छात्रों के आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान तेज ,मानसून सत्र में बोलीं प्रियंका – क्या हम भी आप लोगों की तरह सवाल उठाने की जगह चुप बैठ जाएं ….

नई दिल्ली । देश में छात्रों के आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। संसद के मानसून सत्र के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सरकार की जवाबदेही के साथ-साथ मीडिया की भूमिका पर भी तीखा सवाल उठाया।

प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर सरकार छात्रों पर लाठी चलवाती है, पैलेट गन और AK-47 चलाने जैसी कार्रवाई होती है, तो क्या सरकार इसके लिए जवाबदेह नहीं है ? उन्होंने मीडिया की ओर सवाल उछालते हुए कहा कि क्या ऐसे मामलों पर सवाल उठाने के बजाय चुप बैठ जाना चाहिए। क्या हम भी आप लोगों की तरह चुप बैठ जाएं ?

गौरतलब है कि परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों की मांगों को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद अब झारखंड में छात्र आंदोलन चल रहा है। इन प्रदर्शनों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं की आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाया गया। प्रियंका गांधी इससे पहले लोकसभा में भी इस मुद्दे को उठा चुकी हैं। उन्होंने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन और AK-47 के इस्तेमाल पर सवाल करते हुए पूछा था कि “क्या वे आतंकवादी थे ?” साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया ?

छात्रों के आंदोलन को लेकर अब सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष जहां इसे युवाओं की आवाज दबाने का मामला बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। प्रियंका गांधी के ताजा बयान ने इस बहस को और राजनीतिक धार दे दी है। उनका सवाल अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही और मीडिया की भूमिका तक पहुंच गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्रों की शिकायतों का समाधान संवाद से होगा या आंदोलन और उस पर पुलिस कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा ? साथ ही प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की परिस्थितियों और उसकी जरूरत को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की विपक्ष की मांग पर आगे क्या कदम उठता है, यह भी देखने वाली बात होगी।