हसदेव एक्सप्रेस न्यूज बेमेतरा। जलग्रहण मिशन क्षेत्र अंतर्गत माइक्रोवाटरशेड विकास कार्यों अमृत सरोवर निर्माण ,नाला चेकडेम निर्माण कार्यों में बेमेतरा जिले में मानव श्रम की जगह मशीनों को तरजीह देते हुए 1 करोड़ 5 लाख 85 हजार 650 रुपए का भुगतान सोल्ड निजी JCB वाहनों के जरिए किए गए संदेहास्पद भुगतान मामलों की दस्तावेजी शिकायत में संजीदगी से जांच एवं कार्रवाई के बजाय प्रशासनिक अफसर मामले में औपचारिकता का निर्वहन कर भ्रष्टाचारियों की ढाल बने हुए हैं। कमिश्नर कार्यालय को अंतर्विभागीय जांच समिति गठित कर प्रकरण की जांच का अनुरोध किए जाने के उपरांत भी तय मियाद में जांच न कर जिम्मेदारों को संरक्षण दिए जाने पर मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत कर जिम्मेदार /अधिकारी कर्मचारियों का चिन्हांकन कर अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने के उपरांत भावी कार्रवाई की डर से कलेक्टर कार्यालय ने प्रकरण में खानापूर्ति कर कृषि विभाग को ही जांच की जिम्मेदारी दे दी है।जो अपने ही कार्यालय में पदस्थ सहायक संचालक के पीआईए के रूप में किए गए कार्यों की जांच कर प्रतिवेदन भेजेंगे। जिम्मेदार विभागों के इस रवैये ने न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के कार्य दायित्वों पर सवालिया निशान लगा दिया है ,वरन जनमानस में सरकार की छवि भी खराब की है।
यहाँ बताना होगा कि कार्यालय संभाग आयुक्त महोदय दुर्ग संभाग ,जिला -दुर्ग (छ.ग.) के यहाँ पत्र क्रमांक 7634 दिनांक 13.08.2025 के माध्यम से दस्तावेजी शिकायत प्रस्तुत कर कार्यालय सहायक संचालक कृषि सह परियोजना अधिकारीWDC -PMKSY-2.0/1 डेहरीनाला विकासखंड साजा ,एवं सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी सह परियोजना अधिकारी WDC -PMKSY-2.0/2 विकासखंड साजा ,जिला -बेमेतरा (छग)द्वारा वित्तीय वर्ष 2022 -23 एवं 2023 -24 में कार्यालय कलेक्टर सह अध्यक्ष एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम (WDC -PMKSY-2.0) जिला जलग्रहण विकास इकाई ,जिला बेमेतरा ,(छ.ग.) से भारत सरकार ,ग्रामीण विकास मंत्रालय ,भूमि संसाधन विभाग एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त रूप से प्रदत्त परियोजना निधि में
माइक्रोवाटरशेड विकास कार्यों अमृत सरोवर निर्माण ,नाला चेकडेम निर्माण के लिए स्वीकृत 4 करोड़ 94 लाख 74 हजार की राशि से ग्राम स्तरीय जलग्रहण प्रबंधन समिति के माध्यम से कराए गए कार्यों अमृत सरोवर निर्माण, नाला चेकडेम निर्माण कार्य में 1 करोड़ 5 लाख 85 हजार 650 रुपए का भुगतान सोल्ड ( नंबर विहीन ) निजी जेसीबी वाहन के लिए किए जाने के संदेहास्पद भुगतान मामले में संभाग स्तरीय अंतर्विभागीय टीम गठित कर उपरोक्त स्वीकृत कार्यों के प्राक्कलन ,मांग पत्र , देयक पत्रक , बिल व्हाउचर्स ,स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन,तकनीकी मापदण्डों ,पूर्णता प्रमाण पत्र ,गुणवत्ता का परीक्षण कर व्यापक लोकहित में भौतिक सत्यापन कराए जाने ,जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के अनुरोध की अनदेखी किए जाने के मामले में जिम्मेदार /अधिकारी कर्मचारियों का चिन्हांकन कर अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने की मांग की गई थी।
पत्र में उल्लेख किया गया था कि
उपरोक्त स्वीकृत कार्य ग्राम स्तरीय जलग्रहण प्रबंधन समिति के माध्यम से कराए गए हैं। बात करें कार्यालय
