CG विधानसभा मानसून सत्र: सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं , गुणवत्ता की सदन में गूंज ,कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सरकार को घेरा ,ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीदने का लगाया आरोप…

0 स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल बोले -जिस पर आपत्ति थी पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका, प्रदेश में खरीदी गई दवाएं उस प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल नहीं ,आरोप निराधार …

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को सरकारी अस्पतालों के लिए दवा खरीद और उनकी गुणवत्ता का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा, कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सरकार पर सवालों की बौछार करते हुए, आरोप लगाया कि प्रदेश में ऐसी कोटेड दवाइयों की खरीद और वितरण किया गया, जिन्हें अन्य राज्यों में प्रतिबंधित किया जा चुका है,उन्होंने ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीदने का आरोप लगाते हुए, सरकार से जवाब मांगा,अटल श्रीवास्तव ने कहा कि यदि गैस्ट्रो संबंधी दो दवाइयों के कंपोनेंट समान हैं, तो एक दवा पर प्रतिबंध लगने के बावजूद दूसरी की खरीद कैसे जारी रखी गई,उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में रिजेक्ट की गई, दवाइयों को छत्तीसगढ़ में खपाया जा रहा है ।

आरोपों पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में स्पष्ट किया कि जिन दवाइयों की तुलना की जा रही है, वे अलग-अलग श्रेणी की हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण प्रक्रिया अलग होने के कारण दोनों दवाओं को एक समान नहीं माना जा सकता,मंत्री ने बताया कि जिस दवा पर आपत्ति थी, उसे पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है, और छत्तीसगढ़ में खरीदी गई दवाएं उस प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल नहीं हैं,सदन में यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन दवा खरीद का मामला भी उठा।

इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि गुजरात में कंपनी की कुछ एस्पिरिन दवाइयों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, और इसकी जानकारी 25 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) को प्राप्त हुई थी,मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने ब्लैकलिस्टेड दवाओं की कोई खरीद नहीं की है,उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के लिए जारी किया गया ऑर्डर अलग श्रेणी की एस्पिरिन टैबलेट का था, जिसका गुजरात में प्रतिबंधित दवा से कोई संबंध नहीं था,उन्होंने बताया कि एहतियातन यूनिक्योर की एस्पिरिन 75 मिलीग्राम (अनकोटेड) के खरीद आदेश को तत्काल रद्द कर दिया गया है तथा कंपनी के साथ किया गया दर अनुबंध भी समाप्त कर दिया गया है, गुणवत्ता संबंधी सूचना मिलते ही सरकार ने त्वरित कार्रवाई की विपक्ष ने दवा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की इस मुद्दे पर सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई।

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