KORBA : ये कैसी विडंबना , जिले में सवा सौ करोड़ से अधिक का साढ़े 5 लाख क्विंटल से अधिक का धान जाम ,मार्कफेड पड़ोसी जिलों पर मेहरबान , कोरिया, सरगुजा, बेमेतरा ,जीपीएम जिले के सवा 8 लाख क्विंटल धान के कस्टम मिलिंग का मिलर्स को जारी कर दिया DO ,शार्टेज का प्रावधान नहीं होने से समितियां परेशान …..

0 लक्ष्य 47 फीसदी दूर ,13 खरीदी दिवस में लक्ष्य हासिल करने खरीदने होंगे प्रतिदिन 1 लाख 13 हजार क्विंटल से अधिक धान, अभी तक 24 हजार से अधिक किसान नहीं बेच सके हैं धान …..

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा । धान खरीदी अभियान में इस साल आकांक्षी जिला कोरबा जहाँ लगभग 2 माह की मियाद समाप्त होने के उपरांत धान खरीदी के लक्ष्य का करीब आधा लक्ष्य ही हासिल कर सका है वहीं समर्थन मूल्य पर खरीदकर उपार्जन केंद्रों में रखे गए 5 लाख 54 हजार 816 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 127 करोड़ 60 लाख 76 हजार 800 रुपए के धान के शत प्रतिशत उठाव से पहले राइस मिलरों को 4 पड़ोसी जिलों कोरिया, सरगुजा, बेमेतरा ,जीपीएम जिले में खरीदे गए सवा 8 लाख क्विंटल धान के कस्टम मिलिंग के लिए ऑनलाइन डीओ जारी कर दिया है।लिहाजा कोरबा जिले के धान के उठाव कस्टम मिलिंग के लिए डीओ जारी होने के बाद भी राइस मिलर्स अधिक परिवहन दर मिलने की वजह से अन्य 4 जिलों के धान के उठाव को प्राथमिकता दे रहे। मार्कफेड की इस अदूरदर्शिता ने 32 उपार्जन केंद्रों के कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है। उठाव में विलंब होने की स्थिति में इन उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित होने के आसार हैं।

यहाँ बताना होगा कि चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले को 31 लाख क्विंटल 19 हजार धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया है।तकरीबन 52 हजार पंजीकृत किसानों के जरिए 41 सहकारी समितियों के 65 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से इस लक्ष्य को हासिल करना है। जिसकी पूर्ति में धान खरीदी के लगभग 2 माह उपरांत 10 जनवरी की स्थिति में जिले में 27 हजार 216 किसानों के माध्यम से 16 लाख 45 हजार 565.60 क्विंटल 2300 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की दर से 389 करोड़ 83 लाख 44 हजार 906 रुपए के धान की आवक हो चुकी है।

जिसमें से 120 से अधिक पंजीकृत राइस मिलरों के माध्यम से 10 जनवरी तक की स्थिति में 10 लाख 89 हजार 336 क्विंटल धान का उठाव हुआ है। जो कुल धान के उठाव का 66.27 % हिस्सा है । अभी भी उपार्जन केंद्रों में 5 लाख 54 हजार 816 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 127 करोड़ 60 लाख 76 हजार 800 रुपए का धान जाम है। हालांकि मार्कफेड जिले में खरीदे गए धान के कस्टम मिलिंग के लिए शतप्रतिशत डीओ जारी कर भले अपनी पीठ थपथपा रही है। वहीं दूसरी ओर जिले में अभी खरीदे गए धान का उठाव 70 फीसदी भी नहीं हुआ है मार्कफेड को
130 से 200 किलोमीटर दूर कोरिया, सरगुजा ,बेमेतरा , जीपीएम जिले के धान का कोरबा के राइस मिलरों से उठाव की चिंता सताने लगी। ऑनलाइन रिक्वेस्ट के आधार पर मुख्यालय स्तर से ऑनलाइन मॉड्यूल में डीओ जारी होने की बात सामने आ रही है। इन जिलों में खरीदे गए 8 लाख 26 हजार 150
क्विंटल धान के कस्टम मिलिंग के लिए डीओ जारी किया गया है। जिलेवार बोलें तो कोरिया जिले के लिए 3 लाख 49 हजार 940 क्विंटल ,सरगुजा के लिए 2 लाख 57 हजार 210 क्विंटल, बेमेतरा जिले के लिए 1 लाख 19 हजार 260 क्विंटल एवं जीपीएम जिले के लिए 99 हजार 840 क्विंटल धान का डीओ जारी किया गया है।
जानकारी अनुसार राइस मिलरों को कस्टम मिलिंग के लिए जारी डीओ के अनुपात में उपार्जन केंद्रों से 10 दिनों के भीतर धान का उठाव करने का प्रावधान है। तय मियाद के भीतर उठाव नहीं कर पाने पर पेनाल्टी का प्रावधान है। हालांकि समितियों से समय पर धान का उठाव नहीं करने से धान के वजन में सूखकर कमी (शार्टेज ) आने की भरपाई के रूप में पेनाल्टी की राशि समितियों को न देकर शासन को मिलने को लेकर अर्से से सवाल उठते रहे हैं। यही नहीं समिति के विश्वस्त कर्मचारियों के अनुसार दूरी के आधार पर कस्टम मिलिंग हेतु परिवहन दर मिलने की वजह राइस मिलर्स अधिक दूरी के लिए काटे गए डीओ के धान के उठाव को प्राथमिकता देते हैं। ताकि अधिक परिवहन दर मिल सके। यही वजह है जिले के 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में 5 लाख 54 हजार 816 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 127 करोड़ 60 लाख 76 हजार 800 रुपए का धान जाम है।
बावजूद अन्य 4 जिले के धान के उठाव को प्राथमिकता दे रहे।

