हसदेव एक्सप्रेस न्यूज रायपुर – दंतेवाड़ा । आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग भ्रष्टाचार की ढाल बन गया है। जी हां यह कहना बस्तर संभाग के जिला दक्षिण बस्तर -दंतेवाड़ा के कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के मामले में कतई गलत नहीं होगा। प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग के कार्यकाल में कार्यालय कलेक्टर जिला खनिज संस्थान न्यास से स्वीकृत 15 करोड़ रू. से अधिक के कार्यों की राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय जांच समिति गठित कर व्यापक लोकहित में जांच कराने एवं प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग का अन्यत्र स्थानांतरण करने के मामले में प्रमुख सचिव महोदय आदिम जाति विकास विभाग को की गई शिकायत के परिप्रेक्ष्य में अवर सचिव आदिम जाति विकास विभाग द्वारा 15 दिवस के भीतर प्रकरण की जांच कर प्रतिवेदन भेजने के आदेश के एक माह से अधिक समयावधि बीतने के बाद भी आज पर्यन्त प्रकरण में जांच नहीं करने से संरक्षण दिए जाने के आसार बढ़ गए हैं।
गौरतलब हो कि कार्यालय प्रमुख सचिव महोदय आदिम जाति विकास विभाग के यहाँ पत्र क्रमांक 7916 दिनांक 10.11.2025 के माध्यम से शिकायत प्रस्तुत कर
राजीव नाग प्रभारी सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला- दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के कार्यकाल में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में पत्र लेख दिनांक तक की स्थिति में कार्यालय कलेक्टर जिला खनिज संस्थान न्यास से स्वीकृत 15 करोड़ रू. से अधिक के कार्यों की राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय जांच समिति गठित कर व्यापक लोकहित में जांच कराने एवं प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग का अन्यत्र स्थानांतरण करने का अनुरोध किया गया था।
जिसके माध्यम से विस्तार से अवगत कराया गया था कि बस्तर संभाग के अंतर्गत् आने वाले आदिवासी बाहुल्य एवं नक्सल प्रभावित जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा (छ.ग.) में कार्यालय कलेक्टर, जिला खनिज संस्थान न्यास से विभिन्न विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि की बंदरबाट का जो सिलसिला अनवरत जारी है। कांग्रेस शासनकाल के दौरान डी.एम. एफ. से 5 सालों के भीतर 18 करोड़ रू. से अधिक के स्वीकृत कार्यों के लिए फर्जी टेण्डर का मामला उजागर होने के बाद जीरो टालरेंस की नीति पर कार्य कर रही सरकार ने दोषी तत्कालीन अधिकारियों एवं शाखा लिपिक के विरूद्ध एफ. आई.आर. दर्ज कराकर अगस्त माह में पुलिस के माध्यम से भ्रष्ट अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेजा था। इस कार्यवाही को जीरो टालरेंस की नीति पर कार्य कर रही सरकार के नौकरशाहों को सख्त संदेश के रूप में देखा गया था, लेकिन यह अत्यंत दुर्भायपूर्ण है कि उक्त कड़े संदेश के बावजूद बस्तर संभाग के खनिज बाहुल्य दंतेवाड़ा जिले में आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी पुराने ढर्रे पर ही कार्य कर डी.एम.एफ. की राशि का मनमाना उपयोग कर रहे हैं। 01 मई 2025 से कार्यालय सहायक आयुक्त, जिला- दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा (छ.ग.) में प्रभारी सहायक आयुक्त के रूप में मूलतः सहायक संचालक राजीव नाग को प्रभारी सहायक आयुक्त के रूप में कार्यालय आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने पदस्थ कर दिया है।
