CG : पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों और अधिकारों मेंभेदभाव से जुड़े याचिका पर हाईकोर्ट सख्त,राज्य को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर मांगा जवाब …

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों और अधिकारों से जुड़े मामले में राज्य शासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में शामिल किए गए पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा संबंधी पात्रता और अधिकारों पर उचित विचार करने की मांग की गई है। साथ ही, सेवा शर्तों में कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्न राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने सुरेश कुमार उर्फ सुरेश निषाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने मामले को छह सप्ताह बाद अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला उन कर्मियों की सेवा शर्तों से जुड़ा है, जिन्हें बाद में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में शामिल किया गया था। याचिकाकर्ता ने पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा संबंधी पात्रताओं और अधिकारों पर उचित विचार करने की मांग की है। याचिका में पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा संबंधी पात्रताओं और अधिकारों पर उचित विचार करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सेवा शर्तों को लेकर कथित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला दिया है। याचिका में इन्हीं संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों के अधिकारों पर विचार करने की मांग की गई है।

👉क्या है सलवा जुडूम से जुड़ा मामला ?

इस मामले की पृष्ठभूमि बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2005 के आसपास शुरू हुए सलवा जुडूम अभियान से जुड़ी है। उस दौरान कुछ युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) के रूप में नियुक्त किया गया था। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष पुलिस अधिकारियों को सशस्त्र माओवादी-विरोधी अभियानों में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सलवा जुडूम से जुड़े कुछ कर्मियों को छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में शामिल किया गया। अब इन्हीं कर्मियों की सेवा शर्तों और अधिकारों को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कथित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए संबंधित सेवा पात्रताओं पर उचित विचार करने की मांग की गई है।

👉सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राज कुमार गुप्ता ने अदालत से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने और जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने जवाब की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता फतेश कुमार साहू और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अधिवक्ता विद्याभूषण सोनी ने पैरवी की। हाई कोर्ट ने मामले को छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अगली सुनवाई में राज्य शासन और अन्य प्रतिवादियों के जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्यवाही होगी। फिलहाल हाई कोर्ट ने केवल नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों में कथित भेदभाव और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।