CG: महिला एवं बाल विकास विभाग दंतेवाड़ा के DPO वरुण नागेश सस्पेंड ,2 महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि के बाद कलेक्टर ने की कार्रवाई ,महकमे में मचा हड़कम्प

👉 महिला कांग्रेस ने DPO का पुतला फूंक दी थी कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी,जानें पूरा मामला देखें आदेश

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज दंतेवाड़ा । महिला एवं बाल विकास विभाग के दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ जिला कार्यक्रम अधिकारी वरुण नागेश को कलेक्टर (collector ) ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीपीओ (district program officer ) पर उन्हीं के विभाग में कार्यरत 2 महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न (sexual harassment ) का गंभीर आरोप लगाया था। जिसके बाद पीड़ितों के बयान उपरांत जिला महिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने आरोपी डीपीओ का पुतला फूंका था। साथ ही एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी दी थी। प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम ने भी जांच में आरोपों की पुष्टि की थी।जिसके बाद कलेक्टर (district majistret ) ने यह कार्रवाई की है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से न केवल दंतेवाड़ा वरन पूरे प्रदेश में हड़कम्प मचा है,कांग्रेस इसे कार्यस्थल पर महिलाओं की असुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार को घेर रही।

👉जानें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ जिला कार्यक्रम अधिकारी (district program officer ) पर वरुण नागेश पर उनके ही विभाग में काम करने वाली दो महिलाओं ने यौन उत्पीड़न ( sexual harassment )
और अश्लील भाषा बोलने का आरोप लगाया था। इस आरोप के बाद जिले की राजनीति गर्म हो गई। महिला कांग्रेस पीड़ित महिला कर्मचारियों के बयान उपरांत डीपीओ वरुण नागेश का पुतला फूंका था। साथ ही एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी दी थी। जिसके बाद हड़कम्प मच गया था। जिला प्रशासन तत्काल हरकत में आया। कलेक्टर ने 5 सदस्यीय जांच टीम की गठन की। इधर अधिकारी वरुण नागेश ने सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया था।

👉जांच में आरोपों की पुष्टि,कलेक्टर ने किया सस्पेंड

जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम की जांच में डीपीओ पर महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप, शिकायत सही पाए गए।
जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद 29 अप्रैल 2026 को कलेक्टर देवेश ध्रुव ने डीपीओ वरुण नागेश का कृत्य अनुशासनहीन ,अशोभनीय पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत यह कार्रवाई की गई है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय नियमानुसार निर्धारित रहेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े मामलों में गंभीरता को देखते हुए यह प्रभावी कदम उठाया गया है।

👉इन्हें दिया गया प्रभार

निलंबन के बाद विभाग का पूरा प्रभार सुश्री तनुजा बेलसरिया को सौंप दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि 30 अप्रैल 2026 तक पूरा चार्ज हैंडओवर किया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद जिले के प्रशासनिक और विभागीय हलकों में हलचल बढ़ गई है। अचानक हुए इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

👉 बड़ा सवाल ,क्या कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद जागा प्रशासन ?

महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं की पोषण ,सुरक्षा,सम्मान एवं अधिकार के लिए कार्य करती है , लेकिन विभाग में ही महिला कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न होने से विभाग शर्मसार है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं जब खुद के विभाग में महिलाएं सुरक्षित नहीं तो वे आम महिलाओं को उनके अधिकार ,सुरक्षा को लेकर कितना जागरूक कर पाएंगी। कार्यस्थल पर महिलाओं की सम्मान सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आने पर भी जिला प्रशासन ने आखिर त्वरित कार्रवाई को लेकर क्यों संजीदगी नहीं दिखाई? क्या जिला महिला कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद मामला विधानसभा में गूंजने के आसार के बीच सरकार को फजीहत से बचाने यह कार्रवाई की गई ? कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आने वाले वक्त में आम जनता के साथ विपक्ष सीधे सरकार से मांगेगी।