इतने वृहद जिले में प्रभारी सहायक आयुक्त की पदस्थापना के साथ ही विभाग की छवि को जनमानस के बीच साफ-सुथरी बनाए रखने की कड़ी चुनौती थी। जिसमें श्री राजीव नाग आज पर्यन्त असफल रहे हैं।
इनके कार्यकाल में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जुलाई 2025 तक की ही स्थिति में कार्यालय कलेक्टर जिला खनिज संस्थान न्यास से विभिन्न विकास कार्यों के लिए 15 करोड़ रू. से अधिक की स्वीकृति दी जा चुकी है जिनमें स्वीकृत विभिन्न कार्यों कन्या आश्रम 50 एवं 100 सीटर परचेली, बालक आश्रम 50 एवं 100 सीटर-बेंगलुर, गुडसे, जंगमपाल में नवनिर्माण कार्य, प्री.मै. बालक छात्रावास, प्री.मै. कन्या छात्रावास-बड़ेगुड़ा, रॉजे, गीदम, बारसुर, छिंदनार, छोटे तुमनार में कम्प्यूटर लैब की स्थापना कार्य के कार्य, बालक आश्रम-बारसुर पो.मै. कन्या छात्रावास-किरन्दुल, प्री.मै. कन्या छात्रावास कुआकोण्डा, प्री.मै. अजा. बालक छात्रावास बचेली, बालक आश्रम छोटे तुमनार, प्री.मै. अजजा. कन्या छात्रावास-कटेकल्याण में शौचालय मरम्मत कार्य के कार्य, प्री.मै. कन्या छात्रावास दंतेवाड़ा, प्री. मै. कन्या छात्रावास-जावंगा गीदम, कन्या परिसर पातररास, में स्वीकृत कार्य रिनोवेशन एवं टॉयलेट वर्क के कार्य शामिल हैं, इसी तरह 100 सीटर कन्या आश्रम-गाटम के भवन निर्माण कार्य के कार्य, स्वामी आत्मानंद इंगलिश माध्यम स्कूल-जावंगा, गीदम के छत के ऊपर कराए गए प्रोफाईल सीट कार्य के कार्य, जिले के 12वीं उत्तीर्ण छात्र/छात्राओं हेतु उच्च शिक्षा कौशल विकास पाठ्यक्रम एवं 09 अगस्त 2025 को विश्व आदिवासी दिवस पर स्वीकृत कार्य शामिल है। उपरोक्त स्वीकृत कार्यों के संदर्भ में मेरे द्वारा जनसूचना अधिकारी सह कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा (छ.ग.) के यहां सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत् मेरे द्वारा कार्यवार, पत्रवार पत्र क्र. 7811 से 7906 दिनांक 22.09.2025 के माध्यम से कुल 95 पृथक पृथक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर संबंधित कार्या के कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति युक्त प्राक्कलन, माप पुस्तिका, देयक व्हाउचर्स की व्यापक लोकहित में सत्यप्रतिलिपि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
उपरोक्त कार्यों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने हेतु सुलभता के लिए संबंधित कार्यालय द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में निहित प्रावधानों के तहत् कार्यालय कलेक्टर, जिला खनिज संस्थान न्यास, जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा (छ.ग.) के यहां से स्वीकृत संबंधित कार्यों के प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की छायाप्रति भी सभी आवेदन पत्रों के साथ संलग्न किया गया था ताकि शाखा प्रभारी निर्धारित समयावधि के भीतर वांछित जानकारी संकलित कर प्रदाय कर सकें। लेकिन पूर्ववत् निर्धारित मियाद 30 दिवस बीतने के उपरांत भी उक्त पत्र के परिपालन में कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा (छ.