CG : सहायक आयुक्त आदिवासी विकास दंतेवाड़ा की ढाल बनी कमिश्नर कार्यालय ट्राइबल ,अवर सचिव के आदेश,ध्यानाकर्षण पत्र की अनदेखी कर भ्रष्टाचार के मामले में दिया संरक्षण का सबूत ,नीयत पर उठे सवाल,ये रिश्ता क्या कहलाता है … ?

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज दंतेवाड़ा । आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास रायपुर आदिवासी विकास विभाग दंतेवाड़ा के मौजूदा प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग के कार्यकाल में जिला खनिज संस्थान न्यास से वित्तीय वर्ष 2025 -26 में स्वीकृत 15 करोड़ के कार्यों में अनियमितता की ढाल बनी हुई है। प्रमुख सचिव से लिखित शिकायत उपरांत अवर सचिव आदिम जाति विकास विभाग के द्वारा प्रकरण में दिए गए जांच आदेश के बावजूद तय मियाद में जांच नहीं करने अथवा
ध्यानाकर्षण पत्र के अनदेखी से नीयत पर सवाल उठ रहे।

शासकीय फंड विशेषकर डीएमएफ में अनियमितता को लेकर बस्तर संभाग में आदिवासी विकास सुर्खियों में रहा है। दंतेवाड़ा में 18 करोड़ के फर्जी टेंडर मामले में 2 पूर्व सहायक आयुक्तों,लिपिकों को जेल तक की हवा खानी पड़ी थी। बीते वित्तीय वर्ष 2025 -26 में प्रभारी सहायक आयुक्त राजीव नाग के कार्यकाल में जिला खनिज न्यास से स्वीकृत 15 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों में अनियमितता की प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग से लिखित शिकायत कर सहायक आयुक्त को तत्काल हटाए जाने की अनुरोध की गई थी।

जिसमें अवर सचिव आदिम जाति विकास विभाग ने 25 नवंबर 2025 को आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास इंद्रावती भवन ,नवा रायपुर को पत्र लिखकर प्रकरण की उल्लेखित तथ्यों के आधार पर 15 दिवस के भीतर जांच कराकर प्रतिवेदन मांगा था। लेकिन अकर्मण्य आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा प्रकरण के संदर्भ में आज पर्यन्त जांच तक नहीं की जा सकी।

अवर सचिव को पुनः शिकायत किए जाने पर 19 जनवरी को आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास को स्मरण पत्र लिखकर पखवाड़े भर के भीतर प्रकरण की जांच प्रतिवेदन मांगा गया था। यह मियाद भी समाप्त हो गई है,लेकिन जांच आदेश नहीं निकल सकीं।

👉जांच आदेश निकालने जांचने क्यों कांप रहे हाथ

आयुक्त कार्यालय आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग का कुर्सी का वजन इतना बढ़ा दिया गया कि वे उच्चाधिकारी के आदेश और कर्व्यनिर्वहन के लिए एक कलम तक नहीं चला पा रहे । संबधित अफसर व डीएमएफ फंड की लूट मचाने वाले फर्मों का मनोबल बढ़ गया है । साथ ही विभागीय अफसरों की जुगलबंदी से रिश्तों पर सवाल उठ रहे ।

👉अश्रम छात्रावासों में बाजार दर से दोगुने दर में सामाग्री क्रय कर प्रदाय करने की सूचना,,शौचालय , आश्रम छात्रावास के मरम्मत कार्य के नाम पर खानापूर्ति कर लाखों का वारा न्यारा

विभागीय आश्रम -छात्रावासों में बाजार दर से दोगुने दर में सामाग्री क्रय कर प्रदाय की गई है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो संचालित 128 अश्रम छात्रावासों में से कई छात्रावासों में सामाग्री पहुंची ही नहीं,शौचालय व आश्रम छात्रावास के मरम्मत कार्य के नाम पर भी खानापूर्ति कर लाखों का वारा न्यारा किया गया है। ठेकेदार अफसरों की जुगलबंदी से डीएमएफ की राशि का जमकर बंदरबांट किया गया है।
ऐसे में आयुक्त कार्यालय से जांच की उम्मीद तो बेमानी है।प्रमुख सचिव महोदय जो निष्पक्षता ,बेबाक कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं उनसे ही जांच की कुछ आश बंधी है। लेकिन यह कार्यालय भी लिखित शिकायत के इतंजार में बैठी है।

👉 इन कार्यों के जांच की हुई थी अनुरोध ,अब मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचेगा मामला

प्रभारी सहायक आयुक्त श्री राजीव नाग के कार्यकाल में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जुलाई 2025 तक की ही स्थिति में कार्यालय कलेक्टर जिला खनिज संस्थान न्यास से विभिन्न विकास कार्यों के लिए 15 करोड़ रू. से अधिक की स्वीकृति दी जा चुकी थी । इनमें विभिन्न कार्यों कन्या आश्रम 50 एवं 100 सीटर परचेली, बालक आश्रम 50 एवं 100 सीटर-बेंगलुर, गुडसे, जंगमपाल में नवनिर्माण कार्य, प्री.मै. बालक छात्रावास, प्री.मै. कन्या छात्रावास-बड़ेगुड़ा, रॉजे, गीदम, बारसुर, छिंदनार, छोटे तुमनार में कम्प्यूटर लैब की स्थापना कार्य के कार्य, बालक आश्रम-बारसुर पो.मै. कन्या छात्रावास-किरन्दुल, प्री.मै. कन्या छात्रावास कुआकोण्डा, प्री.मै. अजा. बालक छात्रावास बचेली, बालक आश्रम छोटे तुमनार, प्री.मै. अजजा. कन्या छात्रावास-कटेकल्याण में शौचालय मरम्मत कार्य के कार्य, प्री.मै. कन्या छात्रावास दंतेवाड़ा, प्री. मै. कन्या छात्रावास-जावंगा गीदम, कन्या परिसर पातररास, में स्वीकृत कार्य रिनोवेशन एवं टॉयलेट वर्क के कार्य शामिल हैं, इसी तरह 100 सीटर कन्या आश्रम-गाटम के भवन निर्माण कार्य के कार्य, स्वामी आत्मानंद इंगलिश माध्यम स्कूल-जावंगा, गीदम के छत के ऊपर कराए गए प्रोफाईल सीट कार्य के कार्य, जिले के 12वीं उत्तीर्ण छात्र/छात्राओं हेतु उच्च शिक्षा कौशल विकास पाठ्यक्रम एवं 09 अगस्त 2025 को विश्व आदिवासी दिवस पर स्वीकृत कार्य शामिल है। संबंधित कार्यों के कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति युक्त प्राक्कलन, माप पुस्तिका, देयक व्हाउचर्स की व्यापक लोकहित में सत्यप्रतिलिपि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। प्रमुख सचिव से शिकायत के उपरांत भी जांच में टालमटोल किए जाने से आदिवासी विकास विभाग भ्रष्टाचार की पनाहगार है यह जग जाहिर हो चुका है,लिहाजा प्रकरण में अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत की जाएगी। जीरो टॉलरेंस की नीति वाली साय सरकार की कार्रवाई पर पूरी निगाहें टिकी होंगी। जिस तरह सीएम हाउस एक्शन मोड़ में है उससे प्रकरण में त्वरित जांच के आसार हैं।