NHAI इमरजेंसी रिस्पांस को लेकर सख्त : लिया बड़ा फैसला – हाइवे हादसे के बाद 10 मिनट में पहुंचेगी एम्बुलेंस ,देरी पर लगेगा इतना अर्थदंड,

नई दिल्ली । नेशनल हाईवे पर सड़क हादसों में घायलों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इमरजेंसी रिस्पांस को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत हादसे की सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस को तय समयसीमा में घटनास्थल तक पहुंचना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर एंबुलेंस ऑपरेटर और संबंधित ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य हादसे के बाद के ‘गोल्डन आवर’ में घायल को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

👉1 मिनट में रिस्पांस, 2 मिनट में रवाना होगी एंबुलेंस

NHAI के प्रोजेक्ट्स पर तैनात इमरजेंसी वाहनों के लिए NHAI केयर/इंसिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। कंट्रोल रूम से इमरजेंसी अलर्ट मिलने के बाद एंबुलेंस टीम को एक मिनट के भीतर टिकट स्वीकार करना होगा। इसमें देरी पर प्रति मिनट 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। टिकट स्वीकार करने के बाद एंबुलेंस को अगले दो मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना होना होगा। इसमें भी देरी पर 5,000 रुपये प्रति मिनट का जुर्माना तय किया गया है। वहीं किसी इमरजेंसी टिकट को बिना उचित कारण रिजेक्ट करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

👉10 किलोमीटर के दायरे में 10 मिनट की डेडलाइन

NHAI ने एंबुलेंस के घटनास्थल तक पहुंचने के लिए दूरी के आधार पर समय तय किया है। अगर हादसा एंबुलेंस के बेस से 10 किलोमीटर के दायरे में हुआ है, तो उसे अलर्ट मिलने के बाद 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचना होगा। तय समयसीमा में नहीं पहुंचने पर प्रति घटना 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। 10 किलोमीटर से अधिक दूरी के मामलों में दूरी के हिसाब से रिस्पांस टाइम तय होगा।

👉सिर्फ मौके पर पहुंचना नहीं, एक घंटे में अस्पताल भी

NHAI की नई व्यवस्था में एंबुलेंस के घटनास्थल तक पहुंचने के साथ-साथ घायल को अस्पताल पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है। इमरजेंसी टिकट मिलने के बाद एक घंटे के भीतर घायल को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें देरी होने पर भी प्रति मामले 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

👉GPS बंद किया तो रोज लगेगा जुर्माना

NHAI ने एंबुलेंस और अन्य ऑन-रोड इमरजेंसी वाहनों की निगरानी के लिए तकनीकी व्यवस्था को भी सख्त किया है। एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों में AIS-140 GPS और IoT सिम वाले एंड्रॉइड डिवाइस अनिवार्य किए गए हैं।

अगर कोई वाहन NHAI केयर ऐप पर ऑनलाइन नहीं रहता, GPS बंद रखा जाता है या सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया जाता, तो 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जा सकता है।
वहीं निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस में जरूरी मेडिकल उपकरण, दवाएं, ड्राइवर या EMT उपलब्ध नहीं पाए जाने पर 10,000 रुपये प्रति निरीक्षण का जुर्माना लगाया जाएगा।

👉हर 24 घंटे में मॉक ड्रिल भी जरूरी

एंबुलेंस की तैयारी और रिस्पांस क्षमता को बनाए रखने के लिए हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का मॉक ड्रिल या ड्राय रन करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि, अगर एंबुलेंस उसी दिन किसी वास्तविक हादसे में 5 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी है, तो अलग से ड्राय रन की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, अगर किसी पड़ोसी हाईवे स्ट्रेच पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस को अपने निर्धारित प्रोजेक्ट क्षेत्र से बाहर जाकर भी घायल की मदद करनी होगी।

👉क्यों अहम है NHAI का यह फैसला ?

सड़क हादसों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। दुर्घटना के बाद एंबुलेंस के मौके पर पहुंचने और घायल को अस्पताल ले जाने में होने वाली देरी कई बार स्थिति को गंभीर बना देती है। ऐसे में NHAI का नया सिस्टम रिस्पांस टाइम, GPS ट्रैकिंग और जवाबदेही को एक साथ जोड़ता है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि हादसे के बाद एंबुलेंस पहुंची या नहीं, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि कितनी देर में अलर्ट स्वीकार हुआ, कितनी देर में एंबुलेंस रवाना हुई और घायल को कितने समय में अस्पताल पहुंचाया गया।