CG : सुशासन की सरकार में भ्रष्टाचार की ढाल बनी उद्यानिकी विभाग , बस्तर विकास प्राधिकरण ,DMF से संचालित पॉम ऑयल योजना में करोड़ों के फंड में अनियमितताओं के आरोपों से घिरीं सहायक संचालक को दंतेवाड़ा से हटाकर दंतेवाड़ा का ही अतिरिक्त प्रभार,250 किमी दूर कांकेर से संचालित हो रहा उद्यान विभाग , योजनाओं में कैसे आएगी गुणवत्ता ,गति ! अफसरों की कमी बनी मजबूरी या स्वार्थ साधने का जरिया उठे सवाल ?

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज दंतेवाड़ा- कांकेर। सुशासन की सरकार में उद्यानिकी विभाग भ्रष्टाचार की ढाल बनी हुई है।जिस तरह एक दर्जन जिलों में सहायक संचालकों के रिक्त पदों का हवाला देकर मनमाने तरीके से भ्रष्टाचार के प्रमाणित आरोपों से घिरे चहेते अफसरों को रेवड़ियों की तरह मनचाहे जिलों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है उससे निसंदेह यह कहना कोई अतिशयोक्ति पूर्ण भी नहीं लगता। बस्तर विकास प्राधिकरण में 20.51 लाख का फर्जी भुगतान कर महालेखाकार की ऑडिट में पकड़ाईं व डीएमएफ एवं विभागीय मद से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के साढ़े 9 करोड़ रुपए के बंदरबाट के दस्तावेजी आरोपों से घिरी महिला सहायक संचालक को बड़ी चालाकी से समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन से 250 किलोमीटर दूर कांकेर जिला पदस्थ तो कर दिया गया। लेकिन भ्रष्टाचार की आकंठ में डूबे उद्यानिकी विभाग के अफसरों को पूरे संभाग में कोई योग्य सहायक संचालक नजर नहीं आए लिहाजा जिस जिले से हटाया उसी जिले का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। लिहाजा प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी धन – धान्य योजना में शामिल कार्यालय सहायक संचालक उद्यान दंतेवाड़ा में पूर्णकालिक अधिकारी नहीं होने की वजह से किसानों हितलाभ प्रभावित हो रहे हैं ।

यहाँ बताना होगा कि संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी अमले की कमी से जूझ रहा है। एक दर्जन जिले सहायक संचालकों की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें 31 मई 2026 की स्थिति में धमतरी,महासमुंद ,गरियाबंद
,कबीरधाम , राजनांदगांव ,बेमेतरा,रायगढ़ ,
गौरेला-पेन्ड्रा -मरवाही ,मनेंद्रगढ़ -चिरमिरी-भरतपुर, कांकेर,कोंडागांव एवं सुकमा में सहायक संचालकों के पद रिक्त हैं। इन जिलों का अतिरिक्त प्रभार नजदीकी जिलों के सहायक संचालकों को दिया गया है। ताकि विभागीय प्रशासनिक कार्य दायित्व प्रभावित न हों। निश्चित तौर पर शासकीय कामकाज के सुचारू संपादन के दृष्टिकोण से यह फैसला उचित भी है। लेकिन 22 अप्रैल 2026 को कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अवर सचिव वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ द्वारा राज्यपाल के नाम से आदेशानुसार जारी एक आदेश बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसके तहत सहायक संचालक उद्यान दंतेवाड़ा के पद पर कार्यरत श्रीमती मीना मंडावी को स्वंय के व्यय पर तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करते हुए सहायक संचालक उद्यान कांकेर में आगामी आदेश तक अस्थाई रूप से पदस्थ करते हुए ,सहायक संचालक उद्यान दंतेवाड़ा का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इस आदेश ने उद्यानिकी विभाग को ही कटघरे में ला खड़ा किया है।

सुलगते सवाल,निरुत्तर विभाग 👇

👉1 .सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब महिला अधिकारी ने स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण लिया है तो उन्हें उसी जिले का अतिरिक्त प्रभार किस लिहाज से विभाग ने सौंप दिया ?