सहायक संचालक कृषि सह परियोजना अधिकारी डेहरीनाला WDC -PMKSY-2.0/1विकासखंड साजा की तो इस परियोजना में सर्वाधिक कार्यों की स्वीकृति दी गई थी। इस परियोजना में वित्तीय वर्ष वित्तीय वर्ष 2022 -23 एवं 2023 -24 में कुल 4 करोड़ 74 हजार के कार्यों की स्वीकृति प्रदान की थी।जिसमें से 3 करोड़ 38 लाख 18 हजार की लागत से 16 नग नाला चेकडेम निर्माण ,एवं 62 लाख 56 हजार की लागत से 4 नग अमृत सरोवर निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। बात करें नाला चकडेम निर्माण की तो अध्यक्ष जलग्रहण समिति कमकाबाड़ा द्वारा ग्राम कमकाबाड़ा बुडेरा में 5 नग ,ग्राम बुधवारा समिति द्वारा बुधवारा में 3 नग,पथर्रीखुर्द समिति द्वारा ग्राम पथरीकला में 2 नग ,सहसपुर समिति द्वारा ग्राम सहसपुर में 2 नग ,तिरियाभाठ में 3 नग नाला चकेडेम तैयार किया गया है।इसी तरह अमृत सरोवर निर्माण ग्राम डेहरी ,तिरियाभाठ ,बुधवारा एवं ग्राम नवकेसा में तैयार किया गया है। महोदय बात करें परियोजना क्रमांक सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी सह परियोजना अधिकारी WDC -PMKSY-2.0/2 विकासखंड साजा ,जिला -बेमेतरा (छग) की तो इस परियोजना में कुल 35 .52 लाख की लागत से 2 नग अमृत सरोवर ग्राम समुंदवारा एवं ग्राम पंचायत ओड़िया के ग्राम बनियाडीह में तैयार किया गया है। वहीं 56.48 लाख की लागत से ग्राम पंचायत कन्हेरा के ग्राम कुर्रा में एवं ग्राम पंचायत अग्रि के ग्राम तेंदो में एक -एक नग नाला चकेडेम तैयार किया गया है। कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृत दोनों की परियोजना के उपरोक्त अधिकांश कार्यों में शासन के निर्धारित गाइडलाइंस ,तकनीकी मापदण्डों गुणवत्ता की अनदेखी कर संरचना तैयार कर शासकीय धनराशि का बंदरबाट किए जाने की सूचना मिल रही है ।
👉मानव श्रम की जगह चली SOLD JCB

अवलोकन से पता चलता है कि दोनों परियोजनाओं से जेसीबी कार्य के लिए कुल 1 करोड़ 5 लाख 85 हजार 650 रुपए का भुगतान किया गया है। मानव श्रम को प्राथमिकता देने की जगह उपयुक्त स्थल का चयन न कर अथवा मानव श्रम की अनदेखी कर जेसीबी मशीन का उपयोग कर इतनी बड़ी धनराशि व्यय की गई है। इतनी बड़ी धनराशि मशीनरी कार्य मे शायद ही किसी जिले में खर्च किए गए हों। यही नहीं बिलों के परीक्षण में गम्भीर खामियां पाई गई हैं।
परियोजना WDC -PMKSY-2.0/2 विकासखंड साजा द्वारा कुल 68 लाख 6 हजार 850 रुपए का भुगतान जेसीबी कार्य के लिए किया गया है। जिसमें से अध्यक्ष जल ग्रहण समिति कुरद ,ग्राम कुरूद के द्वारा 14 लाख 4 हजार 600 रुपए के बिल व्हाउचर्स में गिट्टी,रेत ,बोल्डर ,मुरुम ,ईंट ,छड़ सीमेंट के विक्रेता व सप्लायर
मां परमेश्वरी कंस्ट्रक्शन परपोड़ी ,तहसील -देवकर ,जिला -बेमेतरा (छग) के जारी बिल व्हाउचर्स में अधिकांश जेसीबी का विवरण सोल्ड दर्शाया गया है। 54 लाख 2 हजार 250 रुपए के बिल में भी अधिकांश वाहन का नंबर का उल्लेख नहीं है।सभी बिल उसी फर्म परमेश्वरी कंस्ट्रक्शन परपोड़ी ,तहसील -देवकर ,जिला -बेमेतरा के हैं।जबकि शासकीय कार्यों में सोल्ड (बिना नंबर )के निजी वाहन का शासकीय धनराशि की पारदर्शिता के लिए शासकीय कार्यों में उपयोग प्रतिबन्धित है। जिला कोषालय से ऐसे बिल पारित ही नहीं किए जाते । बावजूद इसके भ्रष्टाचार के उद्देश्यों को फलीभूत करने उक्त नियमों की अनदेखी की गई।
कमोबेश यही स्थिति कार्यालय
सहायक संचालक कृषि सह परियोजना अधिकारी डेहरीनाला WDC -PMKSY-2.0/1विकासखंड साजा से प्राप्त 37 लाख 78 हजार 800 रुपए के बिलों के अवलोकन में भी देखी जा सकती है।
👉मानक ,गुणवत्तानुरूप नहीं हुए कार्य !
