CG: PMKSY WDC 2.0 -बोहारा ,भिरई में चेकडेम निर्माण चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट! नियमों की अनदेखी,जलग्रहण प्रबंधन समिति की जगह परियोजना अधिकारी ने कराया काम ,बिना पिचिंग ,की- वाल के तैयार चेकडेम की गुणवत्ता पर उठे सवाल ,देखें हसदेव एक्सप्रेस की ग्राउंड रिपोर्ट …

0 ग्रामीणों ने की जांच की मांग ,पूर्व की शिकायतों पर CM H0USE के जांच आदेश में कलेक्टर के द्वारा खानापूर्ति किए जाने से बढ़ा मनोबल ….

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज बालोद -गुरुर। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2.0 के अंतर्गत बालोद जिले के NGWDP – परियोजना विकाखण्ड गुरुर में वाटर शेड विकास कार्य घटक (WDC 2.0) के तहत वित्तीय वर्ष
2022-23 एवं 2023-24 में स्वीकृत माइक्रोवाटरशेड विकास कार्यों चेकडेम निर्माण, अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण एवं सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य के लिए स्वीकृत 1 करोड़ 39 लाख 62 हजार की राशि में कराए गए कार्यों में अनियमितता की कमिश्नर एवं मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची दस्तावेजी शिकायत के मामले में कलेक्टर कार्यालय द्वारा जांच के नाम पर उसी विभाग को जिम्मा सौंपकर औपचारिकता का निर्वहन किए जाने की शिकायत 7 माह से लंबित होने की वजह से वर्तमान में पदस्थ परियोजना अधिकारी ,WDT के मनोबल में भी बढोत्तरी हो गई है। गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना के अंतर्गत ग्राम -बोहारा एवं भिरई में 22 लाख 65 हजार की लागत से तैयार चेकडेम तकनीकी मानकों से परे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।हसदेव एक्सप्रेस की जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में जिम्मेदार अफसरों के दावों की पोल खुल गई है। पूर्व की स्वीकृत सरंचनाओं की तरह कागजों(रिकार्ड) में जल ग्रहण प्रबंधन समिति से कार्य कराना दर्शाकर परियोजना अधिकारी,WDT ने ठेकेदारी प्रथा से दोनों चेकडेम तैयार कर दिए हैं।की -वॉल,टो-वॉल ,पिचिंग विहीन गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर तैयार किए गए दोनों संरचनाओं पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई ,और उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर कार्रवाई की बात कही है।

गौरतलब हो कि गुरुर ब्लॉक में गत वित्तीय वर्ष 2025 -26 में 2 नग चेकडेम निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। बोहारा में 13 लाख 49 हजार तो भिरई में 9.16 लाख की लागत से चेकडेम तैयार कर किसानों को सिंचाई सुविधाएं दी जानी थी। लेकिन वर्तमान परियोजना अधिकारी भी पूर्व में पदस्थ परियोजना अधिकारी के ढर्रे पर चलते हुए उक्त योजना का काम जलग्रहण प्रबंधन समिति की जगह ठेकेदारी प्रथा से करा दी। हसदेव एक्सप्रेस की टीम जब दोनों ग्राम पहुंची तब इसका खुलासा हुआ। बोहारा में सरपंच श्रीमती रेणुका देवदास समेत ग्रामवासियों ने इसकी पुष्टि की तो ग्राम भिरई में ग्रामीणों ने ठेकेदार से कार्य कराए जाने की बात कही। जबकि नियमानुसार ठेकेदारी प्रथा से कार्य नहीं लिया जाना है,ऐसा करते पाए जाने पर जिम्मदारों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है।

👉की -वॉल गायब,पिचिंग नहीं ,गुणवत्ता पर उठे सवाल

हसदेव एक्सप्रेस की टीम ने दोनों चेकडेम को देखा तो हैरान करने वाली तस्वीर नजर आई। दोनों परियोजनाओं में तैयार चेकडेम में की -वॉल का अभाव था पिचिंग नहीं की गई थी। साथ ही ग्रामीणों ने अन्य तकनीकी खामियां भी बताई। जिससे चेकडेम की गुणवत्ता संदेहास्पद है। वर्षा जल का संचय हो पाना मुश्किल प्रतीत नजर आ रहा है। ग्रामीणों की मानें तो निर्माण कार्य के दौरान प्रयुक्त सामाग्री भी गुणवत्ता युक्त नहीं थी न ही निर्धारित मात्रा में सामाग्री नहीं लगाई गई। बहरहाल यह तो गुणवत्ता मानकों की परीक्षण में स्पष्ट हो सकेगा लेकिन उक्त संरचनाओं ने ग्रामीणों के मन में संशय पैदा कर दिया है।

