CG: PMKSY2.0 – इस जिले ने करोड़ों के जलग्रहण विकास परियोजनाओं के नाम पर गाड़े भ्रष्टाचार के ‘झंडे’ अमृत सरोवर के बीच खड़े हैं काल को न्यौता देते करंट प्रवाहित बिजली के खंभे

0 CM हॉउस तक की गई शिकायत के बाद भी सुशासन के सरकार में जिम्मेदारों को नहीं आई जांच की आंच ,बिना पिचिंग ,बिना पहुंच मार्ग के तैयार सूखी पड़ी अमृत सरोवर,चेकडेम से किसानों को सिंचाई के लिए नहीं मिला एक बूंद भी पानी,देखें वीडियो ,सुनें किसानों की पीड़ा ….

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज बालोद । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ( PMKSY )2.0 के वाटर शेड विकास कार्य घटक (WDC 2.O) के तहत वित्तीय वर्ष 2022 -23 ,2023-24 में स्वीकृत 1.39 करोड़ की मैक्रोवाटरशेड विकास कार्यों अमृत सरोवर निर्माण,चेकडेम निर्माण के नाम पर बालोद जिले ने भ्रष्टाचार के झंडे गाड़ दिए हैं। गुरूर विकाखण्ड के आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में कागजों में पूर्ण हो चुकी इन परियोजनाओं से भले ही किसानों को सिंचाई सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल रहे हों,पर हसदेव एक्सप्रेस द्वारा की गई पड़ताल में जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आए । भिरई में साढ़े 15 लाख की लागत से तैयार अमृत सरोवर में थोड़ी पानी जरूर नजर आई पर किसानों को इसका उपयोग वर्जित है,कंक्रीट की दीवाल विहीन ,अधूरी पिचिंग के साथ पहुंच मार्ग के अभाव वाली अमृत सरोवर की उपयोगिता साल में दो बार झण्डारोहण करने तक ही सिमट कर रह गई है।कंवर में करंट प्रवाहित विद्युत पोल(बिजली)के खंभे 19 लाख के अमृत सरोवर में अमृत सरोवर में भावी हादसों को आमंत्रण देते खड़े हैं ,सूखी योजना जल संचय के दावों की हवा निकालते नजर आए तो वहीं सांगली में भी सूखी पड़ी 15 लाख के चेकडेम ने भ्रष्टाचार की पूरी कहानी बयां कर दी। सुशासन की सरकार में मिल रहे अभयदान की राज्यपाल से जिम्मदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की लिखित शिकायत की गई है। जिसमें जिम्मेदार पीआईए ,डब्ल्यूडीटी ,सर्वेयरों पर बड़ी कार्रवाई के आसार हैं।

यहाँ बताना होगा कि परियोजना अधिकारी NGWDP-1 परियोजना विकासखंड गुरूर जिला बालोद (छ.ग.) के यहां वित्तीय वर्ष 2022-23 एवे 2023-24 में कार्यालय कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला-बालोद (छ.ग.) के यहां से परियोजना निधि में माइक्रोवाटरशेड विकास कार्यों चेकडेम निर्माण, अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण एवं सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य के लिए स्वीकृत 1 करोड़ 39 लाख 62 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति मिली है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में वाटरशेड विकास कार्यों के तहत् 04 नग चेकडेम निर्माण के लिए 61 लाख 77 हजार रू. की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है, इन चारों चेकडेम गुरूर विकासखंड के ग्राम पंचायत- सांगली, कंवर पलारी एवं ग्राम पंचायत बोहारा की शासकीय भूमि में तैयार किए जाने स्वीकृति दी गई थी जिसमें 02 नग अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, 02 नग चेकडेम निर्माण, 01 नग चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण एवं 01 नग सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य शासकीय भूमि पर तैयार किए जाने स्वीकृति दी गई थी। सभी कार्य गुरूर विकाखंड के अंतर्गत् स्वीकृत किए गए थे। कार्यवार बात करें तो ग्राम पंचायत कंवर एवं भिरई में एक-एक नग अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई है। ग्राम सनोद एवं सांगली में एक-एक नगर चेकडेम निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। ग्राम पंचायत- पेरपार में सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य एवं ग्राम पंचायत कंवर में ही चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण स्वीकृत किए गए हैं।

