कोरबा । कटघोरा-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना ने अब जमीनी स्तर पर आकार लेना शुरू कर दिया है। प्रस्तावित सड़क विस्तार और पुनर्संरेखन से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि संबंधी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। परियोजना क्षेत्र के 18 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, बंटवारा और खाता विभाजन पर अस्थायी रोक लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कटघोरा-शिवनगर-अंबिकापुर मार्ग के उन्नयन और चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहण किया जाना है। प्रशासन को आशंका है कि परियोजना की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमीनों के सौदों में तेजी आ सकती है, जिससे भविष्य में मुआवजा वितरण और स्वामित्व संबंधी विवाद उत्पन्न होने की संभावना रहेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्व एवं पंजीयन विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
वर्तमान राष्ट्रीय राजमार्ग की मध्य रेखा से दोनों ओर 50-50 मीटर की सीमा में आने वाली भूमि तथा पोड़ी उपरोड़ा और कोनकोना क्षेत्र के प्रस्तावित नए मार्ग से प्रभावित जमीनों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। परियोजना से प्रभावित गांवों में आमाखोखरा, रामपुर, तानाखार, बरपाली, पोड़ी-उपरोड़ा, कोनकोना, गुरसिया, बंजारी, मड़ई, लमना, चोटिया, परला, कपानवापारा, केंदई, केतमा, मोरगा, मदनपुर और पुटा शामिल हैं। फोरलेन सड़क निर्माण को उत्तर छत्तीसगढ़ और कोरबा क्षेत्र की यातायात व्यवस्था तथा आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन की यह पहल परियोजना को विवादों से दूर रखते हुए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