👉ग्रामीणों ने की जांच की मांग


ग्राम पंचायत बोहारा एवं भिंरई के ग्रामीणों ने चेकडेम में की -वॉल नहीं लगने एवं पिचिंग नहीं किए जाने पर हैरानी न असंतुष्टि जताई। ग्रामीणों को संदेह है कि वर्षा का जल बिना की वॉल के कैसे संचित होगा ,ग्रामीणों ने प्रकरण में जांच की मांग की है ,वहीं परियोजना अधिकारी स्टीमेट अनुसार कार्य किए जाने का दावा कर रहे हैं।

वर्जन

स्टीमेट अनुसार हुआ कार्य

परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में स्टीमेट अनुसार
गुणवत्तायुक्त कार्य हुआ है ,कहीं कोई शिकायत नहीं है।

सूर्यनारायण ताम्रकार,परियोजना अधिकारी ,PMKSY WDC 2.O- 1 गुरुर,जिला -बालोद ,(छग)

👉 जानें पूर्व लंबित शिकायत, जांच के नाम पर निभाई गई औपचारिकता

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी को पत्र क्रमांक 7917 दिनांक 06.11.2025 के माध्यम से उनके यहाँ प्रेषित शिकायत पत्र क्रमांक 7917 दिनांक 06.11.2025को प्रेषित प्रकरण में कलेक्टर बालोद द्वारा जिसने अनियमितता की उसी को जांच का जिम्मा सौंपकर जांच के नाम पर औपचारिकता का निर्वहन इर भ्रष्टाचार को संरक्षण दिए जाने के मामले में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति गठित कर प्रकरण की जांच कर जिम्मदारों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया था। जिसके माध्यम से अवगत कराया गया था कि कार्यालय संभाग आयुक्त महोदय दुर्ग संभाग, जिला दुर्ग (छ.ग) के यहां पत्र क्र. 7634 दिनांक 13.08.2025 के माध्यम से दस्तावेजी शिकायत प्रस्तुत कर कार्यालय परियोजना अधिकारी NGWDP-1 परियोजना विकासखंड गुरूर, जिला बालोद (छ.ग) के यहां वित्तीय वर्ष 2022-23 एवे 2023-24 में कार्यालय कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला – बालोद (छ.ग.) के यहां से परियोजना निधि में माइक्रोवाटरशेड विकास कार्यों चेकडेम निर्माण, अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण एवं सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य के लिए स्वीकृत 1 करोड़ 39 लाख 62 हजार की राशि में कराए गए कार्यों में अनियमितता की दस्तावेजी शिकायत की गई थी। जिसके माध्यम से अवगत कराया गया था कि परियोजना अधिकारी NGWDP-1 परियोजना विकासखंड गुरूर जिला बालोद (छ.ग.) के यहां वित्तीय वर्ष 2022-23 एवे 2023-24 में कार्यालय कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला-बालोद (छ.ग.) के यहां से परियोजना निधि में माइक्रोवाटरशेड विकास कार्यों चेकडेम निर्माण, अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण एवं सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य के लिए स्वीकृत 1 करोड़ 39 लाख 62 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति मिली है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में वाटरशेड विकास कार्यों के तहत् 04 नग चेकडेम निर्माण के लिए 61 लाख 77 हजार रू. की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है, इन चारों चेकडेम गुरूर विकासखंड के ग्राम पंचायत- सांगली, कंवर पलारी एवं ग्राम पंचायत बोहारा की शासकीय भूमि में तैयार किए जाने स्वीकृति दी गई थी जिसमें 02 नग अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, 02 नग चेकडेम निर्माण, 01 नग चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण एवं 01 नग सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य शासकीय भूमि पर तैयार किए जाने स्वीकृति दी गई थी। सभी कार्य गुरूर विकाखंड के अंतर्गत् स्वीकृत किए गए थे। कार्यवार बात करें तो ग्राम पंचायत कंवर एवं भिरई में एक-एक नग अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई है। ग्राम सनोद एवं सांगली में एक-एक नगर चेकडेम निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। ग्राम पंचायत- पेरपार में सिंचाई नाली बोल्डर पिचिंग कार्य एवं ग्राम पंचायत कंवर में ही चेकडेम कम वेस्टवियर निर्माण स्वीकृत किए गए हैं।

