कोरबा-उरगा। अज्ञात चोर ने एक वृद्धा के घर से नगदी रकम और जेवरार्तों की चोरी कर ली। इस मामले में उरगा पुलिस ने कोई एफआईआर आदर्श नहीं की। यहां तक कि शिकायत की पावती भी नहीं दी गई। पीड़िता के साथ हुआ थाना स्तरीय पुलिसिया घटनाक्रम बताता है कि यहां आईजी की बातें बेअसर हैं।
75 वर्षीय लाचार वृद्धा ठीक से चल भी नहीं सकती। पीड़िता अनंत कुंवर यादव पति स्व. तीजाराम यादव ग्राम- पताढ़ी, थाना- उरगा की निवासी हैं। उन्होंने बताया कि 20 मार्च 2026 की सुबह लगभग 10 बजे उनके घर से 1 लाख 10 हजार रुपए नगद और लगभग 1 किलोग्राम चांदी के जेवरात चोरी हो गए। पीड़िता के अनुसार, नगद राशि उन्हें लेंको पावर प्लांट से जमीन का मुआवजा के रूप में प्राप्त हुई थी।
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इस मामले में उरगा पुलिस पर कथित उदासीनता का आरोप वृद्धा ने लगाया है। उनके अनुसार इस घटना की लिखित सूचना उन्होंने 24 मार्च 2026 को थाना उरगा में दे दी थी। शिकायत मिलने के बाद एएसआई ईश्वर एक्का द्वारा उनके घर आकर मौका मुआयना भी किया गया। इस दौरान, पीड़िता के पड़ोसी राजू यादव ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पीड़िता के ही नाती अमन यादव और उसके साथी मुकेश यादव को वृद्धा के घर से चावल की बोरी उठाकर ले जाते हुए देखा था। पीड़िता का कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके नाती और उसके साथी ने ही इस चोरी को अंजाम दिया है। इसके बावजूद, उरगा पुलिस ने अब तक शिकायत पर न तो एफआईआर दर्ज की है और न ही नामजद संदिग्धों से कोई कड़ी पूछताछ की है। पीड़िता का आरोप है कि उन्हें उरगा पुलिस द्वारा शिकायत की पावती तक नहीं दी गई। कार्रवाई के अभाव में अंततः वृद्धा ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय आ कर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने निवेदन किया है कि उनकी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के लिए थाना उरगा को आदेश दिए जाए और संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की जाए ताकि उनका सामान और पैसा बरामद हो सके।
👉 हाल ही में 3 दिन पहले 7 अप्रैल को बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग कोरबा में वार्षिक निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मंच से कहा था कि डॉक्टर और पुलिस के पास आदमी मजबूरी में ही आता है। हमारे पास आने वाले मजबूर व्यक्ति की बातों को सुनना हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। आईजी ने कर्तव्य पालन करने की नसीहत व हिदायत देने के साथ ही यह संदेश भी दिया कि थाना में आने वाले फरियादी की बातों को सुनें और उसे न्याय दें। लेकिन, यहां तो 20 दिन पहले दर्ज कराई गई शिकायत पर आज तक FIR नहीं हुई और ना ही शिकायत दिनांक को किसी तरह की पावती प्रदान नहीं की गई। भले ही पुलिस महानिरीक्षक का आगमन इस घटनाक्रम के बाद हुआ हो लेकिन दी गई सीख और जाहिर की गई अपेक्षाओं पर भी यदि उरगा पुलिस खरा उतरना चाहती तो,पीड़िता की शिकायत के आधार पर 7 मार्च या इसके बाद भी एफआईआर दर्ज कर सकती थी।
