3 हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाला मामले में रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा को ‘सुप्रीम राहत ‘ छत्तीसगढ़ से बाहर रहने समेत इन शर्तों के साथ मिली जमानत …..

दिल्ली । बहुचर्चित 3000 करोड़ शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। हालांकि अदालत ने टुटेजा पर कई सख्त शर्तें लगाई हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना और सरकारी अधिकारियों से संपर्क नहीं करना शामिल है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के अहम आरोपी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी। करीब एक साल से ज्यादा समय से जेल में बंद टुटेजा को राहत देते हुए अदालत ने साफ कहा कि ट्रायल पूरा होने में लंबा वक्त लग सकता है और ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।

👉जब बाकी बाहर तो टुटेजा अंदर क्यों?- SC

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी की कि मामले के अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि अनिल टुटेजा को 21 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। कोर्ट ने माना कि मामले में अभी करीब 85 गवाहों की गवाही बाकी है, ऐसे में ट्रायल जल्दी खत्म होने की संभावना नहीं दिखती।

यानी सुप्रीम कोर्ट ने सीधे तौर पर यह संकेत दिया कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी आरोपी को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब जांच काफी आगे बढ़ चुकी हो और बाकी आरोपी राहत पा चुके हों।

👉जमानत मिली, लेकिन सख्त शर्तों के साथ

हालांकि अदालत ने टुटेजा को खुली छूट नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत (Anil Tuteja bail) के साथ कई कड़ी शर्तें लगाई हैं। आदेश के मुताबिक अनिल टुटेजा रिहा होने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे। उन्हें किसी भी सेवारत सरकारी अधिकारी से संपर्क करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा अदालत ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी गवाह को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। यानी राहत जरूर मिली है, लेकिन निगरानी भी उतनी ही सख्त रहेगी।

👉क्या है 3000 करोड़ का शराब घोटाला?

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के मुताबिक यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क ने शराब नीति में हेरफेर कर अवैध कमाई का विशाल सिंडिकेट तैयार किया।

ईडी के अनुसार इस कथित घोटाले से करीब 3000 करोड़ रुपए की गैरकानूनी कमाई हुई, जबकि ईओडब्ल्यू और एसीबी की चार्जशीट में अपराध से अर्जित रकम लगभग 2883 करोड़ रुपए बताई गई है। एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे अफसरों, नेताओं और कारोबारियों ने मिलकर शराब कारोबार को नियंत्रित किया और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया।

👉सिंडिकेट में अफसर, नेता और कारोबारी

ईडी की जांच में जिस “सिंडिकेट मॉडल” का जिक्र किया गया है, उसने राजनीतिक गलियारों से लेकर नौकरशाही तक हलचल मचा दी थी। अब तक पीएमएलए की धारा 19 के तहत नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन एमडी, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं।

👉शराब कारोबार तक सीमित नहीं

यानी यह मामला सिर्फ शराब कारोबार तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता, सिस्टम और सिंडिकेट के उस गठजोड़ की कहानी बन चुका है, जिसकी परतें अभी भी खुल रही हैं। अब निगाहें ट्रायल पर हैं, जहां तय होगा कि हजारों करोड़ के इस कथित खेल का असली मास्टरमाइंड कौन था।