👉2 .क्या 250 किलोमीटर दूर कांकेर से प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी धन – धान्य योजना में शामिल कार्यालय सहायक संचालक उद्यान दंतेवाड़ा ,जिले के प्रशासनिक,वित्तीय कार्य दायित्व का निर्वहन, 4 नर्सरियां ,बाड़ी योजनाओं की मॉनिटरिंग संभव है ?

👉3 .क्या बस्तर विकास प्राधिकरण मद में फर्म को 20.51 लाख का फर्जी भुगतान करने की वित्तीय अनियमितता महालेखाकार के ऑडिट में उजागर होने ,डीएमएफ एवं विभागीय मद से
संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के साढ़े 9 करोड़ रुपए के कार्यों में बंदरबाट के दस्तावेजी आरोपों से घिरी महिला सहायक संचालक एवं विभाग के उच्च अधिकारियों की प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री कार्यालय को संबंधित जिले से विवादित अधिकारी का ऑन द रिकार्ड स्थानांतरण दिखाकर गुमराह करते हुए पर्दे के पीछे प्रभार की आड़ में जुगलबंदी से भ्रष्टाचार के कारवां को अनवरत जारी रखने का खेल खेला जा रहा है ?

👉4 .दस्तावेजी शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय के आदेश (3 अप्रैल 2026 ) के उपरांत भी सचिव उद्यानिकी विभाग द्वारा वित्तीय आरोपों से घिरीं सहायक संचालक मीना मंडावी के खिलाफ निलंबन अथवा विभागीय जांच लंबित रखना ,जगदलपुर ,बीजापुर,
सुकमा जैसे नजदीकी जिलों में अफसरों की मौजूदगी के बावजूद दंतेवाड़ा जिले का अतिरिक्त प्रभार दिया जाना अफसरों के निहित स्वार्थ को स्वतः परिलक्षित करता है।

👉5 .22 .04.2026 की स्थिति में कांकेर जिले में सहायक संचालक मीना मंडावी की पदस्थापना आदेश जारी करने के बावजूद 31.05 2026 की स्थिति में सहायक संचालक उद्यान के स्वीकृत ,भरे एवं रिक्त पदों की जानकारी उप संचालक उद्यान संचालनालय उद्यानिकी (छग ) के जन सूचना अधिकारी सह सहायक संचालक मीनू दास द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दिए गए जानकारी में कांकेर में सहायक संचालक का पद रिक्त दर्शाया जाना लिपिकीय त्रुटि है या कोई सुनियोजित प्लान का पार्ट ?

जानें क्या लगे हैं गंभीर आरोप👇

👉मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों पर भारी पड़ रहा चढ़ावा ! संचालनालय ने अधिकारी के खिलाफ 4 माह से जांच रोक भ्रष्टाचार को दिया बढ़ावा

गौरतलब हो कि बस्तर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वीकृत कार्य 10 किसानों की भूमि पर तारबाड़ी और नलकूप ड्रिलिंग कार्यों के लिए फर्म मेसर्स ए. जे. वेंचर, रायपुर को बिना सत्यापित व्हाउचर के 20.51 लाख रुपये का धोखाधड़ीपूर्ण भुगतान किए जाने की ऑडिट में पुष्टि हो चुकी है। प्रधानमंत्री कार्यालय तक जिम्मदारों के खिलाफ निलंबन व विभागीय जांच हेतु पहुंची शिकायत की प्रतिलिपि प्राप्त होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संज्ञान 03 अप्रैल 2026 को सचिव उद्यानिकी को जांच के आदेश दिए थे ,लेकिन अत्यंत शर्मनाक बात ही कहें कि जिम्मेदार अधिकारी ने प्रकरण में आज पर्यंत जांच ही नहीं की। जांच की बात तो दूर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी महिला सहायक संचालक उद्यान श्रीमती मीना मंडावी का तबादला उत्तर बस्तर कांकेर जिला करते हुए दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला का अतिरिक्त प्रभार दे दिया है
पदस्थापना स्थल से 250 किमी की दूरी वाले जिले का प्रभार देना वो भी तब जब अधिकारी के खिलाफ उस जिले में वित्तीय अनियमितता की प्रमाणित शिकायत प्राप्त हुई हो कहीं न कहीं संचालनालय में बैठे जिम्मेदार अफसरों की नीति नियत और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो दंतेवाड़ा जिले से संचालनालय के जिम्मेदार अधिकारियों को एक बड़ा चढ़ावा हर साल मिलते आ रहा है यही वजह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी प्रमाणित शिकायत व मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा दिए गए जांच आदेश पर चढ़ावा भारी पड़ रहा है।

