KORBA : खदान विस्तार से पहले बढ़ा विस्थापन का दबाव ,दीपका में स्वास्थ्य केंद्र शिफ्टिंग का ग्रामीणों ने किया विरोध, कुसमुंडा में 150 प्रभावितों ने मुआवजा लेने से किया इंकार …

कोरबा। बारिश का मौसम खत्म होते ही एसईसीएल की मेगा खदानों के विस्तार की तैयारी तेज होने लगी है। दीपका, कुसमुंडा और गेवरा खदानों के विस्तार के रास्ते में अब सबसे बड़ी चुनौती खदान प्रभावितों का विस्थापन और मुआवजे का मामला है। दीपका में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शिफ्टिंग को लेकर ग्रामीणों के विरोध ने इसका संकेत भी दे दिया है।

हरदीबाजार में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खदान से महज करीब 60 मीटर दूर है। एसईसीएल दीपका का विस्तार अस्पताल मोहल्ला की ओर प्रस्तावित है। विस्तार के लिए आरआई, पटवारी कार्यालय, पोस्ट ऑफिस, प्री-मैट्रिक छात्रावास और सचिव आवास को पहले ही खाली कराया जा चुका है। इसी क्रम में तहसीलदार, नायब तहसीलदार और हरदीबाजार पुलिस की मौजूदगी में एसईसीएल की नियोजित ठेका कंपनी स्वास्थ्य केंद्र की शिफ्टिंग के लिए पहुंची। इसकी जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को हटाने से पहले सर्वसुविधायुक्त नया भवन तैयार किया जाए। उन्होंने अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर की पदस्थापना नहीं होने से इलाज में आ रही परेशानी का मुद्दा भी अधिकारियों के सामने उठाया। विरोध के बाद ठेका कंपनी को शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू किए बिना लौटना पड़ा।

👉कुसमुंडा में मुआवजे पर अटका विस्तार

एसईसीएल कुसमुंडा खदान का विस्तार जटराज की ओर किया जाना है। इसके लिए खदान प्रभावितों को अंतिम नोटिस दिए जा रहे हैं। करीब 272 खातेदार विस्तार से प्रभावित होंगे, जबकि इनमें लगभग 150 प्रभावितों ने अब तक निर्धारित मुआवजा नहीं लिया है। एसईसीएल ने ऐसे प्रभावितों को एक सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद मुआवजे की राशि ट्रिब्यूनल कोर्ट में जमा कराने की जानकारी दी जा रही है।

👉गेवरा का रुख नरईबोध की ओर

इधर एसईसीएल गेवरा खदान के विस्तार की दिशा भी तय है। गेवरा का विस्तार नरईबोध गांव की ओर किया जाना है। बारिश के दौरान प्रभावितों के विस्थापन और अन्य प्रक्रियाओं के कारण विस्तार की रफ्तार प्रभावित रही। अब मानसून समाप्त होने के बाद तीनों मेगा माइंस में अधिग्रहण, विस्थापन और विस्तार से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी है।