MP : महिला नर्सिंग ऑफिसर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, शादीशुदा लिव इन पार्टनर ने गला दबाकर कर शव मगरमच्छों वाली नदी में फेंका …

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के भिंड में नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता की कथित हत्या के मामले में उनके लिव-इन पार्टनर सत्यप्रकाश पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी उन्हें कानपुर घुमाने और खरीदारी कराने का वादा करके साथ ले गया था। आरोप है कि उसने स्नेहलता की गला दबाकर हत्या की और शव उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पचनदा क्षेत्र में नदी में फेंक दिया। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसे लगा था कि मगरमच्छ शव खा जाएंगे और उसका पता नहीं चल सकेगा। हालांकि, शव बरामद नहीं हुआ है और इस आशंका की पुष्टि भी नहीं हुई है।

👉पढ़ाई के दौरान हुई थी पहचान

स्नेहलता मूल रूप से बिहार के नालंदा की रहने वाली थीं। नर्सिंग की पढ़ाई के लिए वह भिंड आई थीं। यहां एक निजी कॉलेज में उनकी पहचान सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह से हुई। सत्यप्रकाश उसी कॉलेज में काम करता था। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में वे साथ रहने लगे। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था। स्नेहलता और उसके रिश्ते को लेकर घर में विवाद भी होने लगे थे। जांच में दोनों के साथ रहने और उनके बीच बढ़ते मतभेदों का घटनाक्रम सामने आया है।

👉बच्चे और पत्नी का दर्जा देने को लेकर विवाद

स्नेहलता ने करीब दस महीने पहले एक बेटे को जन्म दिया था। पुलिस के अनुसार, बच्चे और रिश्ते को लेकर दोनों के बीच तनाव बढ़ रहा था। स्नेहलता चाहती थीं कि सत्यप्रकाश उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करे। बताया गया है कि आठ अक्टूबर को सत्यप्रकाश बच्चे को अपनी पहली पत्नी के पास छोड़ आया था। बच्चे को पहली पत्नी के पास रखने और स्नेहलता की मांग को इस मामले की अहम पृष्ठभूमि माना जा रहा है। हालांकि, हत्या के पीछे की पूरी परिस्थितियां जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

👉कानपुर में खरीदारी कराने का दिया भरोसा

आठ अक्टूबर को सत्यप्रकाश ने स्नेहलता से कानपुर चलने की बात कही। उसने कॉलेज के कुछ काम का हवाला दिया और साथ में घूमने तथा खरीदारी कराने का भरोसा दिलाया। इस प्रस्ताव के बाद स्नेहलता उसके साथ रवाना हो गईं। घर से निकलने से पहले उन्होंने अपनी एक महिला मित्र को फोन करके कानपुर जाने की जानकारी दी थी। यह मित्र उनके साथ नर्सिंग होम में काम करती थीं। इसके बाद स्नेहलता का संपर्क नहीं हो सका। यात्रा पर निकलने से पहले किया गया यह फोन उनके घर से जाने के घटनाक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी बना।

👉वापसी के दौरान वारदात का आरोप

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस यात्रा में सत्यप्रकाश के साथ एक एंबुलेंस चालक और एक अन्य व्यक्ति के जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि लौटते समय स्नेहलता की हत्या कर दी गई और शव पुल से नदी में फेंक दिया गया। साथ गए दूसरे लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल उनकी संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यात्रा में साथ होने और हत्या में शामिल होने के आरोपों को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर जांचा जा रहा है। खुद थाने पहुंचा और छपवाए तलाश के पर्चे इस मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब सत्यप्रकाश खुद स्नेहलता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने भिंड सिटी कोतवाली पहुंचा। उसने उनकी तलाश के लिए पर्चे भी छपवाए थे। शुरुआती तौर पर वह खुद को उनकी खोज में जुटे व्यक्ति के रूप में पेश कर रहा था। लेकिन जांच के दौरान पुलिस को उसकी भूमिका पर संदेह हुआ। इसके बाद उससे पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में उसने स्नेहलता की हत्या करने और शव नदी में फेंकने की बात स्वीकार की ।

👉पचनदा में शव की तलाश जारी

आरोपी की निशानदेही पर पुलिस टीम पचनदा क्षेत्र पहुंची और नदी में तलाश शुरू की गई। पचनदा पांच नदियों का संगम क्षेत्र है। यहां मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आरोपी के कथित बयान के बाद शव की बरामदगी जांच की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस के अनुसार, उसने स्नेहलता का गला दबाने और पुल से शव फेंकने की बात बताई है। लेकिन तलाशी अभियान के बावजूद शव नहीं मिलने से घटना की कई कड़ियों का स्पष्ट होना बाकी है। परिजनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग मामले की जानकारी मिलने पर स्नेहलता के परिजन बिहार से भिंड पहुंचे। परिवार ने सत्यप्रकाश पर हत्या का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने पहले भी स्नेहलता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश किए जाने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की भी जांच आवश्यक है। फिलहाल पुलिस का ध्यान स्नेहलता का शव तलाशने और घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने पर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तलाश जारी है। मगरमच्छों द्वारा शव खा लिए जाने की बात अभी केवल आरोपी के कथित बयान और आशंका तक सीमित है; इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।