भारत ने चांद पर छिपे ‘बर्फ के खजाने ‘का लगाया पता ,चंद्रयान -2 की खोज से दुनिया हैरान,इंसानी बस्तियों का रास्ता आसान !….

दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-2 मिशन ने चांद को लेकर एक और बड़ा रहस्य उजागर किया है। अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के बेहद ठंडे और अंधेरे क्रेटरों के नीचे बर्फ के मजबूत संकेत खोजे हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में चांद पर इंसानी बस्तियां बसाने, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अंतरिक्ष मिशनों के लिए ईंधन तैयार करने की दिशा में गेमचेंजर साबित हो सकती है।

यह खोज चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगे ‘डुअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (DFSAR) उपकरण से मिले डेटा के आधार पर की गई है। यह माइक्रोवेव इमेजिंग तकनीक चंद्र सतह के नीचे तक जांच करने में सक्षम है। वैज्ञानिकों ने दक्षिणी ध्रुव के कई क्रेटरों का अध्ययन किया, जिनमें ‘फॉस्टिनी क्रेटर’ के भीतर स्थित लगभग 1.1 किलोमीटर चौड़े एक छोटे क्रेटर में बर्फ के सबसे मजबूत संकेत मिले हैं।

👉क्रेटर की संरचना ने बढ़ाया वैज्ञानिकों का भरोसा

शोधकर्ताओं के अनुसार इस क्रेटर में ‘लोबेट-रिम मॉर्फोलॉजी’ जैसी विशेष संरचना भी देखी गई, जो किसी बहाव जैसी आकृति को दर्शाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संकेत हो सकता है कि उल्कापिंड का प्रभाव चंद्रमा की सतह के नीचे मौजूद बर्फ-समृद्ध परत तक पहुंचा था। यही वजह है कि वैज्ञानिक इस खोज को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

👉चांद के ध्रुवीय इलाकों में पानी की संभावना मजबूत

यह रिसर्च उन बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों को और मजबूत करती है जिनमें चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों में पानी या बर्फ की मौजूदगी की संभावना जताई गई है। इससे पहले भी चंद्रयान-2 के अध्ययन में चंद्र सतह पर पानी के अणुओं और हाइड्रॉक्सिल के संकेत मिले थे। हाल के वर्षों में ऑर्बिटर ने हाई-रेजोल्यूशन पोलर मैप्स तैयार किए हैं, जिनकी मदद से बर्फ वाले क्षेत्रों की पहचान की जा रही है।
चंद्रयान-2 का DFSAR बना तकनीकी उपलब्धि

ISRO के मुताबिक चंद्रयान-2 का DFSAR एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि यह चांद का अध्ययन करने वाला दुनिया का पहला पूर्ण पोलरिमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार है, जो L-बैंड और S-बैंड दोनों फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। 2019 में चंद्र कक्षा में पहुंचने के बाद से यह ऑर्बिटर हजारों डेटा सेट तैयार कर चुका है, जिनसे चांद की सतह और उसकी संरचना को समझने में मदद मिली है।

👉मून मिशन के लिए गेमचेंजर हो सकती है खोज

विशेषज्ञों का मानना है कि चांद पर बर्फ की मौजूदगी भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। पानी की बर्फ को पीने के पानी, ऑक्सीजन और यहां तक कि रॉकेट ईंधन में भी बदला जा सकता है। ऐसे में यह खोज लंबे समय तक चांद पर मानव मौजूदगी कायम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।