कांगेस शासनकाल में स्वीकृत परियोजनाओं के उपरोक्त अधिकांश कार्यों में शासन के निर्धारित गाइडलाईन्स, तकनीकी मापदण्डों, गुणवत्ता की अनदेखी कर संरचना तैयार कर शासकीय धनराशि का बंदरबाट किए जाने की सूचना मिल रही थी।
सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेज बिल व्हाउचर्स, माप पुस्तिका, स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन, पूर्णता प्रमाण पत्र परीक्षण में जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की दास्तां बयां कर रहे। हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में भिरई,सांगली ,कंवर में भ्रष्टाचार ,संरचनाओं में की गई बेईमानी की पोल खुलकर सामने आई।

👉भिरई में पिचिंग नहीं ,रास्ता दलदल से अटा ,टूटे साइन बोर्ड में पूर्णता तिथि का उल्लेख नहीं ,ग्रामीण बोले महज शो पीस, सिंचाई के लिए नहीं मिला एक बूंद भी पानी

हसदेव एक्सप्रेस की जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में माइक्रोवाटरशेडेड विकास कार्यों अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण ,चेकडेम निर्माण कार्य में की गई भ्रष्टाचार ,जिम्मदारों की शासन प्रशासन को की गई धोखेबाजी की पोल खुल गई । टीम सर्वप्रथम ग्राम भिरई पहुंची। यहाँ 15.50 लाख की लागत से स्वीकृत अमृत सरोवर का निर्माण पूर्णता पत्र के लिहाज से रिकार्ड में 16 सितंबर 2023 को पूर्ण हो चुका है।लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट नजर आई । अमृत सरोवर तक का पहुंच मार्ग दलदल से अटा था।।पहुंचने पर जो नजारे दिखे हैरान करने वाले थे। नागरिक सूचना पटल टूटकर गिरा हुआ था । जिसमें पूर्णता तिथि का उल्लेख तक नहीं था।वास्तविकता में भी योजना अधूरी ही मिली। अमृत सरोवर के तक पहुंचने कंक्रीट वाल या मुरुम डालकर रास्ता नहीं बना था,बोल्डर पिचिंग के नाम पर महज किनारे किनारे में पिचिंग कर कार्य अधूरा छोंड़ दिया गया है। जिससे संरचना की गुणवत्ता की खतरे में हैं।

कृषक गुलाब राम साहू ने संरचना को सफेद हाथी बताते हुए कहा कि साल में सिर्फ दो दिन यहाँ किसानों का जुड़ाव होता है वो दिन झण्डारोहण का होता है। पिचिंग,पहुंच मार्ग विहीन ,बोर के अभाव में अनुपयुक्त जगह बनी इस योजना से किसानों को सिंचाई के लिए एक बूंद भी पानी नहीं मिल रहा । अधिकारी झाँकने तक नहीं आए, थोड़ा बहुत जो पानी का संग्रहण हुआ है उसे सरपंच द्वारा उपयोग करने से भी प्रतिबंधित किया गया है।किसानों ने बताया कि जब किसानों के सिंचाई सुविधा के लिए परियोजना उपयुक्त नहीं तो किस काम का।यह महज सफेद हाथी साबित हो रहा है।

👉 कंवर में लापरवाही की इंतिहां करंट प्रवाहित विद्युत पोल के बीच तैयार कर दिया 19 लाख का अमृत सरोवर,हादसों को न्यौता,सूखी सरोवर पर उठे सवाल

