0 शिकायतकर्ता ने बयान दर्ज कराने की जगह मनमाने जांच आदेश की मुख्य सचिव से की शिकायत
0 बौखलाए अफसर ने साक्ष्यमय बयान दर्ज कराने पुनः लिखा पत्र ,जानें पूरा मामला …
हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा । कांग्रेस शासनकाल में स्थापित किए गए ‘रीपा ‘ (ग्रामीण औद्योगिक पार्क) के संरचना (गोदाम) निर्माण में अनियमितता एवं औद्योगिक इकाई स्थापित करने शासन के नियमों के विपरीत स्व सहायता समूहों को गुमराह कर फर्मों के माध्यम से आपूर्ति किए गए करोड़ों रूपए का भुगतान भाजपा शासनकाल में सुर्खियों में बना हुआ है। करोड़ों रुपए के मशीनी सामग्रियों की भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता, क्रय, भुगतान प्रक्रिया की व्यापक लोकहित में राज्य स्तरीय टीम से जाँच कराकर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने संबंधी मुख्य सचिव के यहाँ किए गए शिकायती प्रकरण में ढाई साल तक जांच की फाइल तक आगे नहीं बढ़ी। अब अचानक राज्य कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन ढाई साल से लंबित प्रकरण की जांच पखवाड़े (15 दिवस ) के भीतर निबटाने की जुगत में लगा है । इस फेर में नियमों की अनदेखी कर कनिष्ठ अधिकारी उप संचालक पंचायत को प्रकरण में उल्लेखित वरिष्ठ अधिकारी तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ के भूमिका की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया है। शिकायतकर्ता ने कनिष्ठ(जूनियर) अधिकारी को जांच अधिकारी बनाए जाने पर लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए मुख्य सचिव से जांच के नाम औपचारिकता का निर्वहन किए जाने जिम्मेदारों को संरक्षण प्रदान किए जाने के मामले में नियमानुसार कार्यवाही किए जाने की शुक्रवार को ही लिखित शिकायत की है। उसके बावजूद प्रकरण में हर हाल में अपने स्तर पर जांच करने के लिए आमादा उप संचालक पंचायत ने शिकायतकर्ता को पुनः दस्तावेजी साक्ष्य मय बयान दर्ज कराने पत्र लिखकर मनमाने का परिचय दिया है। इस प्रशासनिक मनमानेपन ने कई तरह के सवालों को जन्म दे दिया है।

यहाँ बताना होगा कि
मुख्य सचिव महोदय छत्तीसगढ़ शासन के यहां पत्र क्र. 931 दिनांक 24.01.2024 को पत्र लेख कर आकांक्षी जिला कोरबा में ‘रीपा’ (ग्रामीण औद्यांगिक पार्क) मे हुई अनियमिता के मामले में व्यापक लोकहित में राज्य स्तरीय टीम गठित कर 30 दिवस के भीतर प्रकरण की जांच का अनुरोध किया गया था। पत्र के माध्यम से शिकायतकर्ता द्वारा आकांक्षी जिला कोरबा में ‘रीपा’ (ग्रामीण औद्यांगिक पार्क) के संरचना (गोदाम) निर्माण में अनियमितता एवं औद्योगिक इकाई स्थापित करने शासन के नियमों के विपरीत स्व सहायता समूहों को गुमराह कर फर्मों रामसा प्रा.लि. एलॉयड रायपुर (छ.ग.) एवं ब्रिटिश इंडिया कंपनी कोरबा के माध्यम से आपूर्ति किए गए करोड़ों रूपए के मशीनी सामग्रियों की भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता, क्रय, भुगतान प्रक्रिया की व्यापक लोकहित में राज्य स्तरीय टीम से जाँच कराकर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने का अनुरोध किया गया था
जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृत ‘रीपा’ योजना में हुई तमाम अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए फर्म के शेष भुगतान पर तत्काल रोक लगाते हुए राज्य स्तरीय टीम से प्रकरण की व्यापक लोकहित में जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारी / कर्मचारियों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया था साथ ही की गई कार्यवाही आदेश की प्रतिलिपि मेरे पत्र व्यवहार के पते पर उपलब्ध कराने का
अनुरोध किया गया था लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रकरण की जांच ढाई तक लटकी रही ।
इसी माह 05 अगस्त को शाम 04:00 बजे NRLM प्रकोष्ठ जिला पंचायत- कोरबा (छ.ग.) के शाखा लिपिक के द्वारा शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप् के माध्यम से एक पत्र प्रेषित किया गया जो कार्यालय जिला पंचायत कोरबा, उपसंचालक पंचायत, जिला पंचायत कोरबा (छ.ग.) के द्वारा शिकायतकर्ता के नाम प्रेषित किया गया था । उपरोक्त कार्यालयीन पत्र क्र.3372-DDP/जि.प. 2025-26, कोरबा, दिनांक 05.08. 2026 के माध्यम से उपसंचालक पंचायत, जिला पचायत कोरबा (छ.ग.) द्वारा प्रकरण में शिकायतकर्ता को दिनांक 07.08.2026 को प्रातः 12:00 बजे कार्यालय उपसंचालक, जिला पंचायत- कोरबा में उक्त शिकायत के संबंध में आवश्यक साक्ष्य दस्तावेज सहित उपस्थित होना सुनिश्चित करने का लेख था। इस संदर्भ में शिकायतकर्ता को किसी भी प्रकार का हार्ड कॉपी प्राप्त नहीं हुआ है।
शिकायतकर्ता ने उक्त जांच आदेश में शामिल अधिकारी को प्रकरण में जांच के लिए अयोग्य मानते हुए उसी दिवस 6 अगस्त 2026 को ही मुख्य सचिव को लिखित शिकायत प्रेषित कर जांच के नाम पर की जा रही औपचारिकता ,नियमों की अनदेखी से अवगत कराया है।
👉 तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ की भूमिका से जुड़ी शिकायतों की जांच का जिम्मा उप संचालक पंचायत को देने पर उठाए सवाल


शिकायतकर्ता ने मुख्य सचिव को बताया है कि उसके द्वारा किए गए शिकायत पत्र में प्रकरण की राज्य स्तरीय टीम से जांच का अनुरोध किया गया था जिसे न केवल जिला स्तर पर दिया गया वरन् प्रकरण में निचले स्तर के अधिकारी जो प्रकरण की जांच हेतु सक्षम नहीं हैं उन्हें जांच का जिम्मा सौंपकर जांच प्रक्रिया के नाम पर औपचारिकता का निर्वहन किया गया है। जबकि शिकायतकर्ता द्वारा प्रेषित शिकायत पत्र में तत्कालीन जिला पंचायत सी.ई.ओ. (मुख्य कार्यपालन अधिकारी) श्री नूतन कंवर एन.आर.एल.एम. के जिम्मेदार अफसरों के भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया था। महोदय, इसके बावजूद जिला पंचायत सी.ई.ओ. के अधीनस्थ अधिकारी कार्यालय उपसंचालक पंचायत- कोरबा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो कि शासन के निर्धारित नियमों के सर्वथा विपरीत है। एक कनिष्ठ अधिकारी अपने से वरिष्ठ अधिकारी के संदर्भ में प्राप्त शिकायती प्रकरणों की जांच नहीं कर सकते।
पूरे प्रकरण में जिला पंचायत व एन.आर.एल.एम. शाखा के जिम्मेदार अधिकारी / कर्मचारियों की संलिप्तता है अतः ऐसे गंभीर प्रकरण में सक्षम अधिकारी से प्रकरण की जांच कराया जाना नितांत आवश्यक है। उपरोक्त पहलुओं को देखते हुए शिकायतकर्ता ने उपसंचालक पंचायत के पत्र व्यवहार पर शुक्रवार को 6 अगस्त को अपना पक्ष व बयान कलमबद्ध कराना मुनासिब नहीं समझा।
