कोरबा । जिला पंचायत कोरबा में अध्यक्ष और सीईओ के बीच छिड़े टकराव ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है। धरना, आरोप, नाराजगी और अफसरशाही के बीच अब पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल भी मैदान में उतर आये हैं। उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि …..“मुख्यमंत्री सुशासन तिहार मना रहे हैं और कोरबा में कमीशनखोरी की बयार बह रही है।” जयसिंह अग्रवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। क्योंकि जिस जिला पंचायत में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि ही धरने पर बैठ जाएं, वहां विपक्ष को मुद्दा तलाशने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

जिला पंचायत में अध्यक्ष के पद पर बैठे भाजपा नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर ‘सुशासन‘ फाइलों में चल रहा है या जमीन पर भी दिखाई दे रहा है ? हालांकि राजनीति के जानकार इस बयान पर मुस्कुराते भी नजर आ रहे हैं। वजह साफ है…..आज पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल जिस प्रशासनिक तानाशाही और कमीशनखोरी पर सवाल उठा रहे हैं, कभी वही दर्द उनकी अपनी सरकार के दौरान भी साफ दिखाई देता था।
कांग्रेस शासनकाल में राजस्व मंत्री रहते हुए जयसिंह अग्रवाल और जिले के अफसरों के बीच खींचतान किसी से छिपी नहीं थी। उस दौर में भी कई बार उनके समर्थक और खुद पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल खुले मंच से यह कहते नजर
आते थे कि पुलिस-प्रशासन में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उल्टे पुलिस अधिकारी उनके लोगों पर रंजीशवश कार्रवाई कर रही है। यानी राजनीति का चक्र ऐसा घूमा कि कभी सिस्टम से परेशान रहने वाले नेताजी अब उसी सिस्टम पर व्यंग्य कसते दिखाई दे रहे हैं।
फर्क सिर्फ इतना है कि तब सत्ता अपनी थी और शिकायत अफसरों से थी….अब सत्ता दूसरी है, तो निशाना पूरा सिस्टम और सरकार बन गया है। जिला पंचायत में हुए इस बवाल ने एक बात जरूर साफ कर दी है कि कोरबा की राजनीति में अब ‘सुशासन‘ और ‘कमीशनखोरी‘ दोनों ही सबसे ज्यादा चर्चित शब्द बनने वाले हैं। जनता भी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर लड़ाई विकास की है, अधिकार की है या फिर कुर्सी और कमीशन की राजनीति की ?
