जांजगीर-चांपा। समाज में नशामुक्ति और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायक संदेश देने वाली साहसी बेटी मुस्कान को जांजगीर-चांपा पुलिस ने विशेष सम्मान प्रदान किया है। थाना चांपा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोसमंदा की एक युवती ने विवाह समारोह के दौरान शराब के नशे में धुत दूल्हे को सिंदूर रस्म के समय देखकर साहसिक निर्णय लेते हुए पूरी बारात को वापस लौटा दिया था। उनके इस कदम की पूरे क्षेत्र में व्यापक सराहना हुई थी।

इस साहसी एवं सामाजिक संदेश देने वाले निर्णय को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) ने उक्त बेटी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सम्मानित किया। साथ ही समाज में सकारात्मक बदलाव और पारिवारिक विवादों के समाधान में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें परिवार परामर्श केंद्र, जांजगीर का महिला काउंसलर नियुक्त किया गया।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि नशे के विरुद्ध युवती का यह साहसिक कदम समाज के लिए प्रेरणास्रोत है तथा युवाओं और महिलाओं को अपने अधिकारों एवं आत्मसम्मान के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप, सीएसपी जांजगीर योगिताबाली खापर्डे, डीएसपी सतरूपा तारम, थाना प्रभारी चांपा निरीक्षक अशोक वैष्णव सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
युवती के इस निर्णय को महिला सम्मान, आत्मगौरव एवं नशामुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा दिया गया यह सम्मान निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता को बढ़ावा देगा।
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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा में शादी समारोह के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब नशे में धुत दूल्हे को देखकर दुल्हन ने विवाह से साफ इनकार कर दिया। मंडप में दूल्हा ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था, जिसके बाद दुल्हन ने साहसिक फैसला लेते हुए शादी तोड़ दी।
जानकारी के अनुसार, रस्मों के दौरान दूल्हे की हालत देखकर दुल्हन ने आपत्ति जताई और विवाह करने से मना कर दिया। इस फैसले से बारातियों के साथ ही मेहमान और ग्रामीण सन्न रह गए। विवाह मंडप में दूल्हे की हरकतों को सब देख रहे थे, पर किसी ने कुछ नहीं बोला, सब चुप्पी साधे रहे।
काफी देर तक अपने होने वाले जीवन साथ ही हकरतों को देखने और परखने के बाद दूल्हन ने सीने पर पत्थर रखकर जो फैसला लिया, उसे सुनकर सब दंग तो रह गए, पर भीतर ही भीतर इस साहसी निर्णय के लिए सराहना भी करते रहे। लड़के वालों ने दुल्हन को मनाने की कोशिश की, मिन्नतें कर समाज का वास्ता भी दिया, लेकिन दुल्हन अपने फैसले पर अडिग रही।
बेटी के इस दृढ़ संकल्प को देखकर मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उसका साथ दिया। नतीजतन वधु पक्ष ने उसी समय विवाह की सभी रस्में रोक दीं और बारातियों व दूल्हे को बिना शादी किए ही वापस जाने कह दिया।
मामले की जानकारी पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाइश दी। पुलिस हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई और बारात को बैरंग लौटना पड़ा।