ग.) द्वारा प्रथम अपीलीय दिनांक 16.11.2025 की स्थिति में जानकारी प्रदाय नहीं की गई ।यही नहीं इनके द्वारा शासन के आदेश के बावजूद जांच प्रकरणों में जिला प्रशासन को अपेक्षित सहयोग प्रदान नहीं किया गया है चाहे वह मामला विभागीय छात्रावास आश्रमों में सामग्री पूर्ति मद की राशि में 54 लाख रू. की अनियमितता संबंधी प्रकरण में शासनादेश के बावजूद जांच की हो या फिर कार्यालय आयुक्त आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास, इन्द्रवती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर (छ.ग.) द्वारा दिनांक 18.07.2025 को कार्यालय कलेक्टर जिला- दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा को विभाग द्वारा संचालित छात्रावास आश्रमों में सामग्री खरीदी एवं निर्माण कार्यों में अनियमितता के संदर्भ में 3 दिवस के भीतर चाही गई जांच प्रतिवेदन में सहयोग की बात हो। दोनों ही प्रकरणों विभाग की अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की वजह से कार्यालय कलेक्टर द्वारा आज पर्यन्त जांच पूरी नहीं की जा सकी। शासन को प्रतिवेदन नहीं भेजा जा सका।
उपरोक्त प्रकरण मे तो बीजापुर, नाराणपुर, सुकमा जिले से भी जांच प्रतिवेदन दिनांक 15.10.2025 तक की स्थिति में कार्यालय आयुक्त आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास, इन्द्रवती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर (छ.ग.) को अप्राप्त था जो कि प्रशासनिक जवाबदेहिता के प्रति घोर उल्लंघन को प्रदर्शित करता है।
उपरोक्त्त कृत्य को देखते हुए पत्र लेख दिनांक से 30 दिवस के भीतर राजीव नाग प्रभारी सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला- दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के कार्यकाल में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में पत्र लेख दिनांक तक की स्थिति में कार्यालय कलेक्टर जिला खनिज संस्थान न्यास से स्वीकृत 15 करोड़ रू. से अधिक के कार्यों की राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय जांच समिति गठित कर व्यापक लोकहित में प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग का अन्यत्र स्थानांतरण करने का अनुरोध किया गया था। उक्त अनुरोध को संजीदगी से लेते हुए सरोजनी टोप्पो अवर सचिव छत्तीसगढ़ शासन आदिम जाति विकास विभाग नवा रायपुर ,अटल नगर ने दिनांक 25 -11-2025 को आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग इंद्रावती भवन,अटल नगर ,नवा रायपुर को 15 दिवस के भीतर शिकायत प्रकरण में उल्लेखित तथ्यों की जांच कराकर ,जांच प्रतिवेदन 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन आयुक्त कार्यालय आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में भी शिकायती प्रकरणों की जांच 9 दिन चले अढ़ाई कोस की तर्ज पर आगे बढ़ती है। आज पर्यन्त सम्बंधित प्रकरण में जांच तक शुरू नहीं की गई। शिकायतकर्ता को इसके संदर्भ में कोई पत्र व्यवहार प्राप्त नहीं हुआ। यह अनुशासनहीन कृत्य न केवल न केवल उच्च अधिकारी के आदेशों की अवहेलना है वरन प्रशासनिक जवाबदेहिता के प्रति भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहा।
👉 अपीलीय सुनवाई में भी दी आधी अधूरी जानकारी नियत पर उठे सवाल !

