कोरबा। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ईश्वर अरमेक्सन ने कड़े शब्दों में कहा है कि कोरबा जिला, जो देश की ऊर्जा रीढ़ कहलाने वाले कोयला उत्पादन क्षेत्रों में अग्रणी है, आज स्वयं गंभीर जनसमस्याओं का शिकार बन चुका है। एसईसीएल की दीपका, गेवरा एवं कुसमुंडा जैसी विशाल खदान परियोजनाओं से जहाँ राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों, श्रमिकों, किसानों और आदिवासी समाज को लगातार उपेक्षा, शोषण और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि दीपका क्षेत्र में सड़क जाम, बढ़ती दुर्घटनाएँ, कोयला परिवहन से प्रदूषण, ठेका कंपनियों द्वारा श्रमिकों का शोषण, पर्यावरणीय क्षरण, धार्मिक स्थलों पर अवैध कब्जा तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित किया जाना अब असहनीय स्थिति में पहुँच चुका है।
विशेष रूप से सिरकी मोड़ (दादा हीरा सिंह मरकाम चौक) पर भारी वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग और कोयला परिवहन के कारण रोजाना आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, मरीजों और कामगारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ईश्वर अरमेक्सन ने ग्राम झाबर स्थित पवित्र बूढ़ादेव स्थल पर अवैध कब्जे को गंभीर सामाजिक और धार्मिक मुद्दा बताते हुए कहा कि यह आदिवासी आस्था और संस्कृति पर सीधा हमला है। साथ ही जर्जर बूढ़ादेव भवन के शीघ्र पुनर्निर्माण, खनन प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहाली, तथा ठेका कंपनियों में कम से कम 80 प्रतिशत स्थानीय रोजगार सुनिश्चित किए जाने की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि गेवरा–पेंड्रा रेल कॉरिडोर के निर्माण से ग्राम देवगांव के किसानों की खेती योग्य भूमि दो भागों में विभाजित हो गई है। अंडर ब्रिज या कृषि मार्ग का निर्माण न होने के कारण किसानों को अपने ही खेत तक पहुँचने के लिए लगभग 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। यह किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार है और शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
प्रदेश प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कोरबा जिला संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, इसके बावजूद निर्वाचित आदिवासी सरपंचों के खिलाफ बिना निष्पक्ष प्राथमिक जांच के दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है, जो संविधान, पेसा अधिनियम और आदिवासी स्वशासन की भावना के पूरी तरह विरुद्ध है।
अंत में श्री अरमेक्सन ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन द्वारा इन गंभीर जनसमस्याओं पर शीघ्र ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी दिनांक 19 जनवरी 2026, प्रातः 10 बजे से
सिरकी मोड़ (दादा हीरा सिंह मरकाम चौक) पर एकदिवसीय चक्काजाम एवं धरना-प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा, किंतु इसकी नैतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
