रायपुर | विशेष संवाददाता भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की खाली हो रही सीट के लिए लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा कर दी है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी ने एक बार फिर अपने पुराने और जमीनी कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है। लक्ष्मी वर्मा के चयन को आगामी चुनावों के मद्देनजर ‘महिला सशक्तिकरण’ और ‘पिछड़ा वर्ग’ समीकरणों को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
👉संगठन में 30 वर्षों का अनुभव और बेदाग छवि

लक्ष्मी वर्मा छत्तीसगढ़ की राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं। वे पिछले तीन दशकों से संगठन के विभिन्न पदों पर सक्रिय रही हैं। रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी की पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उनकी पहचान एक प्रखर वक्ता और कुशल रणनीतिकार की रही है। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
👉जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का मास्टरस्ट्रोक
लक्ष्मी वर्मा का चयन कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व: वे ओबीसी वर्ग के प्रभावशाली कुर्मी समाज से आती हैं।
👉संगठन को संदेश:

एक सक्रिय कार्यकर्ता को सीधे उच्च सदन (राज्यसभा) भेजकर बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया है कि मेहनत का फल मिलता है।
👉पैनल की दौड़:
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली भेजे गए पैनल में नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी जैसे कद्दावर नाम शामिल थे, लेकिन ‘मातृशक्ति’ को प्राथमिकता देते हुए हाईकमान ने लक्ष्मी वर्मा के नाम पर अंतिम मुहर लगाई।
“यह केवल मेरा चयन नहीं, बल्कि प्रदेश की करोड़ों महिलाओं और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान है। केंद्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी ईमानदारी से निभाऊंगी।”
— लक्ष्मी वर्मा, भाजपा प्रत्याशी
👉विधानसभा में संख्या बल से जीत तय
छत्तीसगढ़ विधानसभा की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लक्ष्मी वर्मा की जीत महज एक औपचारिकता है। बीजेपी के पास पर्याप्त बहुमत है, जिससे उनका राज्यसभा पहुंचना सुनिश्चित माना जा रहा है। उनके सदन में जाने से केंद्र में छत्तीसगढ़ की महिला मुद्दों और विकास कार्यों को नई धार मिलेगी।