👉32 उपार्जन केंद्रों में लिमिट से अधिक धान जाम,8 में सबसे ज्यादा बिगड़े हालत, जल्द नहीं हुआ उठाव तो खरीदी प्रभावित होने के आसार 👇

वैसे तो लगभग 50 फीसदी 32 उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट 7200 क्विंटल से अधिक धान जाम हैं ,लेकिन इनमें से 8 उपार्जन केंद्र जहाँ लिमिट से दोगुना अर्थात 14 हजार क्विंटल से धान जाम हैं समितियाँ सबसे ज्यादा परेशान हैं। जहां जल्द धान का उठाव नहीं होने पर खरीदी व्यवस्था प्रभावित होने के आसार हैं। इन उपार्जन केंद्रों में हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा ), सिरमिना , भैसमा, नवापारा,बेहरचुवां , अखरापाली ,कोरबी (पोंडी उपरोड़ा) एवं बरपाली (बरपाली) शामिल हैं। हाथी प्रभावित केंद्र बरपाली (कोरबा )में समिति के कर्मचारी जान हथेली पर लेकर धान की रखवाली कर रहे।

वहीं 24 उपार्जन केंद्रों में 7200 से 13 हजार क्विंटल के बीच धान उठाव का इंतजार कर रहे। इनमें उतरदा,बोईदा,कनकी, करतला ,केरवाद्वारी , कुल्हरिया , कोथारी ,चैतमा ,चिकनीपाली,लबेद,जटगा, जवाली,तुमान ,निरधि, पसान ,पोंडी,
फरसवानी,बिंझरा,भिलाईबाजार,
रामपुर, श्यांग, सुखरीकला, एवं सोहागपुर शामिल हैं।

👉समितियों पर चौतरफा मार

धान का त्वरित गति से उठाव नहीं होने से समितियों को चौतरफा मार झेलनी पड़ रही। समितियों के मांग के बाद भी शासन उन्हें खरीदे गए धान के वजन में बढ़ती धूप की वजह से कमी आने पर 1 प्रतिशत तक भी सूखत (शार्टेज) का लाभ नहीं देती। दूसरी ओर किसानों से इसके एवज में 100 ग्राम तक भी अतिरिक्त धान लेने का प्रावधान नहीं। वहीं तीसरी बात समय पर धान का उठाव नहीं होने से धान के शार्टेज होने पर समितियों को अपने कमीशन से भरपाई करना पड़ता है।नहीं लौटाने पर वैद्यानिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर समितियों के लिए हर तरह से आफत ही आफत है। इस साल सरगुजा संभाग में एक प्रबंधक ने आत्महत्या कर ली है।

वर्जन

ऑनलाइन रिकवेस्ट के आधार पर कट रहा डीओ, कलेक्टर सर को वस्तुस्थिति से अवगत करा चुके हैं ,अब जिले को ही देंगे प्राथमिकता

जिले के मिलरों का मिलिंग क्षमता 40 लाख क्विंटल से अधिक की है जिले में उपार्जन तकरीबन 30 लाख क्विंटल धान की है। शेष अन्य जिलों के लिए डीओ जारी होता है।
मुख्यालय स्तर से ऑनलाइन रिकवेस्ट के आधार पर मिलरों का मिलिंग क्षमता के अनुपात में कोरिया ,सरगुजा,बेमेतरा एवं जीपीएम जिले में खरीदे गए धान के कस्टम मिलिंग के लिए जिले के राइस मिलरों का डीओ कटा है। कलेक्टर सर को वस्तुस्थिति से अवगत करा चुके हैं ,अब उठाव के लिए जिले को प्राथमिकता देंगे।

ऋतुराज देवांगन ,डीएमओ कोरबा