ग्राम पंचायत कंवर में तो भिरई से भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई । 19 लाख की लागत से तैयार अमृत सरोवर (नया तालाब निर्माण)के बीच करंट प्रवाहित विद्युत पोल (बिजली के खंभे ) खड़े हैं। वर्तमान में सुखी पड़ी योजना में सिंचाई के नाम एक बूंद भी पानी नहीं जो परियोजना के तहत सिंचाई सुविधा मिलने के दावों की पोल खोलता है।अगर वर्षाकाल में संरचना में जल संग्रह होता है और करंट प्रवाहित विद्युत तार टूटकर गिरता है तो अप्रिय घटना घट सकती है। इंसान से लेकर बेजुबान पशु भी इसकी जद में आ सकते हैं।

ग्राम कंवर के किसान मिश्री लाल एवं बुधारू ने भी इस लापरवाही पर हैरानी जताते हुए सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिलने की बात कही।

👉सांगली चेकडेम बना शो पीस ,एक बूंद भी पानी नहीं …

हसदेव एक्सप्रेस की टीम ग्राम सांगली भी पहुंची। यहाँ 14.30 लाख की लागत से 28 मई 2023 को चेकडेम तैयार किया जा चुका है। लेकिन हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में यहाँ भी चेकडेम शो पीस बना नजर आया। स्लूज गेट ,की -वॉल ,टो-वॉल से लेकर तमाम तकनीकी खामियां नजर आई। जबकि पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर सूखी पड़ी इस परियोजना का ग्रामीणों द्वारा लाभ लिए जाने का दावा किया जा रहा है। शासन प्रशासन से शाबासी ली जा रही है।

👉जिम्मदारों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग

हसदेव एक्सप्रेस के जरिए ग्राम भिरई के ग्रामीण गुलाब राम साहू व अन्य ने तथा ग्राम कंवर में किसान मिश्री लाल कंवर बुधारू ने आधी अधूरी संरचनाओं से सिंचाई हेतु जल प्रदाय नहीं किए जाने पर निराशा जताते हुए जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है,ताकि भावी योजना का उन्हें समुचित लाभ मिल सके। अब देखना यह है कि पीआईए ,डब्ल्यूडीटी ,सर्वेयर में से किस पर जिम्मेदारी तय की जाती है, या फिर विभागीय संरक्षण में तीनों पर जांच की आंच तक नहीं आने वाली।

👉पूर्व शिकायतों की जांच में खानापूर्ति

यहाँ बताना होगा कि इस परियोजना में करीब 8 करोड़ रुपए के कार्यों की स्वीकृति दी गई थी।लेकिन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी योजना से बारहोंमाह तो दूर एक माह भी किसानों को सिंचाई हेतु पानी नहीं मिला। गौरतलब हो कि बीते वित्तीय वर्ष 2025 -26 में पत्र क्रमांक 3591 दिनांक 01.09.2025 के माध्यम से मुख्यमंत्री को की गई शिकायत की प्रतिलिपि अथवा निर्देशानुसार कार्यालय कलेक्टर( शिकायत शाखा ) जिला बालोद ने उप संचालक कृषि को प्रकरण में 7 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन मांगा था।जबकि पूरा मामला उन्हीं के पूर्व पदस्थापना कार्याकल जिसमें वे पीआईए थे उससे जुड़ा था लिहाजा विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जांच का जिम्मा सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी को थमा दी गई । जो नियमानुसार जांच के लिए सक्षम अधिकारी नहीं थे। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार उन्होंने भी जांच के दौरान ग्राम कंवर में अमृत सरोवर के बीच खड़े करंट प्रवाहित विद्युत पोल को हटाने की बात कही थी। लेकिन इसका भी पालन नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि टीएस के लिए प्रतिवेदन भेजते वक्त जान बूझकर ऐसे स्थल का चयन किया गया जिसके बीच करंट प्रवाहित विद्युत पोल (बिजली के खंभे) गड़े हैं। अधूरी संरचना में ग्रामवासियों को सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा,जांच अधिकारी द्वारा इस बात की भी अनदेखी की गई।