फर्म देवांगन ट्रेडर्स ,शिवाय कंस्ट्रक्शन ,राजपूत ट्रेडर्स ,पटेल ट्रेडर्स ,साहू ट्रेडर्स एवं हार्डवेयर ,यू के.व्ही .ट्रेडर्स के अध्यक्ष जल ग्रहण समिति तिरियाभाठ,बुधवारा,नवकेसा ,के बिल में अधिकांश जेसीबी वाहन का नंबर अंकित नहीं है। विश्वत सूत्रों की मानें तो इतनी बड़ी राशि का जेसीबी कार्य के लिए भुगतान किया गया है ,उतने तो जेसीबी चले भी नहीं। लेकिन जिम्मेदार शाखाओं अफसरों की आंखों में धूल झोंककर भुगतान प्राप्त कर लिया। परियोजना कार्यालय
WDC -PMKSY-2.0/2 ,विकासखंड साजा का कृत्य सन्देहास्पद है। जेसीबी कार्य के लिए एक ही फर्म गिट्टी,रेत ,बोल्डर ,मुरुम ,ईंट ,छड़ सीमेंट के विक्रेता व सप्लायर
मां परमेश्वरी कंस्ट्रक्शन परपोड़ी ,तहसील -देवकर ,जिला -बेमेतरा (छग) का चयन
कहीं न कहीं परियोजना कार्यालय को संदेह के दायरे में लाता है । ऐसे ही दोनों ही परियोजनाओं में अमृत सरोवर निर्माण एवं नाला चेकडेम निर्माण से जुड़े अन्य सामाग्री जैसे सीमेंट ,रेत ,गिट्टी,पीचिंग पत्थर ,मेसेनरी पत्थर ,रबल पत्थर ,मेसेनरी कार्य हेतु पानी की ढुलाई,सीसी कार्य हेतु पानी की ढुलाई के व्यय हेतु बड़े फर्मों से अधिकांश कार्य कराकर उन्हें उपकृत किया गया है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो सूखी पीचिंग ,सीसी कार्य पीचिंग लाईन ,यू.सी.आर कोपिंग कार्य भी मानक एवं गुणवत्तानुरूप नहीं हुए हैं।
👉फर्मों से मिलीभगत कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया
बिलों के परीक्षण से स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है कि निविदा प्रक्रिया से बचने बड़ी चालाकी से टुकड़ों टुकड़ों में 50 हजार तक के नीचे का बिल व्हाउचर लगाया गया है। ताकि टेंडर प्रक्रिया न अपनाकर चहेते फर्मों से कार्य लिया जा सके।
👉कमिश्नर कार्यालय ने दस्तावेजी शिकायत की अनदेखी की …
आयुक्त दुर्ग संभाग को दस्तावेजी शिकायत कर 10 बिंदुओं में पत्र प्राप्ति के 30 दिवस के भीतर प्रकरण में अंतर्विभागीय सँयुक्त जांच समिति गठित कर उपरोक्त कार्यों का परीक्षण कर व्यापक लोकहित में भौतिक सत्यापन कराते हुए तय मियाद में जांच कराकर जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराने की अनदेखी से
प्रकरण में संबंधित कार्यालय एवं अधिकारी द्वारा संरक्षण प्रदान किया जाना परिलक्षित हो रहा था जो कि प्रशासनिक जवाबदेहिता के विपरीत अनुशासनहीन कार्य व्यवहार को परिलक्षित कर रहा था। मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र क्रमांक 7918 दिनांक 06/11/2025 को जिम्मदारों के विरुद्ध प्रकरण में अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की शिकायत उपरांत प्रतिलिपि मिलते ही कलेक्टर कार्यालय में हड़कंप मच गया।
👉मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत के बाद
जागे ,कलेक्टर कार्यालय ने की खानापूर्ति ,डिप्टी कलेक्टर ने उप संचालक कृषि को ही दे दिया जांच का जिम्मा ,पारदर्शिता पूर्ण होगी जांच या दे दी जाएगी क्लीनचिट !

