👉 घटिया काम पर जांच/कार्रवाई की कोई सुगबुगाहट तक नहीं
👉 रेंजर मृत्युंजय शर्मा के घोटालों को संरक्षण दे रहे शीर्ष अधिकारी
कोरबा। कोरबा वन मंडल के कोरबा रेंज अंतर्गत आने वाले ग्राम भुलसीडीह में भ्रष्टाचार का वॉच टावर खड़ा किया गया है। रेंजर मृत्युंजय शर्मा की देखरेख में यह पूरा कार्य कराया जा रहा है जिसमें घटियापन की पराकाष्ठा दिख रही है।

वॉच टावर के निर्माण में गुणवत्ता को ताक पर रखा जा रहा है क्योंकि इसकी कोई निगरानी करने वाला नहीं है। ना तो डीएफओ को मैदानी स्तर पर जाकर वन विभाग के अंतर्गत होने वाले कार्यों को देखने की फुर्सत है और ना ही एसडीओ को। इस वजह से जंगल के भीतर होने वाले निर्माण कार्यों में रेंजर, डिप्टी रेंजर, बीटगार्ड की मनमानी चल रही है।

बात करें इस वॉच टावर की तो विभागीय सूत्र बताते हैं कि निर्माण में इसकी ऊंचाई से भी समझौता किया गया है। विभागीय जानकारों के मुताबिक करीब 45 फीट ऊंचा वॉच टावर निर्माण होना चाहिए जो कि यह लगभग 35 फीट का बनाया गया है। इसके अलावा वॉच टावर के साथ ही सतह पर फर्शीकरण का कार्य अभी तक नहीं हो सका है। टॉवर पर चढ़ने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के किनारे सुरक्षा रेलिंग लगाई जानी चाहिए,किन्तु वह भी नहीं लगाई गई है। टावर के ऊपर बने प्लेटफार्म पर चारों तरफ चारदीवारी का सुरक्षा घेरा (पैराफिट) बनाया जाना है, वह भी अब तक निर्मित नहीं हुआ है।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वॉच टावर की पोताई कराना शुरू करा दिया गया है ताकि इस निर्माण को पूर्ण बताया जा सके। अपनी गड़बड़ी को छुपाने के चक्कर में रेंजर प्लास्टर करना ही भूल गया। वह प्लास्टर का पैसा बचाने की जुगाड़ लगाए बैठे है। इस वजह से अब तक कराए गए निर्माण के ऊपर बिना प्लास्टर लगाए ही पोताई करा रहे हैं।

बताते चलें कि रेंजर मृत्युंजय शर्मा पहले से ही काफी चर्चा में हैं। उनके कारनामे राजधानी तक गूँज चुके हैं।तमाम तरह की शिकायतों और भ्रष्टाचारों के उजागर होने के बावजूद अपने शीर्ष अधिकारियों का संरक्षण और कुछ राजनीतिक लोगों का साथ होने के कारण वह अब तक अपने गुनाहों से बचते आ रहे हैं। उनके ऊपर आरोप सिद्ध होने के बावजूद कोई खास कार्रवाई भी नहीं हुई जिसे लेकर महकमे के लोगों में ही नाराजगी और चर्चा हमेशा बनी रहती है।
अब देखना यह है कि वॉच टावर के इस मामले में विभाग क्या रुख अपनाता है। हालांकि अभी तक इस मसले पर विभाग में कोई सुगबुगाहट जांच पड़ताल और कार्रवाई को लेकर होती नजर नहीं आ रही है। डीएफओ ने भी चुप्पी साध रखी है। जांच आदि के संबंध में कोई भी आदेश विभागीय तौर पर (समाचार लिखे जाने तक) जारी नहीं हुआ है, जो यह बताने के लिए काफी है कि मृत्युंजय शर्मा के प्रभाव में आकर पूरे घोटाले को नकटीखार के तालाब निर्माण घोटाला की तरह दबाने और लीपापोती करने की कवायद चल रही है।
सोर्स -सत्यसंवाद डॉट कॉम ….
