हसदेव एक्सप्रेस न्यूज अंबिकापुर । कलेक्टर कार्यालय अम्बिकापुर उपसंचालक रेशम विभाग की ढाल बन गई है । रैली -कोसा के भौतिक सत्यापन एवं केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों में भुगतान प्रक्रियाओं की व्यापक लोकहित में किए गए लिखित जांच अनुरोध पर कमिश्नर कार्यालय द्वारा दिए गए जांच आदेश 6 माह तक दबाए रखा । यही नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के बाद 4 मई को कमिश्नर कार्यालय द्वारा जारी ध्यानाकर्षण /स्मरण पत्र को भी नजरअंदाज कर संबंधित अधिकारी को खुला संरक्षण का प्रमाण दे दिया गया है।

यहाँ बताना होगा कि कार्यालय आयुक्त (कमिश्नर) सरगुजा संभाग अम्बिकापुर ,जिला -सरगुजा (छ.ग.) के यहाँ पत्र क्रमांक 7601 दिनांक 10 .09.2025 के माध्यम से व्यापक लोकहित में एक शिकायत पत्र प्रेषित की गई थी। जिसके माध्यम से अवगत कराया गया था कि कार्यालय उप संचालक रेशम अम्बिकापुर ,जिला -सरगुजा (छ.ग.) के द्वारा वित्तीय वर्ष 2024 -25 में क्रय किए गए रैली -कोसा के भौतिक सत्यापन पपत्र की जांच ,केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों से लाभान्वित हितग्राहियों को जारी भुगतान पत्रक ,अनुदान पत्रक ,उपस्थिति पंजी ,बैंक खाता की जांच एवं
अध्यक्ष /सचिव शहतूती रेशम उद्यान रखरखाव,ड़ड़गांव ,बतौली ,लमगांव ,मंगारी सुवारपारा ,गेरसा ,सूर ,अंबिकापुर के द्वारा मलबरी प्रक्षेत्र ,कोसा पौधरोपित प्रक्षेत्र में घेराव, फेंसिंग कार्य ,घास छिलाई ,रासायनिक खाद व वर्मीकम्पोस्ट खाद ,निदाई गुड़ाई ,टसर परिक्षेत्र में पौधों की जानवरों से सुरक्षा व चौकीदारी कार्य रेरिंग मकान की पोताई ,मरम्मत ,सन्टी हटाने ,कीटपालन उपकरणों की सफाई आदि कार्य के देयक व्हाउचर भुगतान प्रक्रिया की व्यापक लोक हित में 30 दिवस के भीतर संभाग स्तरीय टीम गठित कर जांच कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की गई थी।

प्रेषित पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था कि सबसे अधिक अनियमितता की शिकायत रेशम उत्पादन के कच्चे उत्पाद रैली-कोसा की व्यापारियों से खरीदी ,इसके गुणवत्ता परीक्षण एवं सत्यापन प्रमाण पत्र को लेकर आ रही थी । विश्वस्त सूत्रों से मिल रही जानकारी अनुसार साल के वृक्षों में रैली कोसा -कोकून उत्पादन को बढ़ावा देने व्यापारियों से क्रय किए गए रैली कोसा के नाम पर निर्धारित नियमों को ताक में रखकर निहित स्वार्थों की पूर्ति की गई है। निर्धारित शेल भार से कम वाले रैली कोसा ग्रेड -2 एवं ग्रेड -3 रैली कोसा की साबुत ग्रेड-1 रैली कोसा, रैली कोसा-पोली ग्रेड-1 में की दर पर खरीदी कर ली गई है। जिसकी गुणवत्ता भी संतुष्टिजनक स्वीकार्य योग्य नहीं थी। गुणवत्ता परीक्षण सत्यापन प्रमाण पत्र जारी करते समय कमीशन की लालच में जिम्मेदार अफसरों एवं व्यापारियों की जुगलबंदी में भ्रष्टाचार का यह खेल खेला गया है। गुणवत्ता परीक्षण सत्यापन प्रमाण पत्र की जांच से विभागीय अफसरों के ईमान डोलने की पुष्टि हो जाएगी।