जांच अधिकारी डिप्टी कलेक्टर ने कलेक्टर के वास्ते उप संचालक कृषि विभाग बेमेतरा को पत्र क्रमांक 3609 दिनांक 30/10/2025 के माध्यम से पत्र लिखकर समयसीमा में शामिल 4774 दिनांक 06.10.2025 में लंबित प्रकरण के संदर्भ में नियमानुसार जांच /निराकरण की कार्यवाही से आवेदक तथा अधोहस्ताक्षरकर्ता कार्यालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है।जिसमें आज पर्यन्त तक कार्यालय उप संचालक कृषि का पत्र शिकायतकर्ता को प्राप्त ही नहीं हुआ । माजरा स्पष्ट है अपने ही सहायक संचालक जितेंद्र ठाकुर जो परियोजना- 1 साजा के PIA हैं उनके विरुद्ध कैसे प्रतिवेदन सौपें। इस परियोजना में सर्वाधिक फंड और कार्य स्वीकृत हैं। 3 करोड़ 38 लाख 18 हजार की लागत से 16 नग चेकडेम निर्माण एवं 62 लाख 56 हजार की लागत से 4 नग अमृत सरोवर निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। जिसमें अनियमितता की सूचना मिल रही है। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की है । एक तरफ जहां कमिश्नर कार्यालय ने प्रकरण में संभाग स्तरीय जांच समिति गठित नहीं कि तो कलेक्टर ने उसी अधिकारी के उच्च अधिकारी को ही जांच का जिम्मा सौंप दायित्वों से इतिश्री कर ली है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस कार्य में जिला प्रशासन के अफसरों की कार्यशैली भूमिका संदिग्ध है,सम्बंधित PIA से दोस्ताना व्यवहार की वजह से अंतर्विभागीय जांच समिति गठित न कर जांच को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। बहरहाल अब पूरी निगाह मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हुई है जहां से एक्शन होते ही कमिश्नर से लेकर कलेक्टर निरुत्तर रह जाएंगे। जिम्मदारों पर देरसबेर कार्रवाई की गाज गिरेगी ही।
इन बिंदुओं पर कार्यों की जांच की की गई है मांग 👇
1 .क्रय किए गए सामाग्रियों के भुगतान प्रक्रिया की जांच करावें। ।
2 . भौतिक सत्यापन, सुनिश्चित किया जावे।
3 .क्रय किए गए सामाग्रियों के बिल व्हाउचर्स का परीक्षण किया जावे।
4 .समस्त कार्यों के फोटोग्राफ्स वीडियोग्राफी, पूर्णता प्रमाण पत्र का परीक्षण किया जावे।
5 .कार्यालय में संधारित केश बुक/ चेक पंजी, देयक व्हाउचर्स का परीक्षण किया जावे।
6 .फर्मों द्वारा प्रस्तुत बिल का परीक्षण किया जावे।
7.जिला स्तरीय क्रय समिति,भौतिक सत्यापन समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर का परीक्षण किया जावे।
8 . तकनीकी मापदण्डों , प्राक्कलन,माप पुस्तिका सहित गुणवत्ता का परीक्षण किया जावे।
9 .उक्त कार्यों के लिए प्राप्त मांग,स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन पत्र ,सक्षम अधिकारी की स्वीकृति आदेश का परीक्षण किया जावे।
10 .निविदा प्रकाशन की जांच किया जावे।
11 .कार्य में नियोजित किए गए मजदूरों के वास्तविक खाते में अंतरित की गई मजदूरी भुगतान की जांच सुनिश्चित की जावे।