👉इन बिंदुओं के आधार पर की गई थी शिकायत

जलग्रहण प्रबंधन के कार्यों में नियमानुसार जल ग्रहण प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सचिव दोनों के पदमुद्रायुक्त हस्ताक्षर बिल व्हाउचर, हस्तांतरण (हेण्डओवर) प्रपत्र, उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाण पत्र में होने चाहिए। लेकिन कार्यालय परियोजना अधिकारी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना WDC 2.0 NGWDP-1 परियोजना, विकासखंड गुरूर, जिला बालोद (छ.ग.) से प्राप्त बजट में ग्राम पंचायत – बोहारा में स्वीकृत चेकडेम निर्माण क्रमांक 01 के 3 लाख 15 हजार 932 रू. के 04 नग व्हाउचर में अध्यक्ष जल ग्राहण प्रबंधन समिति के हस्ताक्षर ही नहीं हैं, सिर्फ WDT के पदमुद्रायुक्त हस्ताक्षर हैं, बड़ी चालाकी से पीएफएमएस / भुगतान विवरणिका व्हाउचर में अध्यक्ष जलग्रहण प्रबंधन समिति बोहारा के पदमुद्रा (सील) लगा दिया गया है लेकिन हस्ताक्षर ही नहीं है।

फर्मों से क्रय किए गए निर्माण सामग्री के बिल में भी डब्ल्यूडीटी के हस्ताक्षर हैं जो नियमों के सर्वथा प्रतिकूल हैं। स्पष्ट है कि अध्यक्ष / सचिव जल ग्रहण प्रबंधन समिति की जगह स्वीकृत कार्यों में निर्माण सामग्रियों का क्रय निहित स्वार्थ के लिए डब्ल्यूडीटी ने ही किया है, यही नहीं अध्यक्ष जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुद्रा (सील) को भी अपने नियंत्रण में रखकर बिना उनके हस्ताक्षर के व्हाउचर में उपयोग कर दुरूपयोग किया गया है। कार्यालय परियोजना अधिकारी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना WDC 2.0 NGWDP-1 परियोजना, विकासखंड गुरूर, जिला बालोद (छ.ग.) से प्राप्त उपयोगिता एवं कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र में भी कमोबेस इसी तरह नियमों की अनदेखी की गई है। ग्राम पंचायत कंवर में 19 लाख की लागत से कराए गए अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, कार्य पूर्णता दिनांक 04.11.2023 ग्राम पंयात भरई में 15 लाख 50 हजार की लागत से कराए गए अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण कार्यपूर्णता दिनांक 16.09.2023 में परियोजना अधिकारी डब्ल्यूडीटी अध्यक्ष जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुद्रा समेत हस्ताक्षर तो हैं लेकिन सचिव जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुद्रा युक्त हस्ताक्षर नहीं हैं। इस तरह ग्राम पंचायत सांगली में 14 लाख 30 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि 28.05.2023), ग्राम पंचायत कंवर में 14 लाख 97 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि 28.05.2023), ग्राम पंचायत-पलारी में 19 लाख 72 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि 28.12.2023) एवं ग्राम पंचायत बोहारा में 12 लाख 78 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि – 28.05.2023) में भी कमोबेस सचिव जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुदा युक्त हस्ताक्षर नहीं है। उपरोक्त दस्तावेजों से स्पष्ट है कि किस तरह नियमों की अनदेखी कर जल संरक्षण के लिए जल संरचनाओं के वॉटरशेड से जुड़े विकास निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी कर मनमानी की गई है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार टो-वॉल, की-वॉल पिचिंग के कार्य भी मानक एवं गुणवत्तानुरूप नहीं हुए हैं। फर्मों से मिलीभगत कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की सूचना मिल रही है। भ्रष्टाचार में लिप्त संरचनाओं के कारण वर्षा जल को संचित कर किसानों को बारहों माह जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मंशा पर पानी फिर सकता है।
इस बात की भी पुष्टि हो रही है कि संबंधित परिसम्मति प्रमाण पत्र का अभाव है,दस्तावेजों के गहन परीक्षण में इस कार्यों में व्यापक स्तर पर खामियाँ हैं जैसे पैड इन इनकैन्सल नहीं है, सीबीपी नंबर नहीं है, रेत का रायल्टी पत्र नहीं है, भण्डार क्रय नियमों की अनदेखी की गई है, जीएसटी टीडीएस कटौती नहीं की गई है, साथ ही कई कार्यों का देयक नहीं है। जलग्रहण प्रबंधन समिति की जगह ठेकेदारों से कार्य लिए जाने की सूचना मिल रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय को उपरोक्त लेख कर पत्र प्राप्ति के 30 दिवस के भीतर प्रकरण में प्रदेश स्तरीय अंतर्विभागीय जांच समिति गठित करते हुए 10 बिन्दुओं के आधार पर प्रकरण की जांच कराते हुए समस्त कार्यों की भौतिक सत्यापन सुनिश्चित कराते हुए जिम्मेदार अधिकारियों / कर्मचारियों का चिन्हांकन कर उनके विरूद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था जिसकी प्रतिलिपि कार्यालय कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी महोदय, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण प्रबंधन एजेंसी, कृषक नगर लाभाण्डी, कार्यालय संभाग आयुक्त महोदय, दुर्ग संभाग एवं कार्यालय संयुक्त संचालक कृषि दुर्ग संभाग, जिला दुर्ग (छ.ग.) की ओर आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई थी।

