कोरबा। शहर में एक कबाड़ के अवैध कारोबारी के मकान पर चली कार्रवाई अब बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मुकेश साहू का घर तो तोड़ दिया, लेकिन इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच एक सवाल तेजी से गूंज रहा है क्या इसी सख्ती से रेत तस्करों और बड़े अवैध कारोबारियों पर भी कार्रवाई होगी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब और छोटे कारोबारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर तेजी से दिखाई देती है, लेकिन खुलेआम चल रहे रेत के अवैध कारोबार पर उतनी कठोरता नजर नहीं आती। जिले में लंबे समय से अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर शिकायतें उठती रही हैं। रात के अंधेरे में नदियों से रेत निकालने और ओवरलोड वाहनों के संचालन की बातें आम हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ज्यादातर छोटे लोगों पर ही डंडा चलता दिखाई देता है।
मुकेश साहू का घर टूटने के बाद बस्ती में यही चर्चा है कि अगर प्रशासन अवैध निर्माण और नियमों को लेकर इतना गंभीर है, तो फिर उन लोगों पर बुलडोजर कब चलेगा जो करोड़ों के अवैध कारोबार से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं?
लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर गरीब कबाड़ कारोबारी पर कार्रवाई हो सकती है, तो रेत माफियाओं, अवैध कब्जाधारियों और रसूखदार कारोबारियों पर भी उसी सख्ती से कदम उठना चाहिए।कई सामाजिक लोगों ने भी सवाल उठाया है कि कार्रवाई का पैमाना समान होना जरूरी है, वरना आम जनता के बीच यह संदेश जाता है कि कानून सिर्फ कमजोर लोगों तक सीमित है।
फिलहाल प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को नियमानुसार बताया है, लेकिन शहर में अब चर्चा सिर्फ एक ही बात की है “क्या बुलडोजर सिर्फ गरीबों के घर तक ही पहुंचेगा, या रेत तस्करों के साम्राज्य तक भी जाएगा?”
