रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभाग में वर्षों से चल रही केंद्रीकृत साड़ी खरीदी व्यवस्था को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाएगी।
👉अब सीधे खाते में मिलेगी राशि

नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब साड़ी चयन में पूरी स्वतंत्रता होगी। वे अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार साड़ी खरीद सकेंगी, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित होंगी। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के DBT आधारित शासन मॉडल और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन विजन के अनुरूप लिया गया है।
👉केंद्रीकृत खरीद व्यवस्था खत्म
विभागीय स्तर पर होने वाली केंद्रीकृत साड़ी खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। हाल के समय में सामने आई अनियमितताओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। अब साड़ी का डिज़ाइन और रंग विभागीय स्तर पर तय किया जाएगा, जबकि कपड़े का चयन कार्यकर्ता और सहायिकाएं स्वयं कर सकेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि पहले से निर्धारित प्रावधान के अनुसार ही दी जाएगी।
👉सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बहनों के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। भविष्य में भी विभागीय व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