👉9.5 करोड़ की पॉम ऑयल योजना भी चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट

उच्च कार्यालय के प्रश्रय से लूट की इस कदर छूट या कहें हिम्मत मिली थी कि गत वित्तीय वर्ष नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पॉम योजनांतर्गत चयनित 85 कृषक/कृषक समूहों के यहाँ 244 .72 हेक्टेयर (604.45 एकड़)भू -भाग में 9 करोड़ 50 लाख 64 हजार की लागत से किए गए ड्रिप पंप स्थापना,आरसीसी पोल ,चैनलिंक फेंसिंग से लेकर पौधरोपण (नर्सरी)के कार्य में ठेकेदारों के साथ जुगलबंदी कर भ्रष्टाचार की हदें पार कर दी गई । योजना में सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन पपत्र एवं चैनलिंक फेंसिंग कार्य का कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र की सत्यप्रतिलिपि पड़ताल में फर्जी पाए गए । न नलकूप खनन पंप स्थापना हुआ ,न ड्रिप लगे न मानक अनुरूप चैनलिंक फेंसिंग हुए ,न आरसीसी पोल लगे। पौधे भी चयनित भूमि से गायब मिले। अफसरों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर किसानों के खाते में विभागीय अनुदान एवं डीएमएफ से दी गई कृषक अंश की जारी राशि निकलवाकर वापस ले ली । भोले भाले आदिवासी किसान अपने साथ हुई इस ठगी से हैरान परेशान शासन -प्रशासन से न्याय की आश लगाए बैठे हैं।

👉इस तरह खेला गया भ्रष्टाचार का खेल

योजना निसंदेह किसान हित में अत्यंत कल्याणकारी थी ,लेकिन जमीनी स्तर पर इसके क्रियावन्यन में उद्यानिकी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का ईमान डोलने से योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। विभाग ने शासन-प्रशासन आमजनमानस की नजरों को योजना को पूरी तरह पारदर्शी बताने समस्त दस्तावेजी औपचारिकताएँ पूरी कर ली ,सामाग्री प्रदाय करते गूगल इमेज (सभी के नहीं),कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र , भौतिक सत्यापन प्रमाण पत्र से लेकर बैंक खाते में जारी अनुदान राशि के बैंक स्टेटमेंट तक की जानकारी संकलित कर रखी । लेकिन जमीनी स्तर पर ठीक इसके उलट कार्य किया गया। अधूरी सामग्रियों ,अधूरे कार्यों के साथ चयनित कृषक /कृषक समूहों से संतुष्टि प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान ले लिए गए । ताकि शासन प्रशासन के समक्ष यह दर्शाया जा सके कि किसान योजना से लाभान्वित होकर संतुष्टि जाहिर कर चुके हैं। इसके लिए अधिकारियों के चहेते चयनित फर्मों ने किसानों को भी यह कहकर धोखे से कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवाई कि तभी आपके खाते में पैसा आएगा। जब संतुष्टि प्रणाम पत्र किसानों ने हस्ताक्षर कर दिए योजना की द्वितीय किश्त की राशि अर्थात जिला खनिज संस्थान न्यास से जारी कृषक अंश राशि किसानों के खाते में जारी हुई जिसे फर्मों एवं ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारियों/ उद्यान अधीक्षकों ने किसानों को बैंक ले जाकर अथवा उनसे चेक लेकर राशि निकलवाकर अपने पास रख ली। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों फर्मों ने किसानों की ओर मुड़कर तक नहीं देखा,यह भी सुनिश्चित करने का अपना दायित्व नहीं समझा कि मानक /मापदंडअनुरूप कार्य हुए भी हैं कि नहीं। कटेकल्याण विकासखण्ड के ग्राम गाटम, कुआकोण्डा विकासखंड के ग्राम गढ़मिरी,दंतेवाड़ा के गंजेनार, मसेनार में भ्रष्टाचार की कहानी छले गए हितग्राहियों ने अपनी जुबानी बताई। राज्य शासन के संरक्षण पर शिकायत पर कार्रवाई हेतु महामहिम राज्यपाल के यहाँ दस्तावेजी शिकायत की गई है,लेकिन प्रकरण में फिलहाल जिम्मदारों पर जांच की आंच नहीं आ सकी है।

