रायपुर/कोरबा। नगर पालिका कटघोरा क्षेत्र में स्थापित अटल परिसर में निर्मित भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की मूर्ति के मामले में शासन के नगरीय एवं प्रशासन विभाग मंत्रालय ने उप अभियंता को निलंबित कर दिया है। शासन ने यह कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिए हैं लेकिन दूसरी तरफ इस कार्रवाई को लेकर कटघोरा क्षेत्र व पालिका के गलियारे में चर्चा तेज है कि बड़े अधिकारियों और मूल रूप से जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारी पर यह कार्रवाई हुई है। कार्रवाई की जद में अभी और लोगों का आना शेष है। अभी तो मूर्ति बनवाने वाले पेटी ठेकेदार और मूल ठेकेदार पर भी कोई कार्रवाई तय नहीं हुई है। भाजपा संगठन ने भी कोई एक्शन नहीं लिया है।



जारी आदेश अनुसार, संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर के द्वारा प्रेषित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार नगर पालिका परिषद कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कास्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में चन्द्र प्रकाश जायसवाल उप अभियंता उत्तरदायी पाये गये हैं। श्री जायसवाल का उक्त कृत्य उनके पदीय कर्तव्यों के विपरीत होने के कारण छत्तीसगढ़ नगर पालिका कर्मचारी (भर्ती तथा सेवा शर्ते) नियम, 1968 के नियम 53 के तहत् श्री जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबन अवधि में श्री जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग नियत किया जाता है एवं उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
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इस मामले में उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल का कहना है कि मूर्ति निर्माणकर्ता मनोज कुमार अग्रवाल के द्वारा मूर्ति का निर्माण कराया जा रहा था। निर्माणकर्ता के द्वारा गुणवत्ता परीक्षण कराया गया व प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। मौका स्थल पर मूर्ति निर्माण के दौरान जाकर पालिका के उप अभियंता एवं खुद सीएमओ के द्वारा अवलोकन विजिट व परीक्षण किया गया था। चंद्र प्रकाश जायसवाल ने कहा है कि उसके द्वारा मूर्ति को बाहरी आवरण/ ऊपर से देखकर उसके आधार पर देयक पत्रक तैयार किया गया था ना की मूर्ति को तोड़कर देखा गया था। इस पूरे मामले में उसकी कोई भी लापरवाही नहीं है। इतिहास