बात करें कोसा संग्राहक परिवार की तो उनसे भी छलावा किया गया है। उनसे स्वस्थ डिम्ब समूह का कोसाफल लेकर निम्न ग्रेड का आंकलन कर भुगतान किया गया है।जिसके देयक व्हाउचर की जांच किए जाने से उपरोक्त अनियमितता स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।
बात करें केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की तो यहाँ भी अनियमितताओं की शिकायत कम नहीं हैं। वित्तीय वर्ष 2024 -25 में ही केंद्रीय सिल्क समग्र – 2 योजनान्तर्गत रेशम विस्तार कृषक को पौधरोपण /सिंचाई सुविधा /कृमिपालन भवन ,उपकरण ,गृह निरोधीकरण सामाग्री हेतु दिए जाने वाले अनुदान राशि एवं उस अनुदान राशि के बंदरबाट , गत वित्तीय वर्ष 2024 -25 में ही पालित डाबा टसर ककून उत्पादन योजना,तसर धागाकरण योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के संतुष्टि प्रमाण पत्र ,मनरेगा से लाभान्वित हितग्राहियों के मस्टररोल में अनियमितता की भी विश्वस्त सूत्रों से शिकायतें मिल रही हैं। इसके दस्तावेज की सत्यप्रतिलिपि विभाग ने केंद्रीय कानून सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी दबा दी। अपीलीय अधिकारी संयुक्त संचालक रेशम ग्रामोद्योग प्रभाग ने भी नियमों के प्रतिकूल विभाग के जन सूचना अधिकारी के पक्ष में ही आदेश पारित कर उनका बचाव किया।
इसके अलावा बात करें
अध्यक्ष /सचिव शहतूती रेशम उद्यान रखरखाव,ड़ड़गांव ,बतौली ,लमगांव ,मंगारी सुवारपारा ,गेरसा ,सूर ,अंबिकापुर के द्वारा मलबरी प्रक्षेत्र ,कोसा पौधरोपित प्रक्षेत्र में कराए गए विभिन्न कार्यों के भुगतान में भी फर्जीवाड़े की विश्वसनीय सूत्रों से शिकायत मिल रही।
घेराव, फेंसिंग कार्य ,घास छिलाई ,रासायनिक खाद व वर्मीकम्पोस्ट खाद ,निदाई गुड़ाई ,टसर परिक्षेत्र में पौधों की जानवरों से सुरक्षा व चौकीदारी कार्य रेरिंग मकान की पोताई ,मरम्मत ,सन्टी हटाने ,कीटपालन उपकरणों की सफाई आदि कार्य में 22 लाख रुपए से अधिक की भुगतान प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया गया है। इसकी विभाग से प्राप्त सत्यप्रतिलिपि से पुष्टि हो रही है।
👉चिलचिलाती धूप में अनावश्यक घास की छिलाई,प्रक्षेत्र की साफ सफाई आदि कार्यों के नाम पर समूहों को लाखों का भुगतान
जनवरी से मार्च अप्रैल से जून का महीना अमूमन सूखा रहता है। बावजूद इसके अनावश्यक घास की छिलाई,प्रक्षेत्र की साफ सफाई आदि कार्यों के नाम पर समूहों को लाखों का भुगतान हुआ है। मकान की मरम्मत ,नैनो यूरिया स्प्रे कीटपालन उपकरणों की सफाई ,खाद डालने के कार्य में भी लाखों का भुगतान हुआ है। विश्वस्त सूत्रों से फर्जी श्रमिकों से कार्य कराए जाने की सूचना मिल रही है।
लिहाजा देयक व्हाउचर व श्रमिकों के बैंक खातों के जांच की नितांत दरकार है। विभागीय वाहन के डीजल भुगतान भी संदेहास्पद है।
👉दस्तावेजी शिकायत ,स्मरण पत्र पर भी नहीं लिया संज्ञान,क्या डोल गया कलेक्टर कार्यालय का ईमान ?


