CG विधानसभा मानसून सत्र : महिला सुरक्षा पर ‘ महाभारत ‘! सदन में चला शब्द युद्ध, कांग्रेस विधायक ने महिला सबंधी अपराधों के आंकड़ों पर सरकार को घेरा,एक शब्द पर खुद घिर गईं,जानें मामला …

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल में उस समय भारी राजनीतिक घमासान मच गया, जब महिला सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल बेहद गर्मा गया। संजारी बालोद से कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा द्वारा प्रदेश में बढ़ते महिला अपराधों पर सवाल उठाने के दौरान इस्तेमाल किए गए एक “खास शब्द” को लेकर सत्ता पक्ष के भाजपा विधायकों ने उन्हें चौतरफा घेर लिया। इसके बाद सदन में जबरदस्त टोका-टाकी और नारेबाजी का दौर शुरू हो गया।

जहां एक तरफ भाजपा विधायकों ने कांग्रेस विधायक के बयान पर तीखा ऐतराज जताया, वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कांग्रेस विधायक की मांग का समर्थन किया, जिसके बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए अपना जवाब पटल पर रखा।

👉“यह संख्या और बढ़ेगी…” शब्द पर भड़का सत्ता पक्ष, भाजपा विधायकों ने संभाला मोर्चा

​सदन में विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा प्रदेश में नाबालिग बच्चियों के अपहरण और महिला अपराधों के आंकड़े पेश कर रही थीं। आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए संगीता सिन्हा ने कह दिया कि “यह संख्या और बढ़ेगी।”

​इस शब्द को पकड़ते ही सत्ता पक्ष के कद्दावर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, भावना बोहरा और सुशांत शुक्ला पूरी तरह आक्रामक हो गए। उन्होंने संगीता सिन्हा को घेरते हुए कहा:

​क्या विपक्ष यह चाहता है कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के खिलाफ अपराध और ज्यादा बढ़ें?
​एक महिला विधायक द्वारा सदन में खड़े होकर अपराधों की संख्या और बढ़ने की ‘उम्मीद’ या दावा करना बेहद आपत्तिजनक है।
​भाजपा विधायकों के इस तीखे प्रहार के बाद सदन में दोनों पक्षों की ओर से भारी शोर-शराबा शुरू हो गया। कांग्रेस विधायकों ने जहां अपनी साथी विधायक का बचाव किया, वहीं सत्ता पक्ष ने इस बयान को लेकर विपक्ष पर लगातार निशाना साधा।

👉संगीता सिन्हा ने आंकड़ों के जरिए खड़े किए थे गंभीर सवाल

​विवाद से पहले, संगीता सिन्हा ने बेहद बेबाकी से महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रहे दुष्कर्म और अपहरण के चौंकाने वाले आंकड़े सदन में रखे थे:

👉​दुष्कर्म के मामले:

  • वर्ष 2024 में 3096
    वर्ष 2025 में 3070
    और साल 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीनों में ही 1550 मामले दर्ज हो चुके हैं।
  • नाबालिग बच्चियों का अपहरण: वर्ष 2023 में 2300 मामलों की तुलना में वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 3040 तक पहुंच गया। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती साढ़े पांच महीनों में ही 1746 अपहरण के मामले दर्ज हो चुके हैं।

” प्रदेश के 33 जिलों में सिर्फ 13 महिला थाने ही स्वीकृत हैं। मेरी मांग है कि सरकार सभी 33 जिलों में कम से कम एक-एक महिला थाना खोलने की तत्काल घोषणा करे। “

— संगीता सिन्हा, कांग्रेस विधायक

👉नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का मिला समर्थन

हंगामे के बीच स्थिति को संभालते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा के समर्थन में खड़े हुए। उन्होंने इस मुद्दे को दलगत राजनीति से ऊपर बताते हुए बेहद सधे अंदाज में कहा कि यह जनहित और सुरक्षा से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण विषय है। डॉ. महंत ने कांग्रेस विधायक की मांग को आगे बढ़ाते हुए गृहमंत्री से प्रदेश के सभी 33 जिलों में महिला थानों की स्थापना करने का आग्रह किया, ताकि कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सके।

👉गृहमंत्री विजय शर्मा ने आंकड़ों के साथ रखा सरकार का पक्ष

विपक्ष की ओर से उठाए गए इस मुद्दे पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन को आश्वस्त करते हुए अपनी सरकार की कार्ययोजना पेश की। उन्होंने आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में महिला अपराधों में कमी आई है:
​अपराधों के तुलनात्मक आंकड़े: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के अंतिम ढाई वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 18,323 मामले दर्ज थे, जबकि वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार के शुरुआती ढाई वर्षों में यह आंकड़ा घटकर 16,803 रह गया है।

👉​सुरक्षा के लिए उठाए कदम:

गृहमंत्री ने बताया कि हर जिले में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
​महिला थानों का विस्तार: उन्होंने सदन को जानकारी दी कि पिछले बजट में ही नए महिला थानों के लिए वित्तीय प्रावधान किए गए थे और आने वाले समय में प्रदेश के बाकी सभी जिलों में भी महिला थानों के विस्तार के लिए सरकार पूरी संजीदगी से काम करेगी।

सोर्स -nayipahal.com