियों को एक बड़ा चढ़ावा हर साल मिलते आ रहा है यही वजह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी प्रमाणित शिकायत व मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा दिए गए जांच आदेश पर चढ़ावा भारी पड़ रहा है। और महिला सहायक संचालक को अतिरिक्त प्रभार देकर लूट की मानो खुली छूट दे दी गई है।

👉खामियां -सुलगते सवाल

  • देयक में आधिकारिक पंजीयन नहीं है।
  • बिल को कैश बुक में इंद्राज नहीं किया गया।
  • महज 2 फर्मों (जिनके प्रोपाइटर एक ही हैं ) भारती एसोसिएट एंड सप्लायर रायपुर व शिशिर शर्मा प्रोसेफर कॉलोनी रायपुर जो जेम पोर्टल में पंजीकृत ही नहीं है किस आधार पर उनका चयन किया गया ?
  • जेम की अनिवार्यता को नजरअंदाज भी किया जाए तो किसानों,कृषक समूहों को एक ही फर्म से सामाग्री क्रय करने की बाध्यता नहीं है तो फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने किसानों को किन नियमों व मानसिकता के साथ इसके लिए दबाव बनाया।
  • ऑयल पॉम का देयक व्हाउचर किस नीयत के साथ छुपाई गई है।
  • ऑयल पॉम के चैनलिंक फेंसिंग कार्य अधूरे होने पर भी संतुष्टि प्रमाण पत्र पर किसानों के हस्ताक्षर क्यों लिए गए ?
  • आरसीसी चैनलिंक पोल की संख्या में कमी क्यों की गई।
  • चैनलिंक फेंसिंग कार्य के वजन ,लम्बाई ,चौड़ाई इत्यादि का उल्लेख नहीं है।
  • वित्तीय आरोपों से घिरे महिला सहायक संचालक एवं तकनीकी अधिकारी शाखा लिपिक के विरुद्ध कार्रवाई करने में किनका दबाव व प्रभाव आ रहा ?