नई दिल्ली। देश में कमर्शियल कोल माइनिंग को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा में कोयला मंत्रालय ने जानकारी दी कि 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के तहत देशभर की 12 कोयला खदानें पेश की गई हैं, जिनमें सबसे अधिक तीन खदानें छत्तीसगढ़ की हैं। इनमें तारा (संशोधित), माही वेस्ट और तेरम कोयला ब्लॉक शामिल हैं।
यह जानकारी कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत के लिखित प्रश्न के जवाब में दी गई। मंत्रालय के मुताबिक, 12 में से 6 कोयला खदानों के लिए कुल 18 बोलियां प्राप्त हुई हैं। फिलहाल प्रक्रिया तकनीकी मूल्यांकन चरण में है। इसके बाद पात्र बोलीदाताओं के बीच ई-नीलामी होगी और सफल कंपनियों के नाम घोषित किए जाएंगे।
👉40 से 52 महीने में पूरी करनी होंगी प्रक्रियाएं

सरकार ने बताया कि पूरी तरह अन्वेषित खदानों के लिए सभी पूर्व-प्रचालन शर्तें पूरी करने की अधिकतम समय-सीमा 40 महीने, जबकि आंशिक रूप से अन्वेषित खदानों के लिए 52 महीने निर्धारित की गई है।
👉ऑनलाइन और पारदर्शी होगी पूरी प्रक्रिया
कोयला मंत्रालय के अनुसार, पूरी नीलामी प्रक्रिया एमएसटीसी ई-नीलामी पोर्टल के जरिए दो-चरणीय ऑनलाइन प्रणाली से संचालित की जा रही है। पात्रता मानदंड, राजस्व साझेदारी और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरणीय स्वीकृति, वन स्वीकृति, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R), PESA और वन अधिकार अधिनियम (FRA) सहित सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन अनिवार्य होगा। साथ ही वैज्ञानिक खनन, कार्बन फुटप्रिंट कम करने, फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी और खदान बंद होने के बाद भूमि पुनर्वास जैसी शर्तें भी लागू रहेंगी।
छत्तीसगढ़ के 3 प्रमुख कोयला ब्लॉकों का इस नीलामी में शामिल होना राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम आवंटन और निवेश की तस्वीर ई-नीलामी पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
