भोपाल/रायपुर । बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर की गई एक टिप्पणी के बाद उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यद्यपि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने इस बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर जमकर बयानबाजी हो रही है।
👉क्या था पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत 28 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के शिवपुरी (करैरा) में आयोजित रामकथा के दौरान हुई। कथा सुनाते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि भगवान राम सीधे खड़े रहते हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े (त्रिभंगी मुद्रा) दिखाई देते हैं। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण के खड़े होने के अंदाज और बांसुरी बजाने की शैली का भी जिक्र किया था।
जैसे ही इस वक्तव्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मथुरा के संतों और श्रद्धालुओं ने इस तुलना पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया।
धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
बढ़ते विवाद को देखते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और कृष्ण में कोई भेद करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संत पद की व्याख्या करते हुए भावुकता में यह बात कह गए थे और वे स्वयं श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं।
कांग्रेस नेताओं का तीखा हमला👇
👉दिग्विजय सिंह: अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के दौरान दिग्विजय सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री को ‘मूर्ख’ करार दिया और सवाल उठाया कि वे कब से बाबा बन गए। उनके साथ मौजूद कंप्यूटर बाबा ने भी शास्त्री को ‘राजनीतिक बाबा’ बताते हुए कहा कि बिना ज्ञान के कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ के लिए आगे बढ़ाया जाता है।
👉भूपेश बघेल: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा कि “कोई तो केमिकल लोचा है, इनकी रेबीज वगैरह की जांच करवाना ठीक होगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदुओं के आराध्यों का उपहास उड़ाए जाने पर अब धर्म के ठेकेदारों की भावनाएं आहत क्यों नहीं हो रही हैं?
👉 लक्ष्मण सिंह: पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने एक वीडियो जारी कर जनता से धीरेंद्र शास्त्री का पूर्ण बहिष्कार करने की अपील की।
गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ लक्ष्मण सिंह बहिष्कार की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके भतीजे जयवर्धन सिंह और उनका परिवार शास्त्री का अनुयायी माना जाता है और उन्होंने पूर्व में शास्त्री को राघौगढ़ किले में आमंत्रित भी किया था। धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बावजूद इस मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