👉कार्रवाई के बजाय अभयदान ,PIA बन गए हैं DDA

प्रकरण में आज पर्यन्त शिकायतकर्ता को जांच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है साथ ही जिस उपसंचालक कृषि, बालोद को कार्यालय कलेक्टर ने करोड़ों के अनियमितता से जुड़े प्रकरणों की जांच का जिम्मा सौंपा है था वे उपसंचालक कृषि श्री आशीष चंद्राकर प्रकरण में स्वयं संलिप्त हैं।उनके साथ डब्ल्यूडीटी व सर्वेयर की भूमिका भी संदिग्ध है।। श्री आशीष चंद्राकर तत्कालीन सहायक संचालक संबंधित शिकायत प्रकरण में परियोजना अधिकारी थे, उनके कार्यकाल का ही मामला शिकायत पत्र में उल्लेख कर मुख्यमंत्री के समक्ष जांच हेतु अनुरोध किया गया था, लेकिन कलेक्टर कार्यालय ने इन सब तथ्यों की पड़ताल किए बगैर
भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त तत्कालीन परियोजना अधिकारी वर्तमान उपसंचालक कृषि श्री आशीष चन्द्राकर को जांच का जिम्मा सौंप दिया है, जो अपने कार्यकाल में किए गए शिकायत की स्वयं जांच कर प्रतिवेदन भेजेंगे। हास्यास्पद जांच आदेश से जहां जिम्मेदारों को क्लीन चिट दिए जाने की संभावना बढ़ गई थी वहीं यह प्रशासनिक जवाबदेहिता के विपरीत अनुशानहीन कार्यव्यवहार को परिलक्षित करता है। भ्रष्ट अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया जाना जैसा कृत्य है।

जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री से पुनः8051 दिनांक 27.11.2025 को स्मरण पत्र भेजकर पत्र प्राप्ति के 15 दिवस के भीतर भ्रष्टाचार की उपरोक्त दस्तावेजी शिकायत प्रकरण में नियमों के प्रतिकूल औपचारिकतापूर्ण जांच आदेश निकालने वाले कार्यालय कलेक्टर, बालोद, जिला बालोद (छ.ग.) के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चत करने का अनुरोध किया था। लेकिन सुशासन ,जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली साय सरकार के मुख्यमंत्री सचिवालय ने प्रकरण में 7 माह भी आज पर्यन्त जिम्मदारों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की । जिसका परिणाम यह है कि भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग सका ,पुराने ढर्रे पर ही वर्तमान अधिकारी शासन -प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर मनमाना कार्य कर रहे हैं। जलग्रहण परियोजनाएं भ्रष्टाचार के आगोश में लिप्त जलग्रहण परियोजनाएं
अपना मूल अस्तित्व खोती जा रही हैं।