👉समेकित फलोद्यान ताराबाड़ी फेंसिंग योजना में भी भ्रष्टाचार ,दिए मानक से कम पोल एवं तार ,किसानों से की गई अतिरिक्त उगाही

समेकित फलोद्यान तारबाड़ी चैनलिंक फेंसिंग योजना के नाम पर भी जमकर भ्रष्टाचार हुआ है।दंतेवाड़ा जिले को 30 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य दिया था ,जिसकी पूर्ति के लिए 52 लाख 62 हजार 700 रुपए का वित्तीय लक्ष्य दिया गया था। विवादित सहायक संचालक मीना मंडावी के कार्यकाल में बीते वित्तीय वर्ष दंतेवाड़ा जिले में समेकित फलोद्यान तारबाड़ी चैनलिंक फेंसिंग योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के यहाँ कराए गए कार्यों में न केवल निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई ,वरन हितग्राहियों के बैंक खाते में जारी अनुदान की राशि हड़पने के
अलावा योजना स्वीकृति के नाम पर 5 हजार रुपए की उगाही भी की गई है। गीदम ब्लॉक के ग्राम पंचायत सियानार ,समलूर एवं कासोली ग्राम में लाभान्वित हितग्राहियों के यहाँ सीधे जाकर जमीनी वास्तविकता का जायजा लिया । जहां समलूर में लाभान्वित हितग्राही महारूराम को 20 पोल 4 बंडल तार कम देने की वजह से आरसीसी पोल के बीच लकड़ी के खंभे (पोल)लगाने पड़ गए ,वहीं हितग्राही ने बताया कि सब्सिडी की पूरी 1 लाख रुपए से अधिक की राशि उसके बैंक खाते से निकलवाकर अफसरों ने डकार ली । यही नहीं उनसे कमीशन के नाम पर 5 हजार रुपए अतिरिक्त भी वसूल किए गए ।
इसी तरह कासोली में हितग्राही मंगलराम अटामी के यहाँ तो फेसिंग ही नहीं हुए भौतिक सत्यापन पपत्र में कार्य पूरा दर्शाकर हितग्राही का हस्ताक्षर लेकर राशि वसूल की गई है। हालांकि यहां हितग्राही ने 54 हजार में से 24 हजार की अंश राशि लेबर पैमेंट के नाम रोक रखी है। हितग्राही का कहना था कि ठेकेदार अधिकारियों ने उनसे बिल जल्द निकलने का ख्वाब दिखाकर न केवल भौतिक सत्यापन प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर ले लिया । उनका बोर भी फैल है।
हितग्राही ने प्रकरण में शासन प्रशासन से जांच का अनुरोध किया है।