दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर बड़ा कदम उठाते हुए डीजल और जेट फ्यूल (एटीएफ) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी की है।
सरकार ने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जो कि दोगुने से भी अधिक है। वहीं, जेट फ्यूल (एटीएफ) पर यह शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
👉पेट्रोल पर नहीं कोई बदलाव
हालांकि, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को पहले की तरह शून्य रखा गया है। बता दें, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। सरकार नहीं चाहती कि वैश्विक महंगाई का असर सीधे तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़े, इसलिए निर्यात शुल्क बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

यह फैसला सरकार के विंडफॉल टैक्स ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत समय-समय पर ईंधन निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बदलाव किया जाता है। इसका उद्देश्य रिफाइनरी कंपनियों के मुनाफे और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
हालांकि, इस निर्णय से तेल कंपनियों को झटका लग सकता है, विशेषकर उन कंपनियों को जो रिफाइंड डीजल और जेट फ्यूल का बड़े पैमाने पर निर्यात करती हैं। उनके मुनाफे पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर, पेट्रोल पर कोई बदलाव न होने से इस क्षेत्र में कारोबार सामान्य रहने की उम्मीद है।
👉एटीएफ महंगा होने से हवाई यात्रा पर असर

सरकार के इस कदम से विमानन क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। एटीएफ महंगा होने के कारण हवाई यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
बता दें कि, हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर लागू होने से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कुछ नरमी आई है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी हुई है। हालांकि, क्षेत्र में जारी अनिश्चितता के कारण आगे की कीमतों को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
