CG : DMF फंड के लूट की मिली खुली छूट ! 10 हजार में मिलने वाले कम्प्यूटर टेबल की ₹ 19778 में खरीदी , जिम्मेदार मौन, जानें इस सहायक आयुक्त कार्यालय का कारनामा ….

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कांकेर। कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग कांकेर एक बार फिर चर्चे में है , विभाग ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF ) से मिले फंड का ऐसा बंदरबाट किया है कि 140 आश्रम -छात्रावासों के लिए 8 से 10 हजार रुपए में गुणवत्तायुक्त मिलने वाले कम्प्यूटर टेबल की खरीदी 19 हजार 978 रुपए लगभग दोगुने दर पर खरीद लाखों रुपए का अपव्यय कर दिया। मितव्ययिता के अभाव के साथ साथ विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने जिला स्तरीय क्रय समिति से कोटेशन ,स्टीमेट में अनुमोदन लिए बगैर की नियमों के प्रतिकूल क्रय की प्रक्रिया पूरी कर डाली। सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों से विभाग के वित्तीय बंदरबाट ,नियमों की अनदेखी का मामला उजागर हुआ है। मामले में शासन से त्वरित कार्रवाई की दरकार है।

यहाँ बताना होगा कि कार्यालय कलेक्टर जिला खनिज संस्थान न्यास कांकेर द्वारा कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कांकेर को वित्तीय वर्ष 2024 -25 में 140 विभागीय प्री./पो.मै. छात्रावासों एवं प्रयास आवासीय विद्यालय के लिए कम्प्यूटर एवं फर्नीचर सामाग्री प्रदाय करने 1 करोड़ 10 लाख 7 हजार 416 रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। जिसमें विभाग ने 140 विभागीय प्री./पो.मै. छात्रावासों एवं प्रयास आवासीय विद्यालय के लिए कम्प्यूटर टेबल सीटर ,चेयर ,प्रिंटर -लेजर प्रिंटर -HP/Canon एवं कम्प्यूटर सिस्टम विद यूपीएस सीपीयू-मॉनिटर स्क्रीन 19 की-बोर्ड एंड मॉउस की खरीदी की जानी थी। उक्त सामाग्री जिला स्तरीय क्रय समिति के माध्यम से की गई है।उक्त बजट में क्रय किए गए सामाग्रियों के दर ,गुणवत्ता ,क्रय प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिल रही थी। जिसे देखते हुए सूचना के अधिकार के तहत क्रय प्रक्रिया,कार्यादेश ,आदि जानकारी चाही गई थी। विभाग द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्रदत्त जानकारी में डीएमएफ की राशि का बंदरबाट किया जाना स्वतः प्रदर्शित हो रहा। जिला स्तरीय क्रय समिति की 19 नवंबर 2024 को जारी कार्यवाही विवरण में 140 विभागीय प्री./पो.मै. छात्रावासों एवं प्रयास आवासीय विद्यालय के लिए क्रय किए गए कम्यूटर टेबल (1 सीटर )की अनुमानित लागत 19 हजार 978 रुपए की दर से कुल 140 नग जेम पोर्टल व ई मार्केट प्लेस के माध्यम से क्रय करने कुल 27 लाख 96 हजार 920 रुपए प्रस्तावित किया गया था। विभाग द्वारा प्रदत्त कोटेशन की सत्यप्रतिलिपि के अवलोकन से उक्त सामाग्री फर्म छत्तीसगढ़ सेल्स एंड सप्लायर रायपुर से क्रय की गई है।

👉तो आधी दर पर मिल जाती कम्प्यूटर टेबल

विभाग ने एक कम्प्यूटर टेबल (1 सीटर)के लिए जितनी राशि प्रस्तावित कर व्यय की है उससे आधी राशि 10 हजार रुपए तक में मार्केट में स्टैंडर्ड क्वालिटी का कम्प्यूटर टेबल (1 सीटर) उपलब्ध है । इस तरह देखा जाए तो विभाग ने लगभग दोगुने दर से कम्प्यूटर टेबल (1 सीटर )क्रय कर डीएमएफ के लगभग 14 लाख रुपए का अपव्यय किया है।अब इसमें सम्बंधित अफसरों का फर्म से क्या निहित स्वार्थ रहता है यह तो जांच पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा लेकिन फिलहाल डीएमएफ की राशि का मितव्ययिता पूर्ण उपयोग न किए जाने से कई तरह के सवाल उठ रहे। 46 हजार 426 रुपए प्रति नग की दर से कुल 64 लाख 99 हजार 640 रुपए की दर से 140 नग क्रय किए गए कम्प्यूटर सिस्टम की भी चर्चा है। इसकी भी गुणवत्ता मानकों के परीक्षण की दरकार है ,ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