👉 पखवाड़े भर के भीतर सक्षम अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपने की गई है मांग


मुख्य सचिव से प्रकरण में पत्र प्राप्ति के 15 दिवस के भीतर सक्षम अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए पूर्व शिकायती पत्र में उल्लेखित 11 बिन्दुओं के आधार पर प्रकरण की जांच सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया है , तब तक संबंधित फर्म के शेष भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की अनुरोध की गई है । उपरोक्त अनुरोध की अनदेखी पर प्रकरण सीधे महामहिम राज्यपाल महोदय छ.ग. शासन के संज्ञान में आवश्यक कार्यवाही हेतु लाए जाने की बात कही गई है।
👉मुख्य सचिव के यहाँ शिकायत की परवाह नहीं ,अपने ही स्तर पर जांच निबटाने में आमादा,शिकायतकर्ता को साक्ष्यमय बयान दर्ज कराने उप संचालक पंचायत ने पुनः पत्र लिखा

प्रकरण के जांच अधिकारी उप संचालक पंचायत को मुख्य सचिव के यहाँ प्रकरण की सक्षम अधिकारी से जांच कराए जाने सबंधी शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत की कोई परवाह नहीं । उप संचालक पंचायत कोरबा ने 10 अगस्त को पत्र जारी कर शिकायतकर्ता को 17 अगस्त की दोपहर 12 बजे प्रकरण में दस्तावेज साक्ष्य समेत बयान दर्ज कराए जाने उपस्थित होने पत्र व्यवहार किया है। जिसमें उनके द्वारा पूर्व बयान दिनांक में शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति से जांच प्रक्रिया के प्रभावित होने का भी उल्लेख किया गया है ।
👉सुलगते सवाल , लंबित शिकायती प्रकरण निबटाने की तत्परता या फर्म को संरक्षण ?
जिस तरह ढाई से लंबित शिकायती प्रकरणों को पखवाड़े (15 दिवस) के भीतर निराकृत करने की जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी की जा रही है उसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई सालों से लंबित प्रकरण को निराकृत करने का दबाव है या फिर अपने स्तर पर मनमाने जांच कर संबंधित फर्म को को संरक्षण प्रदान कर लंबित भुगतान किए जाने की कोई योजना है। बहरहाल यह तो प्रकरण की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा । लेकिन जिस तरह शिकायतकर्ता के अनुरोध की अनदेखी कर एक जूनियर (कनिष्ठ) अधिकारी से शिकायती प्रकरण की जांच कराई जा रही उसने कई तरह के सवालों को जन्म दे दिया है। यदि ईमानदारी पारदर्शिता ,निष्पक्षता के साथ प्रकरण की जांच कराई जानी है तो अपर कलेक्टर या संयुक्त कलेक्टर को जिला स्तर पर जांच अधिकारी बनाया जाना था।
👉स्व सहायता समूहों को गुमराह कर ब्लेंक कार्यादेश पत्रक पर हस्ताक्षर लेकर चहेते फर्मों को मनमाने दर पर करोड़ों के सामग्री, मशीन, उपकरण का कार्यादेश देकर अनुचित लाभ दिलाने का है आरोप …