महोदय, कांगेस शासनकाल में स्वीकृत परियोजनाओं के उपरोक्त अधिकांश कार्यों में शासन के निर्धारित गाइडलाईन्स, तकनीकी मापदण्डों, गुणवत्ता की अनदेखी कर संरचना तैयार कर शासकीय धनराशि का बंदरबाट किए जाने की सूचना मिल रही थी, जिसे देखते हुए सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में निहित प्रावधानों के द्वारा संबंधित विभाग में विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर बिल व्हाउचर्स, माप पुस्तिका, स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन, पूर्णता प्रमाण पत्र आदि दस्तावेजों की मांग की गई थी। निहित प्रावधानों के तहत् विधिवत् आवेदन प्रस्तुत कर निर्धारित शुल्क जमा कर वांछित जानकारी प्राप्त की गई थी। परियोजना कार्यालय से प्राप्त दस्तावेज योजना में भ्रष्टाचार की दास्तां बयां कर रहे। जलग्रहण प्रबंधन के कार्यों में नियमानुसार जल ग्रहण प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सचिव दोनों के पदमुद्रायुक्त हस्ताक्षर, बिल व्हाउचर, हस्तांतरण (हेण्डओवर) प्रपत्र, उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाण पत्र में होने चाहिए। लेकिन कार्यालय परियोजना अधिकारी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना WDC 2.0 NGWDP-1 परियोजना, विकासखंड गुरूर, जिला बालोद (छ.ग.) से प्राप्त बजट में ग्राम पंचायत – बोहारा में स्वीकृत चेकडेम निर्माण क्रमांक 01 के 3 लाख 15 हजार 932 रू. के 04 नग व्हाउचर में अध्यक्ष जल ग्राहण प्रबंधन समिति के हस्ताक्षर ही नहीं हैं, सिर्फ WDT के पदमुद्रायुक्त हस्ताक्षर हैं, बड़ी चालाकी से पीएफएमएस / भुगतान विवरणिका व्हाउचर में अध्यक्ष जलग्रहण प्रबंधन समिति बोहारा के पदमुद्रा (सील) लगा दिया गया है लेकिन हस्ताक्षर ही नहीं है।

