KORBA : हिचकिचाहट के साथ घर लौटे, कंट्रोवर्सी न हो इसलिए विदाउट कैमरा सनातन में वापसी , बोले धीरेंद्र शास्त्री – महिलाएं भावनाओं में न बहें, देखें-परखें फिर भरोसा करें …..

कोरबा। कोरबा के बांकी मोंगरा क्षेत्र में आयोजित हुई पांच दिवसीय श्री हनुमंत कथा के चौथे दिन आयोजकों के प्रयास स्वरूप 543 लोगों की घर वापसी का भी कार्यक्रम रखा गया। मंच से इतने लोगों की घर वापसी का उद्घोष और तैयारी करने के निर्देश देने के साथ ही इस बात को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई। एक साथ इतने सारे लोगों की घर वापसी का अद्भुत कार्यक्रम देखने के लिए लोग आतुर रहे लेकिन सार्वजनिक तौर पर घर वापसी करने वाले ऐसे लोग किसी को नजर नहीं आए।

हालांकि, इसी मंच पर बेमेतरा जिले के मोहम्मद अनवर अली ने अपने परिजनों के साथ सार्वजनिक रूप से बिना किसी डर के निर्भय होकर हिंदू धर्म स्वीकार किया। दूसरी तरफ जो लोग हिंदू धर्म से दूसरा धर्म अपना चुके थे, ऐसे लोगों ने अपने ही धर्म में वापसी के कार्यक्रम में सार्वजनिक होने पर हिचकिचाहट महसूस की। हालांकि इनकी घर वापसी जैसे भी हुई हो, यह एक बड़ा ही हर्ष का विषय है कि 500 से अधिक की संख्या में लोगों ने अपने सनातन धर्म को फिर से अपनाया।

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बुधवार को कथा का समापन के पश्चात कोरबा से विदा लेने से पहले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मीडिया से संक्षिप्त में रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों के बीच में, उनके आसपास के निवास के बीच में यह कथा हुई। जंगल में हनुमान जी के नाम का मंगल हुआ। आज 108 बेटियों का कन्यादान हुआ। सर्वमङ्गला माता की नगरी ऊर्जा की धानी कोरबा है जो पूरे देश को प्रकाशित करता है, यहां भक्ति व ज्ञान का प्रकाश हुआ। कथा के दौरान 500 से अधिक लोगों ने घर वापसी की। कुछ लोग मंच पर आने से हिचकिचा रहे थे जिस कारण विदाउट कैमरा कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। 500 से अधिक लोगों की सूची हमें मिली, इनमें से बहुतों घर हमने घर वापसी करवाई। किसी तरह की कंट्रोवर्सी ना हो, असुरक्षा न हो इसलिए बिना कैमरे के घर वापसी कराई गई। यह अद्भुत आयोजन जिसमें धर्म भी था, कर्म भी था, भक्ति भी थी,शक्ति भी थी, सनातन की सेवा भी।

कथाओं को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों पर श्री शास्त्री ने कहा कि कथाओं के माध्यम से सामाजिक सेवा के कार्य भी होते हैं। 108 बेटियों का विवाह एक वृहद कार्यक्रम रहा। ऐसा कार्य, ऐसी कथा हर गांव में होना चाहिए। एक सवाल के जवाब में कहा कि श्रद्धा और अंधश्रद्धा में बहुत बारीक अंतर होता है। महाराष्ट्र की घटना के सवाल पर कहा कि महिलाओं को किसी से भी मिलते-जुलते वक्त अपनी मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए। महिलाओं को किसी भी पर पुरुष से मिलते समय अपने साथ पिता, भाई या पति को साथ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में चाहे वह नेता हो, संत हो, मीडिया हो, अधिकारी हो ऐसे लोग हर जगह पाए जाते हैं। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे भावनाओं में आकर ना बहें बल्कि देखें, परखें फिर भरोसा करें।