शिकायत के अनुसार पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क’ रीपा’ के अंतर्गत आदिवासी बाहुल्य कोरबा जिले में कुल 10 रीपा स्थापित किए गए हैं। इनमें विकासखण्ड कोरबा के चिर्रा और सरईडीह (पहंदा), कटघोरा के अरदा और रंजना, पाली के केराझरिया और नोनबिर्रा, पोड़ी-उपरोड़ा के कापूबहरा और सेमरा एवं करतला के जमनीपाली और कोटमेर में रीमा स्थापित किए गए हैं। जिसमें 60 गतिविधियों का संचालन किया जाना था। 25 मार्च 2023 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों जिले के सभी 10 रीपा का वर्चुअल उद्घाटन हुआ था। लेकिन उद्घाटन के पहले एवं आज पर्यन्त रीपा की संरचनाओं मशीन, उपकरण, सामाग्री क्रय आपूर्ति से लेकर भुगतान प्रक्रिया में की गई नियमों के अनदेखी की कारगुजारियां परत दर परत उजागर होने लगी हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में जहां ‘रीपा एनआरएलएम के जिम्मेदार अधिकारियों एवं वेंडरों की जुगलबंदी से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। नियमों, प्रक्रियाओं की अनदेखी कर स्व सहायता समूहों को गुमराह कर ब्लेंक कार्यादेश पत्रक पर हस्ताक्षर लेकर चहेते फर्मों को मनमाने दर पर करोड़ों के सामग्री, मशीन, उपकरण का कार्यादेश देकर अनुचित लाभ दिलाए जाने का आरोप है । रीपा का उद्देश्य ग्रामीण युवा उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ने की थी लेकिन अफसरों के दबाव में चहेते महिला स्व समूहों से कार्य लिए जाने का आरोप है। यही नहीं महिला स्व सहायता समूहों को निर्माण एवं सामग्री क्रय किए जाने के एवज में भुगतान की जगह चहते वेंडरों को समूहों से गुमराह कर ब्लैंक चेक लेकर भुगतान किए जाने का आरोप है।
👉 तकरीबन 30 करोड़ के भुगतान का आरोप

ब्लेंक कार्यादेश पत्र पर समूह के अध्यक्ष अजनी कुमारी सचिव लक्ष्मीन बाई के हस्ताक्षर सहित पद मुद्रा (सील) लगे हैं। इससे स्पष्ट है कि विश्वस्त सूत्रों से मिल रही जानकारी कि समूहों के नाम पर निर्माण, सामग्री, मशीन एवं प्रशिक्षण का कार्य चेहेते वेंडर मे. रामसा प्रा .लि. एलॉयड रायपुर (छ.ग.) एवं ब्रटिश इंडिया कंपनी कोरबा को दिया गया है। जिसके द्वारा तकरीबन 30 करोड़ का काम किए जाने का उल्लेख है । जिसमें नियमों, मापदंडों, मानकों, गुणवत्ता की अनदेखी कर जुगलबंदी से 25 करोड़ रुपए का भुगतान कर वारा न्यारा किए जाने का उल्लेख है । नाम न छापने की शर्त पर कुछ समूहों ने बताया कि समूहों के आर्थिक लाभ का जो रिपोर्टकार्ड पेश किया गया है वो महज दिखावा है, जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
👉तत्कालीन जिला सीईओ के भूमिका की जांच की दरकार
सत्ता परिवर्तन के बाद रीपा सुरक्षा, प्रशासनिक अदूरदर्शिता के अभाव में असामाजिक तत्वों के निशाने पर है। कोरबा ब्लॉक के सराईडीह रीपा गौठान से फ्लाई ऐश ब्रिक्स स्थापित करने लाखों रुपए के उपकरण बाउंड्रीवाल के अभाव में असुरक्षित पड़े हैं। लाखों रुपए के मोटर भी ढाई साल पहले चोरी हो गए हैं । लेकिन न फर्म ने एफआईआर दर्ज कराई न जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे अपना दायित्व समझा। चिर्रा रीपा गौठान में करोड़ों रुपए की मशीनरी उपकरण, सामाग्रियों की आपूर्ति सहित संरचनाओं के निर्माण में नियम कायदों को ताक पर रखकर कार्य किए जाने का आरोप है। कायदे से जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ (वर्तमान में बालोद जिला बालोद छ.ग. में पदस्थ ) श्री नूतन कंवर, एनआरएलएम के जिम्मेदार अफसरों के भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
