JPSC में आया भूचाल : परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितता और ओएमआर शीट में हेराफेरी के मामले मेंCID समन के बाद आयोग के तीनों सदस्यों ने दिया इस्तीफा, राज्यपाल को भेजा त्यागपत्र ….

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितता और ओएमआर शीट में हेराफेरी के मामले में जांच का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद अब जेपीएससी के तीन सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए राज्यपाल को त्यागपत्र भेज दिया है।

इन तीनों सदस्यों को झारखंड पुलिस की सीआईडी ने पूछताछ के लिए समन जारी किया था, जिसके बाद राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। सोमवार को डॉ. अजिता भट्टाचार्य से सीआईडी की पूछताछ होनी है।

👉CID का शिकंजा और समन

जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और अन्य परीक्षाओं के संचालन में बड़े पैमाने पर धांधली, ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की जांच सीआईडी कर रही है।

इसी सिलसिले में सीआईडी ने आयोग की इन तीनों महिला व पुरुष सदस्यों (डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद) को अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ के लिए बुलाया था।

👉चेयरमैन का पहले ही हो चुका है इस्तीफा

इससे पहले, जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते के कार्यालय व आवास पर सीआईडी की छापेमारी के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया था।

अध्यक्ष के हटने के बाद से ही आयोग पहले से ही कार्यवाहक स्थिति में था। खियांग्ते के आवास के कंप्यूटर ऑपरेटर को रिमांड पर लेकर सीआईडी पूछताछ कर रही है। खियांग्ते से भी दो राउंड सीआईडी कार्यालय में पूछताछ हो चुकी है।

👉एजेंसी और बिचौलियों पर बड़ी कार्रवाई

इस बहुचर्चित परीक्षा घोटाले में परीक्षाएं आयोजित कराने वाली विवादित एजेंसी ‘टीडीपीएल’ (TDPL) के निदेशक, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और कई अन्य दलाल व कंप्यूटर ऑपरेटर पहले ही सीआईडी की गिरफ्त में आ चुके हैं। टीडीपल के मैनेजर ने पूर्व चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

रिमांड पर चल रहे आरोपियों से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं, जिसके आधार पर अब आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जा रही है। नियुक्ति प्रक्रिया और OMR में गड़बड़ी के पुख्ता साक्ष्यों के बीच सदस्यों के इस तरह अचानक इस्तीफे से झारखंड की इस संवैधानिक संस्था की साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताते चलें कि जेपीएससी के तीनों सदस्यों को दो सितंबर 2021 को जेपीएससी का सदस्य नियुक्त किया गया था। इन तीनों का कार्यकाल लगभग एक वर्ष बचा हुआ था।