संबधित प्रकरणों की आयुक्त कार्यालय में पहले से चल रही अपीलीय प्रकरणों की सुनवाई में आदिवासी विकास विभाग के परिवीक्षाधीन अफसर के कुटिलतापूर्वक आधी अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई। महज चंद कार्यों की जानकारी उपलब्ध करा शेष सभी कार्य का कार्यादेश जारी नहीं हो पाने की बात कह दी। जो कि यह भी इनके अक्षमता ,लचर नेतृत्व का परिचायक है। कई कार्यों के वर्क आर्डर जारी होने ,टेंडर लगे होने के बाद भी शाखा प्रभारी के जरिए कुटिलतापूर्वक वास्तविकता छुपाई गई।
👉इन कार्यों की भी जांच की दरकार



आदिवासी विकास विभाग से सूचना के अधिकार के तहत प्रदत्त जानकारी अनुसार 6 आश्रम छात्रावासों में कम्प्यूटर लैब स्थापना का कार्य शार्ट टेंडर जारी कर भाव पत्र आमंत्रित कर की गई है। जिसमें
प्री.मै.बा.छात्रा. (बालक आश्रम) रोंजे,प्री.मै. कन्या छात्रावास, जावंगा गीदम,प्री.मै. कन्या छात्रावास बारसूर,प्री.मै. बालक छात्रावास छिन्दनार,प्री.मै. कन्या छात्रावास छोटेतुमनार,प्री.मै. बालक छात्रावास बड़ेगुडरा शामिल है। जिन फर्मों से उपरोक्त कार्य कराया गया है उसके
एल्मुमिनियम सेक्शन वर्क (सामग्री सहित)में भी विश्वस्त सूत्रों से गुणवत्ता ,एवं निर्धारित दर की शिकायत मिल रही है। कम्प्यूटर ,प्रिंटर एवं यूपीएस के भौतिक सत्यापन में तादाद एवं संख्या में छेड़छाड़ /कांटछांट की गई है। भौतिक सत्यापन पपत्र में मेसर्स ही उल्लेख है। फर्म का नाम नहीं है। लिहाजा छात्रावास/आश्रमों में प्रदाय किए गए 48 नग कम्प्यूटर ,48 नग यूपीएस, 6 नग प्रिंटर ,6 नग डेस्क, 6 नग कम्प्यूटर चेयर ,12 नग स्टॉफ टेबल ,60 नग रिवालविंग चेयर 6 नग रूम कूलर की राज्य स्तर की अंतर्विभागीय समिति से पुनः भौतिक सत्यापन ,गुणवत्ता व निर्धारित दर के परीक्षण की दरकार है। यही नहीं अनुसूचित जाति बालक छात्रावास बचेली ,बालक आश्रम बारसूर ,प्री. मै.कन्या छात्रावास कटेकल्याण ,कन्या छात्रावास जावंगा (गीदम), बालक आश्रम छोटे तुमनार ,प्री.मै.कन्या छात्रावास कुआकोण्डा , पो.मै.क.छा.किरन्दुल में शौचालय मरम्मत कार्य एवं स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा गीदम के छत के ऊपर प्रोफाइल शीट के निर्माण कार्य में भी स्टीमेट अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं किए जाने की विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिल रही। विभाग ने इसके देयक व्हाउचर समेत अन्य दस्तावेज भी दबा दी ।
👉 फर्जी टेंडर में अफसर नपे इस फर्म पर नहीं गिरी गाज

जिले में संचालित 100 सीटर कन्या आश्रम गाटम के भवन निर्माण का कार्य फर्जी टेंडर प्रक्रिया से जुड़े प्रकरण में शामिल कार्य होने की वजह से निरस्त तो कर दिया गया लेकिन सहायक आयुक्त ने फर्म के विरुद्ध आज पर्यन्त एफआईआर दर्ज नहीं कराई। उपरोक्त कार्य की कार्यादेश 27.03.2025 को तत्कालीन कलेक्टर ने दी थी। 2 करोड़ 42 लाख 15 हजार 744 रुपए की लागत से स्वीकृत यह कार्य 14.99 प्रतिशत अधिक एसओआर दर पर स्वीकृत किया गया था। जिसे वर्षा ऋतु समेत 10 माह में पूरा करना था। टेंडर फर्जीवाड़ा के मामले में जिम्मेदार अफसरों ने जरूर जेल की हवा खाई पर फर्मों पर आंच नहीं आई जिससे आज भी सवाल उठ रहे। यही नहीं विश्वस्त सूत्रों के अनुसार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय कुआकोण्डा के छात्रावास के प्रथम तल में 50 लाख से अधिक की लागत से स्तरहीन भवन निर्माण कार्य कराया गया है। बिना निरीक्षण,गुणवत्ता परीक्षण भौतिक सत्यापन किए फर्म को भुगतान कर दिया गया। स्तरहीन इस भवन में बच्चों ने रहने से इंकार कर दिया है। कुल मिलाकर जिले के समस्त आश्रम छात्रावासों में 2 साल के भीतर हुए निर्माण कार्य के उच्च स्तरीय जांच की दरकार है।
