कोरबा। SECL के गेवरा प्रोजेक्ट में यूनियन सदस्यता सत्यापन 2026 के नतीजों ने श्रमिक राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। वरिष्ठ श्रमिक नेता नाथूलाल पाण्डेय के नेतृत्व वाली कोयला मजदूर सभा यानी HMS को इस बार बड़ा झटका लगा है। 2025 में सबसे ज्यादा समर्थन हासिल करने वाली यह यूनियन 2026 के सत्यापन में पांचवें स्थान पर पहुंच गई। वहीं INTUC ने 496 सदस्यों के समर्थन के साथ पहला स्थान हासिल किया।
👉HMS को एक साल में 368 सदस्यों का नुकसान

गेवरा प्रोजेक्ट में 12 और 13 सितंबर 2026 को हुए सदस्यता सत्यापन में कोयला मजदूर सभा को महज 146 कामगारों का समर्थन मिला। वर्ष 2025 में यही संख्या 514 थी। यानी एक साल में HMS को 368 सदस्यों का नुकसान हुआ। गेवरा प्रोजेक्ट की कुल मेनपावर 1,913 बताई गई है। पिछले साल की मजबूत स्थिति के मुकाबले इस बार पांचवें स्थान पर पहुंचना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
👉संगठन के अंदर विवाद के बाद बदला समीकरण
HMS की सदस्य संख्या में गिरावट के पीछे संगठनात्मक विवाद को भी एक अहम कारण माना जा रहा है। नेतृत्व, कार्यशैली और कथित फंड संबंधी अनियमितताओं को लेकर विवाद के बाद संगठन में विभाजन की स्थिति बनी थी। रेशमलाल यादव के नेतृत्व में कोयला मजदूर सभा का एक बड़ा धड़ा अलग होकर कोयला मजदूर पंचायत में शामिल हो गया था। दोनों संगठनों को HMS से संबद्ध बताया जाता है। इसी घटनाक्रम का असर सदस्यता सत्यापन के नतीजों में दिखाई देने की चर्चा है।
👉496 सदस्यों के साथ बनी नंबर-1 यूनियन
गेवरा प्रोजेक्ट में इस बार INTUC ने सबसे ज्यादा 496 कामगारों का समर्थन हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। AITUC 493 सदस्यों के साथ दूसरे स्थान पर रही। BMS को 234 कामगारों का समर्थन मिला। वहीं 536 कामगार अनुपस्थित रहे या NOTA का विकल्प चुना। यह आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में कामगारों ने किसी भी यूनियन के पक्ष में समर्थन दर्ज नहीं कराया।
👉गेवरा क्षेत्रीय इकाई में भी HMS की भारी गिरावट
गेवरा क्षेत्रीय इकाई में भी HMS को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। वर्ष 2025 में 133 सदस्यों के समर्थन के साथ पहले स्थान पर रही HMS को 2026 में केवल 21 कामगारों का समर्थन मिला। यानी यहां यूनियन ने 112 सदस्यों का समर्थन खो दिया। दूसरी ओर INTUC ने 121 सदस्यों के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि AITUC को 98 और BMS को 80 सदस्यों का समर्थन मिला।
👉नतीजों से बदलेगी श्रमिक राजनीति की दिशा
गेवरा प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय इकाई के नतीजों ने HMS के सामने संगठन को मजबूत करने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक साल में सदस्यता में आई तेज गिरावट के बीच INTUC का शीर्ष पर पहुंचना और AITUC का मजबूत प्रदर्शन श्रमिक राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। अब इन नतीजों के बाद यूनियनों के बीच संगठन विस्तार और कामगारों के समर्थन को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