उपरोक्त तथ्यों के साथ समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज संलग्न कर व्यापक लोकहित में उपरोक्त समस्त प्रकरणों की 30 दिवस के भीतर संभाग स्तरीय जांच दल गठित कर जांच कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कर जांच प्रतिवेदन की एक प्रति पत्र व्यवहार के पते पर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। लेकिन उपरोक्त आवेदन के 6 माह उपरांत भी आज पर्यन्त संबंधित प्रकरण में जांच तक शुरू नहीं हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय को 9 अप्रैल को की गई शिकायत के उपरांत कमिश्नर कार्यालय द्वारा कलेक्टर जिला -सरगुजा को जारी एक स्मरण पत्र प्राप्त हुआ। जिसके अनुसार कमिश्नर कार्यालय द्वारा प्रकरण ई कंप्लेन के रूप में दर्ज कर जांच हेतु 16 /09 / 2025 को ही पत्र लिखा जा चुका है। जिसका प्रतिवेदन आज पर्यंत अपेक्षित है ।
मुख्यमंत्री कार्यालय को 9 अप्रैल 2026 को हुई शिकायत उपरांत
संभागायुक्त सरगुजा संभाग अम्बिकापुर , जिला -सरगुजा (छग)के द्वारा 4 मई 2026 को स्मरण पत्र जारी कर प्रकरण की दोनों शिकायत में उल्लेखित तथ्यों की जांच कराकर विस्तृत जांच प्रतिवेदन मय प्रमाणिक दस्तावेज अपने स्पष्ट अभिमत समेत 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। लेकिन शिकायतकर्ता को जांच के संदर्भ में प्रतिवेदन आज पर्यंत प्राप्त नहीं हुआ। स्पष्ट है कि कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्रकरण में जिम्मेदारों को भावी कार्रवाई से बचाने पूर्णतः संरक्षण दिया जा रहा है।
कलेक्टर कार्यालय का यह कृत्य न केवल निंदनीय है वरन प्रशासनिक जवाबदेहिता के प्रति गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है। साथ ही शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के प्रतिकूल कार्य व्यवहार
है।
👉जांच के बजाय पड़ोसी जिले बलरामपुर का दे दिया अतिरिक्त वित्तीय प्रभार ,विभाग की मेहरबानी पर उठे सवाल !
उक्त शिकायत पत्र की प्रतिलिपि कार्यालय सचिव ग्रामोद्योग प्रभाग ,मंत्रालय महानदी भवन अटल नगर नवा रायपुर (छग) एवं कार्यालय कलेक्टर एवं जिला -दण्डाधिकारी महोदय ,अम्बिकापुर ,जिला -सरगुजा(छग)को दी गई थी। बावजूद इसके प्रकरण की जांच की अनदेखी की गई । विभाग ने उल्टे उप संचालक आई.के.बागरी को कार्यालय सहायक संचालक रेशम बलरामपुर, जिला-बलरामपुर-रामानुजगंज का अतिरिक्त वित्तीय प्रभार दे दिया है,जिससे विभागीय प्रश्रय स्वतः परिलक्षित हो है। इनके बलरामपुर के अतिरिक्त वित्तीय प्रभार के दौरान किए अब तक किए गए समस्त भुगतान प्रक्रियाओं के सूक्ष्म जांच की भी दरकार है। ताकि अनियमितताओं के मामले में सीधे तौर पर कार्रवाई हो सके।
👉मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची शिकायत ,पर सीएम हाउस तक पहुंच के दावे ,क्या डिप्टी डायरेक्टर के रिटायरमेंट से पहले होगी निष्पक्ष जांच ?
प्रकरण में संभागायुक्त
कार्यालय एवं विभागीय संरक्षण की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गई है। सूबे के मुखिया विष्णुदेव साय से 09 अप्रैल को की गई शिकायत के माध्यम में प्रकरण में अंतर्विभागीय राज्य स्तरीय टीम गठित कर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। ताकि शासन की जीरो टॉलरेंस की नीति के प्रति आमजनमानस में विश्वास बना रहे। अब प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर निगाहें टिकी है।वहीं विभाग के एक फील्ड ऑफिसर द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय के एक उच्च अधिकारी से अपना करीबी संबंध रिश्तेदारी की बात कह विभाग में संचालनालय में अपना अलग वजनदार रुतबा दिखाया जा रहा है। ऐसे में गत वर्ष सेवानिवृत्त होने जा रहे उपसंचालक के कार्यकाल की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर सवाल उठ रहे। 2025 -26 के बजट में भी भारी आर्थिक अनियमितता बरती गई है जिससे जुड़े दस्तावेज देने में विभाग के पसीने छूट रहे। सालों से जमे बाबू (लिपिक ) नियमों से परे अमर्यादित ,अनुशासनहीन पत्र व्यवहार कर रहे।
