CG : एक ही गोत्र में शादी करने पर मिली सामाजिक बहिष्कार की सजा,जीवन बनाया नारकीय ,महिला आयोग ने पति पत्नी को दिलाया सामाजिक सम्मान,पैसे कराए वापस ,जानें पूरा मामला ….

रायपुर । छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से सामने आया एक मामला सामाजिक रूढ़ियों और कुरीतियों की कठोर सच्चाई को उजागर करता है। यहां एक आदिवासी महिला और उसके पति को केवल इसलिए सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा क्योंकि दोनों ने एक ही गोत्र में विवाह किया था। समाज ने इस विवाह को मान्यता देने से इनकार करते हुए दंपती पर अलग रहने का दबाव बनाया, गांव से निकालने की धमकी दी और अंततः सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पीड़ित महिला ने बताया कि बीते दो वर्षों तक उन्हें अपमान, डर और तिरस्कार के बीच जीवन जीना पड़ा। बहिष्कार के बाद गांव के लोगों ने उनसे बातचीत पूरी तरह बंद कर दी। उन्हें त्योहारों, सामाजिक कार्यक्रमों और सामूहिक आयोजनों में शामिल होने से रोक दिया गया।

इतना ही नहीं, उनके बच्चों को स्कूल में ताने सुनने पड़े और दैनिक जरूरतों के लिए राशन लाने तक में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। गांव में रहते हुए भी दोनों पति-पत्नी को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया। महिला ने बताया कि समाज के लोगों ने साफ शब्दों में कह दिया था कि या तो वे अलग-अलग रहें या फिर गांव छोड़कर चले जाएं। इस मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना से परेशान होकर दंपती ने अंततः राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामला आयोग के संज्ञान में आने के बाद उन्हें राहत मिली। राज्य महिला आयोग के निर्देश पर हुई सुनवाई के दौरान अनावेदकगणों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आवेदिका को 60 हजार रुपये की राशि लौटाई।

वहीं, पति ने भी पत्नी के साथ रहने की सहमति दी। सभी पक्षों ने यह लिखित आश्वासन दिया कि भविष्य में विवाह में किसी प्रकार की बाधा नहीं डाली जाएगी और सामाजिक बहिष्कार जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि इन निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो पीड़िता को एफआईआर दर्ज कराने का पूरा अधिकार रहेगा। इसी सुनवाई के दौरान राज्य महिला आयोग के समक्ष एक अन्य गंभीर मामला भी सामने आया। इसमें एक महिला ने अपने कार्यस्थल पर प्रताड़ना, व्हाट्सएप संदेशों के जरिए निजी जीवन में दखल और कार्यालय समय के बाद जबरन बैठने के दबाव की शिकायत दर्ज कराई।

आयोग ने इस प्रकरण में कलेक्टर कोंडागांव से जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति तलब की है और दोनों पक्षों को अगली सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। आवेदिका के अनुसार, आरोपित द्वारा व्हाट्सएप पर कारण बताओ नोटिस भेजकर और लगातार संदेशों के जरिए मानसिक दबाव बनाया गया। संलग्न चैट रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने निजी जीवन में हस्तक्षेप की पुष्टि होने पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। इसके अलावा, एक अन्य मामले में शासकीय अस्पताल भाटापारा में पदस्थ नर्स द्वारा ड्यूटी हैंडओवर के दौरान दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

आयोग ने इस मामले में आरोपित को कड़ी समझाइश दी, जिसके बाद उसने भविष्य में किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या शिकायत से दूर रहने की लिखित स्वीकृति दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि पुनरावृत्ति होने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और फिलहाल इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। तीसरे मामले में दहेज प्रताड़ना की शिकायत पर आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सहमति से समाधान निकाला। सुलहनामा के तहत तलाक के एवज में आवेदिका को एकमुश्त 15 लाख रुपये भरण-पोषण देने पर सहमति बनी। आयोग ने इस सहमति को दर्ज करते हुए मामले के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।