CG : धान खरीदी अभियान : लगातार 15 वें साल जीरो शार्टेज देकर KORBA ने गढ़ा कीर्तिमान ,लचर परिवहन व्यवस्था से जूझते हुए किया 650 करोड़ रुपए के 27.47 लाख क्विंटल धान का शत प्रतिशत परिदान,मिलेगा प्रोत्साहन राशि के तौर 1.37 करोड़ का इनाम ,रखवाली करते हाथी के हमले में एक प्रबंधक ने गंवाई थी जान …..

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा। संपन्न हुए खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी अभियान में कोरबा जिले ने लगातार पन्द्रहवें साल कीर्तिमान रच दिया । कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में शासन को शत प्रतिशत धान का परिदान कर दिया । 27 लाख 47 हजार 101 क्विंटल (समर्थन मूल्य पर 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742 .8 रुपए का) धान लौटाने वाले कोरबा की 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों को कमीशन एवं प्रोत्साहन राशि के तौर पर 10 करोड़ 16 लाख ,42 हजार 744 रुपए का भुगतान होगा।

यहां बताना होगा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी का कार्य किया गया। बाद में समीक्षा उपरांत मुख्यमंत्री ने टोकन कटा चुके धान बेचने से छूट गए किसानों के लिए 2 अतिरिक्त दिवस बढ़ाया था। इस तरह अंतिम तिथि 7 फरवरी की स्थिति में आदिवासी बाहुल्य कोरबा जिले में पंजीकृत 43 हजार 681 किसानों ने 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 27 लाख 47 हजार 101.2 क्विंटल (समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742.8 रुपए का )धान बेचा था। समर्थन मूल्य पर खरीदे गए 6 50 करोड़ रुपए के धान की सुरक्षित रखरखाव एवं समय पर शत प्रतिशत उठाव की चुनौती थी। कलेक्टर कुणाल दुदावत के कुशल नेतृत्व में कोरबा जिले ने देर सबेर ही सही इस कार्यदायित्व का बखूबी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया। शासन स्तर से रिसाइक्लिंग पर नकेल कसने अंतिम पखवाड़ा में पखवाड़े भर से अधिक समय तक परिवहन पर रोक लगने , बिगड़ते मौसम बेमौसम एवं संग्रहण केंद्र के अभाव में तेज धूप में करोड़ों के धान का सुरक्षित रखरखाव कतई आसान नहीं था, लेकिन कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में जिला प्रशासन एवं धान खरीदी अभियान से जुड़े तमाम विभागों मार्कफेड, खाद्य विभाग ,नागरिक आपूर्ति निगम ,आदिवासी सेवा सहकारी समिति,उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने पूरी संजीदगी से कार्य किया ।

कलेक्टर श्री दुदावत संबंधित विभागों से लगातार कस्टम मिलिंग के लिए जारी डीओ एवं उठाव की जानकारी लेते रहे जिन जिन उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट से अधिक धान के स्टॉक की जाम होने की नौबत आती रही वहां प्राथमिकता के साथ धान के उठाव का निर्देश देते रहे। यही नहीं समय-समय पर कलेक्टर ने लापरवाह राइस मिलरों को फटकार भी लगाया ,समय पर उठाव पर शाबाशी भी दी । जिसकी बदौलत लगातार पन्द्रहवें साल कोरबा जिला शत प्रतिशत धान लौटा कर जीरो शार्टेज धान देने के कीर्तिमान को बरकरार रखने में सफल रहा।