फर्मों से क्रय किए गए निर्माण सामग्री के बिल में भी डब्ल्यूडीटी के हस्ताक्षर हैं जो नियमों के सर्वथा प्रतिकूल हैं। स्पष्ट है कि अध्यक्ष / सचिव जल ग्रहण प्रबंधन समिति की जगह स्वीकृत कार्यों में निर्माण सामग्रियों का क्रय निहित स्वार्थ के लिए डब्ल्यूडीटी ने ही किया है, यही नहीं अध्यक्ष जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुद्रा (सील) को भी अपने नियंत्रण में रखकर बिना उनके हस्ताक्षर के व्हाउचर में उपयोग कर दुरूपयोग किया गया है। कार्यालय परियोजना अधिकारी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना WDC 2.0 NGWDP-1 परियोजना, विकासखंड गुरूर, जिला बालोद (छ.ग.) से प्राप्त उपयोगिता एवं कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र में भी कमोबेस इसी तरह नियमों की अनदेखी की गई है। ग्राम पंचायत कंवर में 19 लाख की लागत से कराए गए अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण, कार्य पूर्णता दिनांक 04.11.2023 ग्राम पंयात भरई में 15 लाख 50 हजार की लागत से कराए गए अमृत सरोवर नया तालाब निर्माण कार्यपूर्णता दिनांक 16.09.2023 में परियोजना अधिकारी डब्ल्यूडीटी अध्यक्ष जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुद्रा समेत हस्ताक्षर तो हैं लेकिन सचिव जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुद्रा युक्त हस्ताक्षर नहीं हैं। इस तरह ग्राम पंचायत सांगली में 14 लाख 30 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि 28.05.2023), ग्राम पंचायत कंवर में 14 लाख 97 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि 28.05.2023), ग्राम पंचायत-पलारी में 19 लाख 72 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि 28.12.2023) एवं ग्राम पंचायत बोहारा में 12 लाख 78 हजार की लागत से स्वीकृत चेकडेम निर्माण (पूर्णता तिथि – 28.05.2023) में भी कमोबेस सचिव जल ग्रहण प्रबंधन समिति के पदमुदा युक्त हस्ताक्षर नहीं है। उपरोक्त दस्तावेजों से स्पष्ट है कि किस तरह नियमों की अनदेखी कर जल संरक्षण के लिए जल संरचनाओं के वॉटरशेड से जुड़े विकास निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी कर मनमानी की गई है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार टो-वॉल, की-वॉल पिचिंग के कार्य भी मानक एवं गुणवत्तानुरूप नहीं हुए हैं। फर्मों से मिलीभगत कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की सूचना मिल रही है। भ्रष्टाचार में लिप्त संरचनाओं के कारण वर्षा जल को संचित कर किसानों को बारहों माह जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मंशा पर पानी फिर सकता है।
उपरोक्त लेख कर उपरोक्त दिनांक को दस्तावेजी शिकायत प्रस्तुत कर आयुक्त दुर्ग संभाग को 10 बिन्दुओं में पत्र प्राप्ति के 30 दिवस के भीतर प्रकरण में अंतर्विभागीय संयुक्त जांच समिति गठित कर उपरोक्त कार्यों का परीक्षण कर व्यापक लोकहित में भौतिक सत्यापन कराते हुए तय मियाद में जांच कराकर जांच प्रतिवेदन की एक प्रति पत्र व्यवहार के पते पर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अन्यथा प्रकरण आपके संज्ञान में लाया जाने के अलावा पब्लिक डोमेन (मीडिया) में सार्वजनिक करने की भी बात कही गई थी, बावजूद इसके दस्तावेजी शिकायत के संबंधित प्रकरण में आज पर्यन्त जांच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ जिससे स्पष्ट है कि प्रकरण में संबंधित कार्यालय एवं अधिकारी द्वारा संरक्षण / प्रश्रय प्रदान किया जा रहा है जो कि प्रशासनिक जवाबदेहिता के विपरीत अनुशासनहीन कार्यव्यवहार को परिलक्षित करता है।

इस बात की भी पुष्टि हो रही है कि संबंधित परिसम्मति प्रमाण पत्र का अभाव है, महोदय, दस्तावेजों के गहन परीक्षण में इस कार्यों में व्यापक स्तर पर खामियाँ हैं जैसे पैड इन इनकैन्सल नहीं है, सीबीपी नंबर नहीं है, रेत का रायल्टी पत्र नहीं है, भण्डार क्रय नियमों की अनदेखी की गई है, जीएसटी टीडीएस कटौती नहीं की गई है, साथ ही कई कार्यों का देयक नहीं है। जलग्रहण प्रबंधन समिति की जगह ठेकेदारों से कार्य लिए जाने की सूचना मिल रही है। महोदय, मेरे द्वारा आपके कार्यालय को उपरोक्त लेख कर पत्र प्राप्ति के 30 दिवस के भीतर प्रकरण में प्रदेश स्तरीय अंतर्विभागीय जांच समिति गठित करते हुए अग्रलिखित बिन्दुओं के आधार पर प्रकरण की जांच कराते हुए समस्त कार्यों की भौतिक सत्यापन सुनिश्चित कराते हुए जिम्मेदार अधिकारियों / कर्मचारियों का चिन्हांकन कर उनके विरूद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था जिसकी प्रतिलिपि कार्यालय कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी महोदय, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण प्रबंधन एजेंसी, कृषक नगर लाभाण्डी, कार्यालय संभाग आयुक्त महोदय, दुर्ग संभाग एवं कार्यालय संयुक्त संचालक कृषि दुर्ग संभाग, जिला दुर्ग (छ.ग.) की ओर आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई थी। महोदय, मेरे उपरोक्त पत्र के बाद आपके कार्यालय अथवा प्रतिलिपि कार्यालय से जांच आदेश निकल भी नहीं पाया है कि कार्यालय कलेक्टर, जिला बालोद (छ.ग.) द्वारा प्रकरण में जांच के नाम पर औपचारिकता का निर्वहन करते हुए प्रकरण में संलिप्त अधिकारी को ही जांच का दायित्व सौंप दिया गया है। महोदय, कार्यालय कलेक्टर (शिकायत शाखा) जिला बालोद (छ.ग.) के पत्र क्र. 9052 दिनांक 14.11. 2025 के माध्यम से कार्यालय उपसंचालक कृषि बालोद को मेरे शिकायत पत्र के संदर्भ में 7 दिवस के भीतर उल्लेखित तथ्यों पर आवश्यक कार्यवाही करते हुए की गई कार्यवाही से आवेदक एवं इस कार्यालय को एवं अधोहस्ताक्षरकर्ता डिप्टी कलेक्टर, वास्ते कलेक्टर, बालोद को जांच/निराकरण की कार्यवाही प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का लेख किया गया है।

