गुजरात । गुजरात के राजकोट में एक बेहद बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है, इस मामले में लगभग 2500 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह सिर्फ आम साइबर अपराध नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था जिसमें निजी बैंकों के कुछ अधिकारी भी शामिल थे।
👉मामले में 3 बैंक अधिकारी गिरफ्तार

राजकोट के पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर के अनुसार, इस मामले में तीन बैंक अधिकारियों की गिरफ्तारी की गई है। इनमें यस बैंक की पाधाधरी शाखा के पर्सनल मैनेजर मौलिक कामानी, जामनगर स्थित एक्सिस बैंक के मैनेजर कल्पेश डांगरिया और एचडीएफसी बैंक के पर्सनल बैंकर अनुराग बाल्धा शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने साइबर फ्रॉड गिरोह के साथ मिलकर फर्जी बैंक खातों को खोलने और उन्हें संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
👉बड़े पैमाने पर हुआ लेन-देन
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी बैंक अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसे खाते खोले जो संदिग्ध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। इन खातों को एक्टिव रखने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया और बैंक की निगरानी प्रणाली को भी बायपास किया गया। इससे बड़े पैमाने पर लेन-देन बिना किसी अलर्ट के चलता रहा और साइबर फ्रॉड गिरोह आसानी से पैसों का संचालन करता रहा।
👉बैंक अधिकारियों ने की स्कैमर्स की मदद

इसके अलावा, कुछ अधिकारियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने खातों से नकद निकासी में मदद की, जिसे आगे हवाला चैनलों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया। इस पूरे नेटवर्क ने बेहद सुनियोजित तरीके से काम किया, जिससे लंबे समय तक यह घोटाला छिपा रहा।
👉अब तक 20 लोग गिरफ्तार
पुलिस ने अब तक इस मामले में कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पहले से पकड़े गए अन्य आरोपी भी शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियों ने अब तक 85 बैंक खातों की पहचान की है जो इस साइबर फ्रॉड से जुड़े हुए हैं, जबकि साइबर क्राइम पोर्टल पर इस मामले से संबंधित 535 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
👉जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस साइबर फ्रॉड केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी का बड़ा उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे बैंकिंग सिस्टम के अंदर की मिलीभगत से इतना बड़ा घोटाला संभव हो सका।
