बलरामपुर । छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूल के विद्यार्थियों को आसाराम बापू से जुड़ी किताबें बांटे जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने एक्शन लिया है। अभिभावकों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच कराई और स्कूल के प्रभारी प्राचार्य महेश कुमार प्रजापति को पद से मुक्त कर दिया। आरोप है कि विद्यार्थियों को ‘संस्कार सरिता‘ नाम की किताबें बांटी गई थीं और बकायदा उन्हें पढ़कर परीक्षा देने के लिए कहा गया था।

जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद विद्यालय का है। सोमवार को स्कूल में मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राओं को ‘संस्कार सरिता’ नाम की किताबें बांटी गईं। बताया गया है कि आसाराम बापू के कुछ अनुयायी स्कूल पहुंचे थे और प्रभारी प्राचार्य के माध्यम से विद्यार्थियों को किताबें वितरित की गईं। बच्चों के हाथों में किताबें देखकर अभिभावकों ने आपत्ति जताई। इसके बाद उन्होंने शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में स्कूल में इस तरह किताबें बांटे जाने और विद्यार्थियों पर उन्हें पढ़ने तथा परीक्षा देने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया। शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद वाड्रफनगर के खंड शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर जायसवाल स्कूल पहुंचे। जांच के दौरान विद्यार्थियों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों ने अपने बयान में बताया कि किताबें स्कूल के प्रभारी प्राचार्य महेश कुमार प्रजापति ने बांटी थीं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने महेश कुमार प्रजापति को प्रभारी प्राचार्य के पद से मुक्त कर दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनके खिलाफ किसी अन्य दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। इस मामले ने स्कूलों में विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली पुस्तकों, उनकी उपयुक्तता और अभिभावकों की सहमति जैसे सवालों को सामने ला दिया है। अब मामले में शिक्षा विभाग का विस्तृत पक्ष और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