👉कोटेशन में अनुमोदन नहीं ,गुणवत्ता ,मानकों के परीक्षण के लिए एजेंसी तय नहीं

न केवल बाजार दर से दोगुने दर में कम्प्यूर टेबल की खरीदी सुर्खियां बनी हुई है वरन क्रय प्रक्रियाओं का भी विधिवत पालन नहीं किया गया है।जिला स्तरीय क्रय समिति में जिला पंचायत सीईओ हरेश मण्डावी जिला स्तरीय क्रय समिति के अध्यक्ष (कलेक्टर प्रतिनिधि)के नेतृत्व में गठित समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग सुश्री जया मनु ,महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र हिमालय सेठिया एवं जिला कोषालय अधिकारी रामानंद कुंजाम सदस्य के रूप में शामिल किए गए थे। लेकिन इसे गम्भीर चूक कहें या सोंची समझी चालाकी की जिला स्तरीय क्रय समिति के सदस्यों
का कोटेशन ,स्टीमेट में अनुमोदन नहीं लिया गया । यही नहीं क्रय किए गए सामाग्रियों के गुणवत्ता /मानकों के परीक्षण के लिए एजेंसी तक तय नहीं किया गया। कार्यवाही विवरण में इसका उल्लेख तक नहीं है,जो क्रय प्रक्रिया को सन्देहास्पद बनाती है।

👉दंतेवाड़ा की जांच आयुक्त कार्यालय ने आज पर्यन्त लटकाई ,अफसरों फर्मों का बढ़ा मनोबल ,क्या कांकेर की सुध लेंगे प्रमुख सचिव

आदिवासी विकास विभाग में शासकीय फंड विशेषकर डीएमएफ के फंड के अपव्यय ,
मितव्ययिता के अभाव ,अनियमितता की यह पहली शिकायत नहीं है ,इससे पूर्व भी बस्तर संभाग में आदिवासी विकास विभाग घोटालों में सुर्खियों में रहा है। दंतेवाड़ा में 18 करोड़ के फर्जी टेंडर मामले में 2 पूर्व सहायक आयुक्तों,लिपिकों को जेल तक की हवा खानी पड़ी थी। हाल ही में प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग के कार्यकाल में चालू वित्तीय वर्ष 2025 -26 में जिला खनिज न्यास से स्वीकृत 15 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों में अनियमितता की प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग से लिखित शिकायत कर सहायक आयुक्त को तत्काल हटाए जाने की अनुरोध की गई थी। जिसमें अवर सचिव आदिम जाति विकास विभाग ने 25 नवंबर 2025 को आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास इंद्रावती भवन ,नवा रायपुर को पत्र लिखकर प्रकरण की उल्लेखित तथ्यों के आधार पर 15 दिवस के भीतर जांच कराकर प्रतिवेदन मांगा था। लेकिन अकर्मण्य आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा प्रकरण के संदर्भ में आज पर्यन्त जांच तक नहीं की जा सकी। कुर्सी का वजन इतना बढ़ा दिया गया कि वे उच्चाधिकारी के आदेश और कर्व्यनिर्वहन के लिए एक कलम तक नहीं चला सके। संबधित अफसर व डीएमएफ फंड की लूट मचाने वाले फर्मों का मनोबल बढ़ गया।

यहाँ भी विभागीय आश्रम -छात्रावासों में बाजार दर से दोगुने दर में सामाग्री क्रय कर प्रदाय की गई है। कई छात्रावासों में सामाग्री पहुंची ही नहीं,शौचालय व आश्रम छात्रावास के मरम्मत कार्य के नाम पर भी खानापूर्ति की गई है। ठेकेदार अफसरों की जुगलबंदी से डीएमएफ की राशि का जमकर बंदरबांट किया गया है।
ऐसे में आयुक्त कार्यालय से जांच की उम्मीद तो बेमानी है।प्रमुख सचिव महोदय जो निष्पक्षता ,बेबाक कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं उनसे ही जांच की कुछ आश बंधी है। अब देखना होगा विभाग स्वतः इसका संज्ञान लेता है या फिर लिखित शिकायत की इंतजार की जाएगी।