₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट जल्द आएंगे नजर ! सरकार ने फील्ड ट्रायल को दी मंजूरी,जानें सबसे पहले किस देश ने किया था जारी,कितने देशों में चल रहे प्लास्टिक नोट ….

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 10 और 20 रुपये के प्लॉस्टिक के नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। यानी अब आपके हाथ में बहुत जल्द 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक के नोट नजर आ सकते हैं।

करीब 14 साल पुरानी इस योजना को अब दोबारा शुरू किया गया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा कागजी नोट बंद नहीं होंगे। फिलहाल प्लास्टिक और कागजी नोट दोनों साथ-साथ चलेंगे।

👉दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में चल रहे प्लास्टिक नोट

द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मतुाबिक ऑस्ट्रेलिया 1988 में पॉलीमर नोट जारी करने वाला पहला देश था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम समेत 60 से अधिक देशों ने विभिन्न मूल्यवर्ग में प्लास्टिक नोट अपनाए हैं।

👉10 और 20 रुपये के 100-100 करोड़ नोटों का होगा ट्रायल

लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि RBI ने 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलीमर नोट छापने का प्रस्ताव दिया था। सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। अगर फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में इन नोटों का नियमित प्रचलन शुरू किया जा सकता है।

👉क्यों ला रहा है RBI प्लास्टिक नोट?

RBI के मुताबिक पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ होते हैं। खासकर 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोट सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं और जल्दी फट जाते हैं। प्लॉस्टिक के नोट इनकी तुलना में 2 से 6 गुना अधिक समय तक चल सकते हैं, जिससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम होगी।

👉डिजिटल पेमेंट पर क्या होगा असर?

सरकार का कहना है कि इस समय इस योजना का डिजिटल भुगतान पर असर बताना जल्दबाजी होगी। सरकार ने साफ किया है कि कैश और डिजिटल पेमेंट दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का इस्तेमाल आगे भी जारी रहेगा।

👉पॉलीमर नोट आखिर होते क्या हैं?

पॉलीमर नोट विशेष प्लास्टिक फिल्म पर छापे जाते हैं, जबकि भारत के मौजूदा नोट कपास के लंबे रेशों से बने विशेष कागज पर तैयार किए जाते हैं। इन कागजी नोटों में लकड़ी का गूदा इस्तेमाल नहीं होता।

👉पर्यावरण के लिए भी बेहतर:

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार पॉलीमर नोटों का पर्यावरण पर असर कम होता है। ये कागजी नोटों की तुलना में 32% कम ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव पैदा करते हैं और 30% कम ऊर्जा की जरूरत होती है। इस्तेमाल के बाद इन्हें रीसाइकिल कर प्लास्टिक के अन्य उत्पाद, जैसे बगीचे की कुर्सियां आदि बनाने में उपयोग किया जा सकता है।

👉भारत में बढ़ रही है नकदी की मांग:

RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक देश में चलन में कुल करेंसी का मूल्य 41.23 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 12% अधिक है। इसमें 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 86% है।