महोदय, प्रकरण में आज पर्यन्त जांच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है साथ ही आपको अवगत कराना चाहूंगा कि जिस उपसंचालक कृषि, बालोद को कार्यालय कलेक्टर ने करोड़ों के अनियमितता से जुड़े प्रकरणों की जांच का जिम्मा सौंपा है वे उपसंचालक कृषि श्री आशीष चंद्राकर प्रकरण में स्वयं संलिप्त हैं। श्री आशीष चंद्राकर तत्कालीन सहायक संचालक संबंधित शिकायत प्रकरण में परियोजना अधिकारी थे, उनके कार्यकाल का ही मामला शिकायत पत्र में उल्लेख कर आपके समक्ष जांच हेतु अनुरोध किया गया था, लेकिन कलेक्टर कार्यालय ने इन सब तथ्यों की पड़ताल किए बगैर
भ्रष्चार के मामलों में संलिप्त तत्कालीन परियोजना अधिकारी वर्तमान उपसंचालक कृषि श्री आशीष चन्द्राकर को जांच का जिम्मा सौंप दिया है, जो अपने कार्यकाल में किए गए शिकायत की स्वयं जांच कर प्रतिवेदन भेजेंगे। हास्यास्पद जांच आदेश से जहां जिम्मेदारों को क्लीन चिट दिए जाने की संभावना बढ़ गई है वहीं यह प्रशासनिक जवाबदेहिता के विपरीत अनुशानहीन कार्यव्यवहार को परिलक्षित करता है। भ्रष्ट अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया जाना जैसा कृत्य है।

जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री से पुनः8051 दिनांक 27.11.2025 को स्मरण पत्र भेजकर पत्र प्राप्ति के 15 दिवस के भीतर भ्रष्टाचार की उपरोक्त दस्तावेजी शिकायत प्रकरण में नियमों के प्रतिकूल औपचारिकतापूर्ण जांच आदेश निकालने वाले कार्यालय कलेक्टर, बालोद, जिला बालोद (छ.ग.) के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चत करने का अनुरोध किया था। लेकिन सुशासन ,जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली साय सरकार के मुख्यमंत्री सचिवालय ने प्रकरण में 6 माह भी आज पर्यन्त जिम्मदारों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की । जिसका परिणाम यह है कि भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग सका ,पुराने ढर्रे पर ही वर्तमान अधिकारी शासन -प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर मनमाना कार्य कर रहे हैं। जलग्रहण परियोजनाएं भ्रष्टाचार के आगोश में लिप्त जलग्रहण परियोजनाएं
अपना मूल अस्तित्व खोती जा रही हैं।

अनदेखी कर संरक्षण दिए जाने के मामले में आपके यहां प्रस्तुत किए गए शिकायत पत्र क्र. 7917 दिनांक 06.11.2025 के उपरांत कार्यालय कलेक्टर (शिकायत शाखा) जिला बालोद (छ.ग.) द्वारा नियमों की अनदेखी कर अनियमितता में संलिप्त (तत्कालीन परियोजना अधिकारी) वर्तमान उपसंचालक कृषि बालोद (छ.ग.) को ही प्रकरण में जांच की जिम्मेदारी देकर जांच के नाम पर औपचारिकता का निर्वहन कर भ्रष्टाचार को संरक्षण दिए जाने के मामले में कार्यालय कलेक्टर बालोद के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय जांच समिति गठित कर प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने बाबत्।