KORBA : 3.34 करोड़ की 8 हजार क्विंटल अमानक चावल खपाकर सरकार की पीडीएस व्यवस्था की किरकिरी करने वाले इन 15 राइस मिलरों को गुणवत्ता युक्त लॉट जमा करने का फरमान ,लिस्ट में कोरबा जिले के कटघोरा डिवीजन के चर्चित 7 राइस मिलरों के भी नाम ….

कोरबा। कस्टम मिलिंग के दौरान 3 करोड़ 34 लाख रुपए की तथाकथित चावल खरीदी में खरीदे गए 8 हजार 153 क्विंटल अमानक चावल पीडीएस में खपाए जाने का खुलासा हुआ है। विधानसभा में मचे हंगामे के बाद जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की गई। अमानक चावल खपाकर सरकार की पीडीएस व्यवस्था की किरकिरी करने वाले 15 राइस मिलरों के नाम उजागर हो चुके हैं। जिन्हें पुनः गुणवत्ता युक्त लॉट जमा करने विभाग ने नोटिस थमाया है,इन दागी राइस मिलरों पर अब विभाग की पैनी नजर रहेगी।

चूंकि छत्तीसगढ़ में धान की अच्छी कीमत मिल रही थी, इसलिए छत्तीसगढ़ से बाहर का धान यहां खपाया गया और करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए गए, मगर असली खेल तो चावल में हुआ जहां राइस मिलर्स से मिलीभगत करके चावल के नाम पर ब्रोकन राइस (कनकी) खपाया जाता रहा। फिर कनकी में चावल मिलाकर गरीबों को वितरण के लिए भंडारण कराया गया।
इसी तरह का खेल कोरबा जिले में उजागर होने के बाद अब सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है। धान की खरीदी और फिर राइस मिलर्स से उसकी कस्टम मिलिंग (कुटाई) कराके वापसी में अधिकतम 25% तक कनकी यानी ब्रोकन राइस की मात्रा सरकारी तौर पर स्वीकार होती है। मगर यहां पदस्थ रहे नान अफसर प्रमोद जांगड़े ने ऐसा चक्कर चलाया कि किसी को घोटाले का अहसास तक नहीं हुआ।

कस्टम मिलिंग के बाद चावल नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के गोदाम में जमा किया जाता है। किसी भी राइस मिलर के द्वारा चावल लेकर गोदाम पहुंचने के बाद सबसे पहले चावल की गुणवत्ता की जांच क्वालिटी इंस्पेक्टर (क्यूआई) द्वारा की जाती है। ऐसे ही तमाम क्यूआई से मिलीभगत करके चावल की अफरा-तफरी की जा रही है। कोरबा जिले में नान के गोदाम में घटिया चावल खपाए जाने की सूचना कुछ स्थानीय मिलर्स ने मुख्यालय में दी। यह घोटाला अक्टूबर-नवंबर 2025 के दौरान किया गया और तब नान, कोरबा में प्रमोद जांगड़े प्रभारी प्रबंधक के तौर पर पदस्थ थे। अब तक हुए खुलासे में इस घोटाले के मास्टरमाइंड जांगड़े ही थे। उन्होंने दूसरे जिलों के प्रबंधकों और क्यूआई से मिलीभगत करके घटिया चावल नान के गोदाम में खपाया। इस घोटाले का सुराग कोरबा जिले के ही कुछ राइस मिलर्स ने लिखित में दिया और बाकायदा यह भी बताया कि नान के किस गोदाम में कितने नंबर के लॉट का चावल गुणवत्ताहीन है।

👉 क्वालिटी इंस्पेक्टरों ने दिया साथ

नान में जब भी कभी ज्यादा चावल पहुंचे और उसकी गुणवत्ता की जांच के लिए क्वालिटी इंस्पेक्टर (क्यूआई) कम पड़ जाएं, तब दूसरे जिले के क्यूआई की सेवाएं ली जा सकती हैं। हालांकि इसके लिए मुख्यालय की अनुमति लेनी होती है और तब क्यूआई की अपनी आईडी उसके जिले में निलंबित रहती है और वह जिस जिले में जाएगा, वहां उसकी आईडी मान्य की जाती है। लेकिन जिला प्रबंधक प्रमोद जांगड़े ने योजनाबद्ध तरीके से बालोद, बेमेतरा और जशपुर सहित कुछ अन्य जिलों के क्यूआई की आईडी का उपयोग कर चावल उठाव किया। मतलब यह हुआ कि इन जिलों के क्यूआई कोरबा आए ही नहीं और उनकी तरफ से चावल के लॉट यानी ढेर की अच्छी गुणवत्ता की रिपोर्ट दे दी गई। जांगड़े द्वारा किए गए इस खेल की जानकारी मिलने पर राइस मिलर ही नहीं, अफसर भी दंग हैं, क्योंकि मुख्यालय में लिखित आदेश के बिना कोई भी क्वालिटी इंस्पेक्टर दूसरे जिले में लॉट का पेपर नहीं बना सकता और न ही आईडी ट्रांसफर कर सकता है।

👉अब तक 4 पर हुई कार्रवाई

चावल के इस घोटाले के उजागर होने के बाद नान की राज्य स्तरीय टीम द्वारा जांच की जाती रही। मामला विधानसभा में उठा तो सरकार ने बताया कि नान कोरबा के प्रबंधक रहे प्रमोद जांगड़े को निलंबित कर दिया गया। इससे पूर्व यहां पदस्थ रहे क्यूआई प्रकाश बरेठ और एक अन्य को निलंबित किया जा चुका था। सबसे ज्यादा घटिया चावल की गुणवत्ता जांचने वाले बेमेतरा के क्यूआई महेश्वर लाल सोनवानी को भी निलंबित किया गया।

👉 चावल का लॉट बदलकर देने का नोटिस

इस घोटाले की जांच में चावल के 26 लॉट अमानक पाए गए, जिनकी आपूर्ति 15 राइस मिलर्स द्वारा की गई थी। इनमें से 7 कोरबा जिले के और 8 अन्य जिलों के हैं। सभी को नोटिस जारी कर कुल 8,153 क्विंटल चावल के स्थान पर अच्छा चावल देने को कहा गया है। इनमें महिमा मिनी राइस मिल, छुरी; बाबा श्री फूड प्रोडक्ट; मां बम्लेश्वरी मिल; श्री राजाराम राइस उद्योग; ओम एग्रो; श्री आंजनेय राइस प्रोडक्ट; मेसर्स सुरभि राइस प्रोडक्ट (सभी कोरबा जिले के) शामिल हैं। इनके अलावा श्री लक्ष्मी निधि राइस मिल, सक्ती; कान्हा ग्रेन प्रोसेस, रायपुर; मे. कचरूलाल जितेंद्र कुमार, रायपुर; परबाइलिंग प्लांट नेवरा, रायपुर; बालाजी राइस इंडस्ट्रीज, रायपुर; लख दातार राइस इंडस्ट्रीज, सक्ती; श्री मंगलम एग्रो प्रोडक्ट, सक्ती; श्री श्याम राइस उद्योग, रायपुर; बालाजी राइस इंडस्ट्रीज, रायपुर शामिल हैं, जिन्हें केवल चावल रिप्लेस करने को कहा गया है, ब्लैकलिस्टेड नहीं किया गया है। गौरतलब हो इनमें महिमा मिनी राइस मिल छुरी के विरुद्ध पूर्व में भी जिला प्रशासन द्वारा अनियमितता के मामले में कार्रवाई की जा चुकी है।

(साभार सत्यसंवाद डॉट कॉम )