👉बढ़ाया मान ,समितियों को 10 करोड़ 16 लाख का होगा भुगतान

गौरतलब हो कि आदिवासी सेवा सहकारी समितियों को प्रति क्विंटल धान खरीदी पर राज्य शासन 32 रुपए कमीशन की दर से भुगतान करती है। वहीं जीरो शार्टेज (शत प्रतिशत धान का परिदान )करने पर प्रति क्विंटल 5 रुपए की दर से इन्सेंटिव्ह (प्रोत्साहन राशि)प्रदान करती है। जिले में बीते खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में कुल
27 लाख 47 हजार 101.2 क्विंटल (समर्थन मूल्य पर 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742 रुपए के )धान की खरीदी हुई थी। जिसके एवज में समितियों को 8 करोड़ 79 लाख 07 हजार 238 रुपए का कमीशन भुगतान होगा। इसी तरह जीरो शार्टेज के लिए 1 करोड़ 37 लाख 35 हजार 506 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस तरह समितियों को कुल कमीशन एवं प्रोत्साहन राशि के तौर पर 10 करोड़ 16 लाख 42 हजार 744 रुपए का भुगतान होगा।समिति के आय का सबसे बड़ा जरिया धान खरीदी ही होता है। इसी कार्य से मिलने वाली राशि से कर्मचारियों के वेतन भुगतान से लेकर समितियों के समस्त व्यय का भुगतान किया जाता है।

👉सिरमौर रहे समिति बरपाली(बरपाली) को सर्वाधिक प्रोत्साहन राशि मिलेगी

संपन्न धान खरीदी अभियान में सर्वाधिक धान खरीदी कर सिरमौर रहे बरपाली ब्रांच के समिति बरपाली बरपाली को सर्वाधिक 4 लाख 41 हजार 854 रुपए प्रोत्साहन राशि के तौर पर भुगतान होगा। इस केंद्र में 88 हजार 370.8 क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। जिसका समिति ने शत प्रतिशत परिदान कर दिया है।

👉मार्कफेड की लचर परिवहन व्यवस्था से हुए हलाकान , हाथी प्रभावित केंद्र कुदमुरा में रखवाली करते कर्मचारी ने गंवा दी जान ,जीरो शार्टेज के लिए 100 क्विंटल तक धान की कीमत अदायगी की चर्चा

रिकार्ड में भले ही आकांक्षी जिला कोरबा की समितियों ने लगातार पन्द्रहवें साल जीरो शार्टेज देकर प्रदेश में अपनी बेदाग ईमानदार छवि पेश की है। लेकिन जीरो शार्टेज की इस परंपरा को निरंतर बनाए रखने में समितियों ने इस साल जो दर्द तकलीफ परेशानियाँ झेली हैं वो शायद इन डेढ़ दशक में कभी न झेली हो। मार्कफेड की बदइंतजामी की वजह से जनवरी माह में पखवाड़े भर तक उठाव बंद रहा। इससे पूर्व मार्कफेड अन्य जिलों के लिए करीब 9 लाख क्विंटल के धान का डीओ जारी कर चुका था।हालात ऐसे थे कि पहली बार 15 फरवरी तक खरीदे गए शत प्रतिशत धान के डीओ जारी करने के उपरांत भी राईस मिलर्स अन्य जिलों के डीओ पर धान के उठाव को प्राथमिकता देने की वजह से धान का उठाव नहीं कर पा रहे थे। जिसकी वजह से समितियों में शार्टेज का भय के साथ करोड़ों के धान की चोंरों एवं जंगली जानवरों से असुरक्षा का भय सता रहा था। इसी फेर में 5 मार्च की रात 1.34 बजे 27 लाख रुपए से अधिक की 1100 क्विंटल से अधिक धान की रखवाली कर रहे कोरकोमा समिति के हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्र कुदमुरा के फड़ प्रभारी प्रभारी राजेश सिंह पिता शशिकांत सिंह की दंतैल हाथी ने जान ले ली । आज उनके बच्चे अनुकम्पा नियुक्ति समेत अनुग्रह राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे। इस हृदय विदारक घटना से पूरे जिले में हड़कम्प मच गया था। इसके उपरांत भी क्षेत्र के अन्य हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्रों से शत प्रतिशत धान का उठाव करवाने में मार्कफेड के अफसरों को मार्च का पूरा महीना लग गया। नाम न छापने की शर्त पर समिति के कर्मचारियों ने बताया कि जितनी प्रोत्साहन राशि समिति को शासन दे रही है उतने की धान वो जीरो शार्टेज की परंपरा बनाए रखने भर चुके हैं।प्रत्येक बड़े उपार्जन केंद्र 100 -100 क्विंटल तक अंतर की राशि भर चुके हैं। बस मिलने वाले कमीशन की राशि समय पर मिल जाए तो वेतन एवं अन्य स्वत्व का भुगतान हो जाए।